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Cipher Case: इमरान के वकील का अदालत से आग्रह- आजम खान की गवाही को नजरअंदाज करें; जानें पूरा मामला

Wed, 03 Apr 2024 06:06 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 03 Apr 2024 06:06 PM IST
सार

Cipher Case: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के वकील सलमान सफदर ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह राजनयिक गोपनीय केबल लीक मामले में उनके पूर्व सहयोगी आजम खान की गवाही को नजरअंदाज करे।

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Pakistan's jailed former PM Imran Khan's lawyer asks court to disregard Azam Khan's testimony
इस्लामाबाद हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के वकील ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह राजनयिक गोपनीय केबल लीक मामले में उनके पूर्व सहयोगी आजम खान की गवाही को नजरअंदाज करे। इसके पीछे उन्होंने दलील दी कि यह गवाही संदिग्ध परिस्थितियों में दर्ज की गई थी। 

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जून 2023 में लापता हो गए थे आजम खान
मामले पर उच्च न्यायालय (आईएचसी) के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगल हसन औरंगजेब की खंडपीठ मंगलवार को सुनवाई कर रही थी। इमरान के वकील सलमान सफदर ने दलील दी कि आरोपी आजम खान जून 2023 में लापता हो गए थे। तब इमरान के पूर्व प्रमुख सचिव ने अपना इकबालिया बयान (कबूलनामा) दर्ज करने के बजाय एक जांच अधिकारी और मजिस्ट्रेट के सामने उनके खिलाफ गवाही दी। आजम खान खान कभी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के संस्थापक करीबी रहे थे। 

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इमरान और कुरैशी को ठहराया गया था दोषी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च न्यायालय इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जो राष्ट्र हितों को नुकसान पहुंचने के लिए एक गोपनीय राजनयिक पत्र के दुरुपयोग के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने के खिलाफ दायर की गईं थीं। दोनों नेताओं को सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत दोषी ठहराया गया था। 

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इमरान ने रैली में लहराया था कागज का टुकड़ा
अप्रैल 2022 में अविश्वास मत के जरिए पीटीआई की सरकार हटाई गई थी। इससे ठीक दो हफ्ते पहले इमरान खान ने इस्लामाबाद में एक सार्वजनिक रैली में एक कागज का टुकड़ा लहराते हुए कहा था कि विदेशी ताकतें उनके सरकार को गिराने की साजिश रच रही हैं। यह उसका सबूत है। यह कागज का टुकड़ा कथित तौर पर गोपनीय राजनयिक पत्र की एक प्रति थी। 

संदिग्ध परिस्थिति में दर्ज की गई आजम की गवाही
सफदर ने कहा, मामले में प्राथमिकी पिछले साल 15 अगस्त को दर्ज की गई थी। इमरान खान ने अगले दिन अपना बयान दर्ज कराया था। उच्च न्यायालय की पीठ ने रिकॉर्ड पर गौर किया और पाया कि आजम खान 15 जून को लापता हो गए थे और एक महीने बाद अपना बयान दर्ज कराने के बाद 20 जुलाई को फिर से सामने आए। इमरान के वकील ने पूर्व नौकरशाह की गवाही पर संदेह जताया और दलील दी कि यह गवाही संदिग्ध परिस्थितियों में दर्ज की गई थी। उन्होंने अदालत से आजम खान की गवाही पर कोई भरोसा न करने का आग्रह किया। सफदर ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने अन्य आरोपियों को पूर्व नोटिस जारी किए बिना उनका बयान दर्ज किया। 

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