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'भारत-पाक की सीरीज न हुई तो कयामत न आएगी'

Sun, 29 Nov 2015 03:35 PM IST
अशोक कुमार बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अशोक कुमार बीबीसी संवाददाता, दिल्ली Updated Sun, 29 Nov 2015 03:35 PM IST
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D Day will not come if denies to play cricket: Pak Media

भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अलग-अलग विषयों के साथ पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में चर्चा का विषय बन रहे हैं। रोजनामा ‘जंग’ने दोनों देशों के बीच क्रिकेट सीरीज कराने की कोशिशों पर संपादकीय लिखा है पाक-भारत क्रिकेट सीरीज, आक्रामता की बजाय अमन की खिड़की।

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अखबार लिखता है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पाक-भारत क्रिकेट सीरीज श्रीलंका के न्यूट्रल ग्राउंड पर कराने की अनुमति दे दी है लेकिन ये सीरीज श्रीलंका में हो पाएगी या नहीं, इसका अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
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अखबार लिखता है कि अगर भारत श्रीलंका में भी पाकिस्तान के साथ खेलने को तैयार नहीं होता तो फिर पाकिस्तान को हालात का जायजा लेकर ही कोई फैसला करना होगा। अखबार को उम्मीद है कि भारत आक्रामता की बजाय संयम और अमन की खिड़की खुली रखेगा।
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रोजनामा ‘दुनिया’ लिखता है कि यह बात सही है कि भारत के साथ सीरीज खेलने से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को राजस्व मिलेगा, पर यह नहीं कहा जा सकता कि इससे दोनों देशों के रिश्ते बेहतर होंगे। अखबार ने पाकिस्तानी गृहमंत्री निसार अली खान के इस बयान का भी जिक्र किया है कि 'हम भारत से सीरीज खेलने के लिए क्यों मरे जा रहे हैं जबकि दूसरे पक्ष की तरफ से वायदे के बावजूद नखरे किए जा रहे हैं।' अखबार के मुताबिक ये सीरीज न हुई तो कोई कयामत नहीं आ जाएगी।

'नवा-ए-वक्त' लिखता है कि भारत के साथ जिस तरह क्रिकेट सीरीज खेलने को बेताबी दिखाई जा रही है, उससे पाकिस्तान की कमजोरी का संकेत मिलता है।

जनता का खून और निचोड़ने की तैयारी

D Day will not come if denies to play cricket: Pak Media

'एक्सप्रेस' ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने और परमाणु आपूर्ति समूह एनएसजी में शामिल होने की भारत की कोशिशों पर नाखुशी जताई है।

अखबार लिखता है कि भारत और अमरीका के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं इसलिए भारत को उम्मीद बंधी है कि वैश्विक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अमरीका उसका समर्थन करेगा। लेकिन इस पर अखबार की टिप्पणी है कि पाकिस्तान एक नहीं, कई बार अपनी चिंता जता चुका है कि अगर भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह या फिर सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनता है तो इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ेगा और पाकिस्तान के लिए नई मुश्किलें पैदा होंगी।

रोजनामा ‘इंसाफ’ने पाकिस्तान में आम जरूरतों की कई चीजों समेत कुल 313 वस्तुओं पर रेग्युलेटरी ड्यूटी बढ़ाने की योजना पर संपादकीय लिखा है जनता का खून और निचोड़ने की तैयारी। अखबार लिखता है कि सब्जी, दही, डबल रोटी और किसी हद तक मक्खन भी जनता की जरूरतें हैं। ड्यूटी बढ़ाने से उन पर असर पड़ेगा जबकि दूध तो पहले ही महंगा है जिसके दाम घटाने की तमाम कोशिशें बेकार गईं। अखबार के मुताबिक दालों की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं और सरकार जनता को निचोड़कर 40 अरब रुपए का बजट घाटा पूरा करने की धुन में है।

राजनाथ के 'सेक्युलर' वाले बयान में आरएसएस की सोच

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रुख भारत का करें तो 'सियासी तकदीर' ने लिखा है कि पहली बार संविधान दिवस मनाया गया लेकिन जिस तरह गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संविधान में 'सेक्युलर' शब्द को लेकर सवाल उठाया, उससे जाहिर होता है कि पूरे आयोजन का मकसद संविधान की सर्वोच्चता कायम रखना नहीं बल्कि इसे विवादास्पद बनाना है।

अखबार के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष ने सही कहा कि संविधान की धज्जियां उड़ाने वाले संविधान दिवस मना रहे हैं। अखबार की टिप्पणी है कि 'सेक्युलर' शब्द को लेकर राजनाथ सिंह ने जो कुछ कहा उसमें आरएसएस की सोच ही झलकती है।

अखबार के मुताबिक गृहमंत्री ने 42वें संविधान संशोधन को निशाना बनाते हुए कहा कि 'सेक्युलरिज्म' और 'सोशलिज्म' जैसे शब्द बाद में संविधान में जोड़े गए।

बिहार में शराबबंदी से नीतीश ने दिखायी नई राह

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'राष्ट्रीय सहारा' ने 'नीतीश कुमार का राष्ट्रीय कद' शीर्षक से लिखा है कि बिहार के चुनावी नतीजों के बाद नीतीश कुमार को पूरे देश में लोकप्रियता हासिल हुई है।

अखबार कहता है कि नीतीश कुमार की कायमाबी ने राष्ट्रीय सतह पर एक बहस भी छेड़ी है कि क्या उन्हें 2019 के चुनावों की कमान सौंपी जाए। वैसे भी भाजपा ने नीतीश को मोदी के मुकाबले खड़ा कर ही दिया है और नतीजा सबके सामने है।

‘रोजनामा खबरें’ने बिहार में शराबबंदी लागू करने के नीतीश सरकार के फैसले की तारीफ की है। अखबार लिखता है कि बीते 67 बरसों में गांव-गांव में भले नल न मिले और पीने का पानी एक-एक किलोमीटर दूर से लाना पड़े लेकिन ठेके जगह-जगह मिलेंगे।

अखबार की टिप्पणी है कि नीतीश कुमार ने अन्य राज्यों को भी रास्ता दिखाया है कि वो भी हिम्मत करके समाज के इस कोढ़ को जड़ से मिटाएं।

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