Pakistan: विशेषज्ञों की राय- पल भर की है पाकिस्तान की खुशी, फिर छा जाएंगे मुसीबत के बादल
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के संचालक मंडल के सदस्य महफूज अली खान ने स्वीकार किया है कि शेयर बाजारों में आया उछाल तात्कालिक प्रतिक्रिया है। ‘कुछ ही रोज में यह सुखबोध गायब हो जाएगा। कुछ महीनों के अंदर हम जहां थे, वहीं वापस पहुंच जाएंगे।’
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के ऋण की किस्तें देने पर राजी हो जाने के बाद पाकिस्तान के शेयर बाजार उछाल आया हुआ है। डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपये की कीमत भी संभली है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ फौरी राहत है। देश का आर्थिक ढांचा इतना कमजोर हो चुका है कि जल्द ही आर्थिक संकट फिर से गंभीर रूप ले लेगा। देश में जारी राजनीतिक अस्थिरता भी चिंता का कारण बनी हुई है।
पिछले हफ्ते आईएमएफ पाकिस्तान को तीन बिलियन डॉलर का ऋण जारी करने को तैयार हुआ था। इसमें से 1.1 बिलियन डॉलर की रकम इसी महीने पाकिस्तान को मिल जाएगी। इससे डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) होने के कगार पर पहुंच चुके पाकिस्तान को फिलहाल संकट टालने में मदद मिलेगी। इसी वजह से देश में लंबे समय बाद शेयर बाजारों में उछाल आया। उधर एक डॉलर की कीमत 275 पाकिस्तानी रुपये हो गई, जो मई में 310 रुपये तक पहुंच गई थी।
पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक- स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर जमील अहमद ने कहा है- ‘आईएमएफ डील के परिणामस्वरूप बाजारों में स्थिरता आएगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी इसका अच्छा असर होगा।’ लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अस्थायी है। अर्थव्यवस्था और कर व्यवस्था के जानकार इकराम उल हक ने कहा है- ‘अभी दिखे सकारात्मक संकेत आर्थिक स्थिति में सुधार पर आधारित नहीं हैं। यह फौरी असर है। अगले आम चुनाव को लेकर अस्थिरता जारी रहने पर ये असर जल्द ही खत्म हो जाएगा।’
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के संचालक मंडल के सदस्य महफूज अली खान ने स्वीकार किया है कि शेयर बाजारों में आया उछाल तात्कालिक प्रतिक्रिया है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में उन्होंने कहा- ‘कुछ ही रोज में यह सुखबोध गायब हो जाएगा। कुछ महीनों के अंदर हम जहां थे, वहीं वापस पहुंच जाएंगे।’
दो अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों- मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस और फिच रेटिंग्स ने भी कहा है कि कर्ज वचनबद्धताओं को पूरा करने और अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए पाकिस्तान को उससे कहीं अधिक रकम की जरूरत है, जितनी उसे आईएमएफ से मिलने जा रही है।
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि आईएमएफ की शर्तों के तहत अब पाकिस्तान को मुद्रास्फीति नियंत्रित करने वाले कदम उठाने होंगे, जिसकी मार आम जन पर पड़ेगी। इन शर्तों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने प्राकृतिक गैस की कीमत में 45 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी की योजना बनाई है। स्थानीय अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक बिजली के प्रति यूनिट शुल्क में साढ़े तीन से चार रुपये तक का इजाफा किया जाने वाला है।
पाकिस्तान सरकार ने कुछ समय पहले पेश अगले वित्त वर्ष के बजट में वेतनभोगी तबकों पर टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी थी। यह कदम भी आईएमएफ की शर्त के कारण उठाया गया। इकराम उल हक ने कहा- मध्यवर्गीय कर्मचारियों पर बढ़ाया गया टैक्स दुखद है। ये लोग पहले ही असाधारण महंगाई झेल रहे हैं। महंगाई दर मई में 38 फीसदी दर्ज हुई थी। जून में यह 20 फीसदी रही।