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पाकिस्तान ने चीन के आगे किया समर्पण, विपक्षी दलों ने किया जोरदार विरोध

Tue, 15 Dec 2020 11:43 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 15 Dec 2020 11:43 AM IST
सार

  • ग्वादर की सुरक्षा सीधे चीन को सौंपने की तैयारी पर घिरी पाकिस्तान सरकार
  • पाकिस्तान ने चीन के आगे किया समर्पण, विपक्षी दलों ने किया जोरदार विरोध
  • ग्वादर को कांटेदार तारों से घेरने के फैसले पर पाक सरकार पर उठे सवाल

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Pakistan surrenders to China, hand over security of Gwadar directly to China , opposition parties strongly protest
शी जिनपिंग-इमरान खान (फाइल फोटो)

विस्तार

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित ग्वादार शहर के बड़े हिस्से को कांटेदार तारों से घेरने के सरकार के फैसले पर देश में तीखा विवाद खड़ा हो गया है। बताया जाता है कि बंदरगाह वाले इस शहर में ये घेराबंदी चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना को बागियों के हमलों से बचाने के लिए की जा रही है। लेकिन 11 विपक्षी पार्टियों के गठबंधन- पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट घेराबंदी को तुरंत रोकने की मांग की है। उसने कहा है कि घेराबंदी से शहर में कारोबार और लोगों की मुक्त आवाजाही पर रोक लग जाएगी। विपक्षी सीनेटर कबीर मोहम्मद शाही ने एक प्रेस कांफ्रेंस में ये इल्जाम लगाया कि घेराबंदी से ग्वादार शहर दो भागों में बंट जाएगा।

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वकीलों के एक समूह ने घेराबंदी के फैसले को बलूचिस्तान हाई कोर्ट में चुनौती देने का एलान किया है। बलूचिस्तान बार काउंसिल के उपाध्यक्ष मुनीर काकर ने कहा है कि घेराबंदी ग्वादार बंदरगाह को शहर से अलग करने और उसे सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में लेने की कोशिश है। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि हाल के वर्षों में बलूचिस्तान के तटीय इलाकों में चीन का निवेश और उसके कारोबारी हित का काफी विस्तार हुआ है। इसलिए ये संभावना है कि इस प्रांत के तटीय इलाकों को बाकी प्रांत से अलग कर दिया जाए और उनका प्रशासन सीधे संघीय सरकार अपने हाथ में ले ले।
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पाकिस्तानी मीडिया की खबरों के मुताबिक सरकार की योजना 24 वर्ग किलोमीटर इलाके की घेराबंदी करने की है। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत पाकिस्तान में 50 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है। इस निर्माण योजना का केंद्रीय स्थल ग्वादार ही है। खबरों के मुताबिक घेराबंदी समुद्र की गहराई तक की जाएगी। ये कार्य चीन करेगा और बाद में उसकी देखरेख भी उसके जिम्मे होगा। लेकिन चीन के निवेश से बन रहे ग्वादार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और 80 नई आवासीय परियोजनाएं इसे घेरे से बाहर होंगी। स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक घेरेबंदी के अंदर आने वाले शहर में प्रवेश के लिए दो गेट होंगे। घेरे के ऊपर पांच सौ से ज्यादा हाई डेफिनिशन कैमरे लगाए जाएंगे।
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फाइनेंशियल टाइम्स से जुड़ी जापान स्थित वेबसाइट निक्कई एशिया के मुताबिक ये घेराबंदी ग्वादार सुरक्षित शहर परियोजना का हिस्सा है, जिसके लिए 2020-21 के संघीय बजट में पांच करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। ये धन चीन दे रहा है। घेराबंदी का फैसला ग्वादार में चीनी हितों की सुरक्षा को लेकर बढ़ रही चिंताओं के कारण किया गया। मई 2019 में बलूच अलगाववादियों ने बंदरगाह से एक किलोमीटर की दूसरी पर स्थित पर्ल कॉन्टिनेंटल होटल पर हमला किया था। उसके बाद ग्वादार को हथियारों से मुक्त शहर बनाने का फैसला हुआ। घेराबंदी उसी योजना का हिस्सा है।

वॉशिगंटन स्थित नियर- ईस्ट साउथ एशिया सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के विजिटिंग फेलो मोहन मलिक ने निक्कई एशिया से कहा कि ग्वादार में घेराबंदी यह जाहिर करती है कि चीन बलूचिस्तान में अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों की हिफाजत के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। मुमकिन है कि आगे चल कर ग्वादार में घेरे के अंदर और बाहर कड़ी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। दक्षिण एशियाई मामलों के वॉशिंगटन स्थित विशेषज्ञ मलिक सिराज अकबर ने कहा है कि ऐसा लगता है कि चीन ने सुरक्षा का यह कदम उठाने के लिए पाकिस्तान पर दबाव डाला। अकबर ने कहा कि पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था की हालत को लेकर चीन का सब्र टूट रहा है। पाकिस्तान इसे हल करे, इसके लिए अब वह और इंतजार करने के मूड में नहीं है।

लेकिन बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री जाम कमाल ने इस बात का खंडन किया है कि ग्वादार शहर में घेराबंदी की जा रही है। लेकिन उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सुरक्षा के लिए कुछ कदम जरूर उठाए गए हैँ। उधर ग्वादार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष नवीद कलमाती ने कहा है कि घेरेबंदी से ग्वादार स्थित निवेशकों में विश्वास पैदा होगा। शहर को हथियार मुक्त बनाना जरूरी कदम है।


मगर बलूचिस्तान के कई जानकारों ने कहा है कि ऐसी घेरेबंदी से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा है कि बेहतर रास्ता स्थानीय आबादी का असंतोष दूर कर उन्हें भरोसे में लेना होगा। लेकिन इन जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार चीन के एहसान तले इतना दबी हुई है कि वह उसके सामने तन कर खड़ी होने की स्थिति में नहीं है। इसलिए वह सीधे वो कदम उठा रही है, जो चीन उसे कह रहा है।

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