Pakistan: इमरान को घेरने की रणनीति कहीं उलटी ना पड़ जाए शहबाज शरीफ सरकार को!
Pakistan: शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार ने अमेरिकी कूटनीतिक संदेश के मामले की ही जांच कराने का फैसला किया है। कैबिनेट की बैठक में इस जांच के दायरे पर विचार के लिए एक उप-समिति बनाने का फैसला लिया गया है...
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पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर नकेल करने कसने की एक और कोशिश की है। इसके पहले इस तरह उसकी तमाम कोशिशें बेअसर रही हैं। पर्यवेक्षकों ने ताजा कोशिश की सफलता पर भी संदेह जताया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय से ऑडियो लीक मामले में शहबाज सरकार ने इमरान खान के खिलाफ जांच कराने का औपचारिक रूप से फैसला किया है। जबकि पहले इस मुद्दे पर खुद सरकार और सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता कठघरे में खड़े होते दिख रहे थे। कई ऑडियो क्लिप पिछले दस दिन में लीक हुए हैं। उनमें से कुछ में जो बातें सुनी गईं, उनके आधार पर प्रधानमंत्री, उनके परिवार, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों पर पद दुरुपयोग के आरोप लगे। लेकिन दो ऑडियो क्लिप्स में प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान इमरान खान अमेरिका से आए कूटनीतिक संदेश का राजनीतिक लाभ उठाने की रणनीति बनाते सुने गए।
शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार ने अमेरिकी कूटनीतिक संदेश के मामले की ही जांच कराने का फैसला किया है। कैबिनेट की बैठक में इस जांच के दायरे पर विचार के लिए एक उप-समिति बनाने का फैसला लिया गया है। सरकार ने इस बारे में एक दस्तावेज को मंजूरी दी है, जिसमें कहा गया है कि उप-समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय जांच एजेंसी फेडरल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (एफआईए) को मामले की जांच सौंपी जा सकती है। उस जांच के आधार पर आगे जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने जो उप-समिति बनाने का फैसला किया है, उसमें सत्ताधारी गठबंधन में शामिल सभी पार्टियों के नुमाइंदों को शामिल किया जाएगा। सरकार ने आरोप लगाया है कि लीक ऑडियो के आधार पर इमरान खान और तत्कालीन सरकार में उनके सहयोगियों पर ‘आपराधिक साजिश’ में शामिल होने का मामला बनता है। विश्लेषकों के मुताबिक जिस अमेरिकी कूटनीतिक संदेश के मामले में सरकार आगे बढ़ रही है, उसके बारे में पिछले हफ्ते खबर आई थी कि वह प्रधानमंत्री आवास से गायब हो गया है। अब संभवतया उसे गायब करने के इल्जाम में भी इमरान खान को घेरने की रणनीति अपनाई गई है।
पूर्व विदेश मंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि कूटनीतिक संदेश की जांच कराने के सरकार के फैसले से यह साबित हो गया है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों मे हस्तक्षेप करने वाला संदेश भेजा था। उन्होंने मुल्तान में कहा- ‘सरकार ने कूटनीतिक संदेश के मामले में हमारे रुख को स्वीकार कर लिया है।’ पीटीआई के सीनेटर शिल्बी फराज सवाल उठाया है- ‘ये चर्चा किस बारे में चल रही है? क्या यह देश की बदहाल अर्थव्यवस्था से ध्यान हटाने की कोशिश है?’
पीटीआई नेताओं के साथ-साथ कई स्वतंत्र पर्यवेक्षकों ने भी राय जताई है कि सरकार लोगों का ध्यान सियासी विवादों पर केंद्रित रखना चाहती है, ताकि बिगड़ते आर्थिक हालात चर्चा के केंद्र में न आएं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक सरकार की ये रणनीति उलटी पड़ सकती है। इमरान खान पर चर्चा केंद्रित रखने से जहां उनके समर्थक अधिक मजबूती से गोलबंद हो रहे हैं, वहीं जनता में भी उनके लिए हमदर्दी बढ़ सकती है।