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Pakistan: पंजाब में चुनाव टालने के लिए ‘राजनीतिक संवाद’ को ढाल बना रहे हैं शहबाज शरीफ?

Thu, 20 Apr 2023 01:17 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 20 Apr 2023 01:17 PM IST
सार

Pakistan: प्रधानमंत्री शरीफ ने बुधवार को अपने आवास पर पीडीएम में शामिल नेताओं के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। उसमें देश की मौजूदा हालत पर विचार किया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख से पैदा हुए ‘संवैधानिक संकट’ के बीच आगे का रास्ता तय करने पर बातचीत की गई...

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Pakistan: Shahbaz Sharif is shielding 'political dialogue' to avoid elections in Punjab
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पंजाब में प्रांतीय असेंबली के चुनाव के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब पाकिस्तान के सत्ताधारी गठबंधन की सारी उम्मीदें विपक्ष से बातचीत पर टिक गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह साफ कर दिया कि 14 मई को प्रांतीय चुनाव कराने के अपने आदेश में वह मौजूदा हालात के बीच कोई फेरबदल नहीं करेगा। लेकिन कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर चुनाव टालने के बारे में सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बन जाए, तो वह इस मामले में रियायत देने पर विचार कर सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल के नेतृत्व वाली तीन जजों के सामने सरकार की तरफ से दलील दी गई कि राजनीतिक वार्ता पंजाब और खैबर पख्तूनवा प्रांतों में चुनाव को लेकर चल रहे विवाद को हल करने का वैकल्पिक मार्ग हो सकती है। अटार्नी जनरल मंसूर अवान ने कोर्ट को बताया कि विदेश मंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता बिलावल भुट्टो जरदारी ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की है। उसके बाद सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) में शामिल दलों के नेताओं की बैठक भी हुई है। भुट्टो जरदारी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से संवाद कायम करने की वकालत कर रहे हैं।

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लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी राजनीतिक वार्ताएं पाकिस्तान के संविधान में तय प्रावधानों को नजरअंदाज करने का बहाना नहीं हो सकतीं। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक किसी सदन के भंग होने के बाद 90 दिन में उसका आम चुनाव कराना अनिवार्य है। कोर्ट ने इस विवाद पर विभिन्न राजनीतिक दलों की राय प्रत्यक्ष रूप से जानने की पहल भी की है। उसके तहत उसने विभिन्न दलों को नोटिस जारी कर उनसे अपने अधिकृत प्रतिनिधि कोर्ट के सामने भेजने का निर्देश दिया है।

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प्रधानमंत्री शरीफ ने बुधवार को अपने आवास पर पीडीएम में शामिल नेताओं के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। उसमें देश की मौजूदा हालत पर विचार किया गया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख से पैदा हुए ‘संवैधानिक संकट’ के बीच आगे का रास्ता तय करने पर बातचीत की गई। सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने तय किया कि ईद के बाद सभी राजनीतिक दलों के नेता इकट्ठे होंगे। उस बैठक में उन दलों के नेताओं को भी बुलाया जाएगा, जिनकी नुमाइंदगी नेशनल असेंबली में नहीं है। बैठक का मकसद राजनीतिक आम सहमति तैयार करना होगा।

पीडीएम नेताओं ने बैठक के बाद बताया कि सत्ताधारी गठबंधन पहले ही अगले आम चुनाव के बारे में राय-मशविरे की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। प्रधानमंत्री ने इसके लिए एक समिति का गठन किया है। बिलावल भुट्टो जरदारी और जमात-ए-उलेमा (एफ) के नेता मौलाना फजलुर रहमान के अलावा जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख को भी इस समिति का हिस्सा बनाया गया है। पीडीएम ने कहा है कि वह तटस्थ सरकार की देखरेख में एक साथ पूरे देश में आम चुनाव कराने के लिए वचनबद्ध है।

लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक पीडीएम अभी भी पंजाब में मई में चुनाव कराने को तैयार नहीं दिख रहा है। इसीलिए वह अक्तूबर में नेशनल असेंबली के साथ-साथ चारों प्रांतों की असेंबलियों का चुनाव कराने की वकालत भी कर रहा है।

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