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पाकिस्तान: इमरान सरकार ने तालिबान आतंकी मुल्ला मोहम्मद रसूल को रिहा किया, पांच साल पहले किया था गिरफ्तार
Wed, 18 Aug 2021 07:18 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 18 Aug 2021 07:18 PM IST
सार
मुल्ला तालिबान का जाना-माना चेहरा था, लेकिन मुल्ला अख्तर मंसूर के तालिबान प्रमुख बनने के विरोध में उसने अपना अलग संगठन बना लिया। इसके बाद पाकिस्तान ने उसे पकड़कर जेल में डाल दिया था। तब से वो जेल में ही बंद था।
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मुल्ला मोहम्मद रसूल
- फोटो : साेशल मीडिया
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विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान किसी न किसी तरह से उसकी मदद करने की कोशिश कर रहा है। इसी के मद्देजर पाकिस्तान सरकार ने बुधवार को तालिबान आतंकी मुल्ला मोहम्मद रसूल को रिहा कर दिया है। मुल्ला पिछले पांच साल से पाकिस्तान की जेल में बंद था। मुल्ला रसूल को मार्च 2016 में बलूचिस्तान प्रांत में गिरफ्तार किया गया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुल्ला तालिबान का जाना-माना चेहरा था, लेकिन मुल्ला अख्तर मंसूर के तालिबान प्रमुख बनने के विरोध में उसने अपना अलग संगठन बना लिया। इसके बाद पाकिस्तान ने उसे पकड़कर जेल में डाल दिया था। तब से वो जेल में ही बंद था।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2015 में पश्चिमी फराह प्रांत में तालिबान लड़ाकों की एक बैठक में रसूल को एक अलग समूह का नेता चुना गया था। रसूल का समर्थन करने वाले लड़ाकों ने मंसूर पर व्यक्तिगत लालच के लिए पाकिस्तान के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर की मौत के बाद रसूल और मंसूर दोनों ने तालिबान के नेतृत्व का दावा किया था।
रसूल के नेतृत्व वाले गुट ने अफगान सरकार के साथ शांति वार्ता का विरोध किया था और मंसूर पर मुल्ला उमर की मौत को छिपाने का आरोप लगाया था। तालिबान के संस्थापक, उमर की 2013 में मौत हो गई थी। उसकी मौत को दो साल तक छिपाकर रखा गया था।
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टीटीपी के एक हजार आतंकियों को रिहा किया
वहीं, पाकिस्तान का तालिबानी संगठन अब अफगानिस्तानी तालिबान के साथ खुलकर एकजुटता दिखा रहा है। तालिबान ने काबुल में प्रवेश करते ही वहां की जेल में कैद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक हजार आतंकियों को रिहा कर दिया है। समा न्यूज के मुताबिक काबुल की बगराम जेल से रिहा किए गए टीटीपी के एक हजार कमांडरों में मौलाना फाकिर मुहम्मद भी शामिल है। यह टीटीपी के पूर्व उप प्रमुख हैं।
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बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2015 में पश्चिमी फराह प्रांत में तालिबान लड़ाकों की एक बैठक में रसूल को एक अलग समूह का नेता चुना गया था। रसूल का समर्थन करने वाले लड़ाकों ने मंसूर पर व्यक्तिगत लालच के लिए पाकिस्तान के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर की मौत के बाद रसूल और मंसूर दोनों ने तालिबान के नेतृत्व का दावा किया था।
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रसूल के नेतृत्व वाले गुट ने अफगान सरकार के साथ शांति वार्ता का विरोध किया था और मंसूर पर मुल्ला उमर की मौत को छिपाने का आरोप लगाया था। तालिबान के संस्थापक, उमर की 2013 में मौत हो गई थी। उसकी मौत को दो साल तक छिपाकर रखा गया था।
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टीटीपी के एक हजार आतंकियों को रिहा किया
वहीं, पाकिस्तान का तालिबानी संगठन अब अफगानिस्तानी तालिबान के साथ खुलकर एकजुटता दिखा रहा है। तालिबान ने काबुल में प्रवेश करते ही वहां की जेल में कैद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक हजार आतंकियों को रिहा कर दिया है। समा न्यूज के मुताबिक काबुल की बगराम जेल से रिहा किए गए टीटीपी के एक हजार कमांडरों में मौलाना फाकिर मुहम्मद भी शामिल है। यह टीटीपी के पूर्व उप प्रमुख हैं।