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तावीज लेने के लिए हुई थी इमरान-बुशरा की मुलाकात
बीबीसी हिंदी
Updated Mon, 19 Feb 2018 01:58 PM IST
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इमरान खान को तीसरी शादी की बधाई देना इसलिए भी बनता है क्योंकि निकाह में दुल्हन के घरवाले तो शरीक हुए पर दूल्हे की ओर से खानदान वालों की बजाय सिर्फ इक्का-दुक्का दोस्त या राजनीति के साथी ही मौजूद थे। हमारी दुआ है कि इस बार ये शादी लंबे समय तक चले क्योंकि खान साहब की निजी जिंदगी शांत होगी तो उनकी पार्टी और फिर देश की राजनीति में भी थोड़ा बहुत सुकून महसूस होगा।
अगर खान साहब का जी बाहर से ज्यादा घर में अटक गया तो इसका तुरंत फायदा यह होगा कि हर छोटे-बड़े मुद्दे पर त्योरी पहले से कम चढ़ेगी और भाषण, रोज-रोज की प्रेस कॉन्फ्रेंसों, जलसों, ट्वीटराना आरोपों और अपनी सफाइयों में भी उतार आएगा।
वैसे भी नई नवेली बीवियों के लिए मोबाइल फोन किसी सौतन से कम नहीं होता चूंकि नई भाभी ज्योतिष, तावीज, दम-दुरूद भी जानती हैं और इमरान खान की उनसे पहली मुलाक़ात भी तीन बरस पहले तावीज और दुआ लेने के लिए ही हुई थी इसलिए खान साहब ने भाभी के साथ किचन में हाथ बंटाना शुरू कर दिया या तीखा सालन पकाने और सिलाई-कढ़ाई पर लगा दिए गए तो कोई यह भी नहीं कह सकेगा कि खान साहब जनमुरीद हो गए क्योंकि वो तो अपनी पत्नी को पहले ही से संत और पीर मानते हैं।
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इमरान खान अध्यात्मिक बुशरा बीबी से 2015 में उस वक़्त प्रभावित हुए जब बुशरा बीबी ने इमरान खान के अमित शाह यानी जहांगीर तरीन की लोधरा से उप-चुनावों में विजेता होने की भविष्यवाणी की थी। मगर दो वर्ष बाद ही उच्च न्यायालय ने इन्हीं जहांगीर तरीन को झूठा और बेईमान क़रार देकर सीट वापस ले ली और पांच वर्ष के लिए नेतागिरी करने पर भी रोक लगा दी।
लगता है कि इसके बाद इमरान खान खुद पीर बन गए तभी तो उन्होंने जहांगीर तरीन के बेटे अली तरीन को पिता की खाली सीट पर टिकट दे दिया और अली इस सीट को नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग से छिनवा बैठे।
इमरान खान ने तीसरी शादी बहुत आस-उम्मीदों के साथ की है। देखना यह है कि मुरीद और पीरनी का यह खूबसूरत बंधन चार-पांच महीने बाद होने वाले आम चुनावों में इमरान खान की पीटीआई के लिए आसमानों से अच्छी खबर लाता है या फिर खान साहब के घर से यह आवाज आती है कि जोर का झटका हाय जोरों से लगा, शादी बन गई उम्रकैद की सजा।
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अगर खान साहब का जी बाहर से ज्यादा घर में अटक गया तो इसका तुरंत फायदा यह होगा कि हर छोटे-बड़े मुद्दे पर त्योरी पहले से कम चढ़ेगी और भाषण, रोज-रोज की प्रेस कॉन्फ्रेंसों, जलसों, ट्वीटराना आरोपों और अपनी सफाइयों में भी उतार आएगा।
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वैसे भी नई नवेली बीवियों के लिए मोबाइल फोन किसी सौतन से कम नहीं होता चूंकि नई भाभी ज्योतिष, तावीज, दम-दुरूद भी जानती हैं और इमरान खान की उनसे पहली मुलाक़ात भी तीन बरस पहले तावीज और दुआ लेने के लिए ही हुई थी इसलिए खान साहब ने भाभी के साथ किचन में हाथ बंटाना शुरू कर दिया या तीखा सालन पकाने और सिलाई-कढ़ाई पर लगा दिए गए तो कोई यह भी नहीं कह सकेगा कि खान साहब जनमुरीद हो गए क्योंकि वो तो अपनी पत्नी को पहले ही से संत और पीर मानते हैं।
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इमरान खान अध्यात्मिक बुशरा बीबी से 2015 में उस वक़्त प्रभावित हुए जब बुशरा बीबी ने इमरान खान के अमित शाह यानी जहांगीर तरीन की लोधरा से उप-चुनावों में विजेता होने की भविष्यवाणी की थी। मगर दो वर्ष बाद ही उच्च न्यायालय ने इन्हीं जहांगीर तरीन को झूठा और बेईमान क़रार देकर सीट वापस ले ली और पांच वर्ष के लिए नेतागिरी करने पर भी रोक लगा दी।
लगता है कि इसके बाद इमरान खान खुद पीर बन गए तभी तो उन्होंने जहांगीर तरीन के बेटे अली तरीन को पिता की खाली सीट पर टिकट दे दिया और अली इस सीट को नवाज शरीफ की मुस्लिम लीग से छिनवा बैठे।
इमरान खान ने तीसरी शादी बहुत आस-उम्मीदों के साथ की है। देखना यह है कि मुरीद और पीरनी का यह खूबसूरत बंधन चार-पांच महीने बाद होने वाले आम चुनावों में इमरान खान की पीटीआई के लिए आसमानों से अच्छी खबर लाता है या फिर खान साहब के घर से यह आवाज आती है कि जोर का झटका हाय जोरों से लगा, शादी बन गई उम्रकैद की सजा।