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पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट: 8 फरवरी को हुए आम चुनाव रद्द करने की मांग वाली अर्जी खारिज, धांधली के लगाए गए थे आरोप

Wed, 21 Feb 2024 03:39 PM IST
आदर्श शर्मा वर्ल्ड डेस्क,अमर जाला,इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क,अमर जाला,इस्लामाबाद Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 21 Feb 2024 03:39 PM IST
सार

धांधली के आरोपों पर पाकिस्तान में हुए आठ फरवरी के आम चुनाव को रद्द करने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह महज एक पब्लिसिटी स्टंट है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर भारी भरकम जुर्माना भी लगाया। 

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Pakistan Supreme Court dismisses plea seeking annulment of Feb 8 general elections over allegations of rigging
पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान में बीते आठ फरवरी को आम चुनाव हुए थे, लेकिन किसी भी दल को इस चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था। जिसके बाद से ही पाकिस्तान में गठबंधन सरकार के गठन के लिए दलों के बीच बैठकों का दौर शुरू हुआ। हालांकि नवाज शरीफ और जरदारी की पार्टी ने गठबंधन सरकार बनाने की घोषणा की। इस बीच, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में  धांधली के आरोपों पर आठ फरवरी के आम चुनावों को रद्द करने की याचिका दायर की गई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह एक महज प्रचार स्टंट है।
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कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर ही लगाया जुर्माना
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने  याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया। सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर अली खान ने पिछले सप्ताह अदालत से निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका की प्रत्यक्ष निगरानी और 30 दिनों के भीतर नए चुनाव कराने का आदेश देने का आग्रह किया था। दायर याचिका में मामले पर फैसला होने तक नई सरकार के गठन को रोकने के लिए स्थगन आदेश की भी मांग की थी।
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याचिकाकर्ता की ई-मेल को कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पढ़ा
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) काजी फैज ईसा की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इससे पहले, अदालत को सूचित किया गया था कि अली एक पूर्व ब्रिगेडियर थे जिस पर 2012 में कोर्ट मार्शल का मुकदमा चलाया गया था और उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को भेजे गए एक ई-मेल को पढ़कर सुनाया, जिसमें उसने कहा था कि वह विदेश में है और अपनी याचिका वापस लेने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने कहा कि यह पब्लिसिटी स्टंट है। याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने न होने की बात कही थी, क्योंकि  वह बहरीन में थे।
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