एक सप्ताह बाद पाक को लगेगा बड़ा झटका, ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी में एफएटीएफ
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फ्रांस की राजधानी पेरिस में 12 अक्तूबर से 15 अक्तूबर तक होने वाली एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। एफएटीएफ की इकाई एशिया पैसिफिक ग्रुप की रिपोर्ट में पाकिस्तान आतंकी फंडिंग को रोकने में विफल साबित हुआ है।
पाकिस्तान को पिछले साल जून में पेरिस में हुई एफएटीएफ की बैठक में ग्रे सूची में रखा गया था और चेतावनी दी गई थी कि अक्तूबर 2019 तक वह आतंकी फंडिंग रोकने की कार्रवाई को अंजाम दे। कहा यह भी जा रहा है कि पाकिस्तान को ईरान और उत्तर कोरिया के साथ ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
इस बैठक में इस बात का निर्धारण हो जाएगा कि पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में बना रहेगा या उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। हालांकि, चीन अपने सदाबहार दोस्त को ब्लैकलिस्ट होने से बचाने की पूरी कोशिश करेगा।
शनिवार को एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, संभावना अधिक है कि पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में बरकरार रखा जाएगा क्योंकि उसने एफएटीएफ द्वारा निर्धारित कुछ सिफारिशों का पालन किया है।
पाकिस्तानी समाचारपत्र द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक मामलों के विभाग के प्रमुख हम्माद अजहर के नेतृत्व में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल 13 अक्टूबर को फ्रांस के लिए रवाना होने वाला है, क्योंकि एफएटीएफ 14 और 15 अक्तूबर को पाकिस्तान के मुद्दे पर विचार करेगा।
डॉन के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SECP) द्वारा अंतिम रूप दी गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोग द्वारा जारी व्यापक दिशानिर्देशों के आधार पर वित्तीय संस्थानों को एक वर्ष में 219 संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट मिली है। जबकि पिछले आठ सालों में पाकिस्तान में कुल 13 ऐसे मामले दर्ज थे।
भारत ने एफएटीएफ और यूएन के बीच सहयोग की बात की
संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति की बैठक में 'अंतराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपाय' विषय पर आयोजित बैठक में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव येड़ला उमाशंकर ने आतंकियों और आतंकी समूहों को अन्य देशों द्वारा प्रत्यक्ष या परोक्ष वित्त पोषण की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इससे ही वह आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे पाते हैं।
उमाशंकर ने कहा कि आतंक के वित्तपोषण को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र तथा वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफटीएफए) के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आतंक को पैदा करने वाले संसाधनों के प्रवाह को रोकने की जरूरत है और इसके लिए लिए क्षेत्रीय स्तर पर सामूहिक भागीदारी से प्रयास करने होंगे। आतंक के वित्त पोषण से लड़ने और उसे रोकने के लिए वैश्विक मानक तय करने में एफएटीएफ की महत्वपूर्ण भूमिका है और संयुक्त राष्ट्र को ऐसी संस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश या उनकी मशीनरी की ओर से आतंकी समूहों या आतंकियों को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से वित्तीय सहायता पहुंचाने की भारत कड़ी निंदा करता है। इसमें आतंकी गतिविधियों से जुड़े आपराधिक मामलों का बचाव करना भी शामिल है।
भारत की टिप्पणी उस पृष्ठभूमि में आई है जिसमें पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंक निरोधी समिति से अनुरोध किया था कि मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को बुनियादी खर्चे के लिए वह उसके बैंक खाते से पैसा निकालने की इजाजत दे।
सईद को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी घोषित किया हुआ है। उसे आतंक के वित्त पोषण के एक मामले में इस वर्ष 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक किसी भी देश को आतंकी घोषित किए गए लोगों के सभी आर्थिक स्रोतों, अन्य वित्तीय संपत्तियों तथा कोषों पर रोक लगाना होती है।