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Peshawar Attack: पाकिस्तान के गृह मंत्री ने भी स्वीकारा- मुजाहिदीन को युद्ध के लिए तैयार करना बड़ी भूल थी
Wed, 01 Feb 2023 02:44 PM IST
गुलाम अहमद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: गुलाम अहमद
Updated Wed, 01 Feb 2023 02:44 PM IST
सार
पाकिस्तान के गृह मंत्री ने यह भी दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों को रिहा कर दिया था, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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Pak Interior Minister Rana Sanaullah
- फोटो : ANI
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विस्तार
पेशावर मस्जिद आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान को अब अपने किए पर पछतावा हो रहा है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री (गृह मंत्री) राना सनाउल्लाह ने नेशनल असेंबली (पाक संसद) में स्वीकार किया कि मुजाहिदीन (अब आतंकवादी) को युद्ध के लिए तैयार करना बड़ी गलती थी। सनाउल्लाह ने मंगलवार को संसद के उच्च सदन को संबोधित करते हुए कहा, "हमें मुजाहिदीन तैयार करने की जरूरत नहीं थी। हमने मुजाहिदीन तैयार किए, बाद में आतंकवादी बन गए।"
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इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में इस बात को स्वीकार किया था कि पाकिस्तान ने ही आतंकवाद के बीज बोए थे। साथ ही उन्होंने कहा था कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन पर फैसला करेगी।
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पाकिस्तान के गृह मंत्री सनाउल्लाह का यह बयान पेशावर में 30 जनवरी को हुए मस्जिद हमले के बाद आया है, जिसमें 100 लोग मारे गए थे और 220 से अधिक घायल हुए थे। दोपहर की नजाम के दौरान मस्जिद के सेंट्रल हॉल में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया था। प्रतिबंधित टीटीपी ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
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आंतरिक मंत्री ने यह भी दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) या पाकिस्तानी तालिबान के आतंकवादियों को रिहा कर दिया था, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। पाकिस्तान के गृह मंत्री ने इस विश्वास को स्वीकार किया कि टीटीपी अफगान-पाकिस्तानी सीमा पर सक्रिय विभिन्न इस्लामी सशस्त्र आतंकवादी समूहों का प्रमुख संगठन है। उन्होंने कहा कि यह सोचना गलत है कि आतंकवादी अपने हथियार डाल देंगे और कानून के आगे झुक जाएंगे।
पिछले साल नवंबर में टीटीपी और पाक सरकार के बीच शांति समझौता टूटने के बाद से पाकिस्तान में आतंकी हमले बढ़ गए हैं। टीटीपी का गठन वर्ष 2007 में कई सशस्त्र समूहों को एकजुट करके किया गया था, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान के अमेरिका का सहयोग करने का विरोध किया था। टीटीपी ने अमेरिका और नाटो के खिलाफ अफगान तालिबान की लड़ाई का समर्थन किया था।
टीटीपी के आतंकवादियों को अफगानिस्तान में मिला सुरक्षित ठिकाना...
मंगलवार को सनाउल्लाह ने जोर देकर कहा था कि यह सोचना गलत है कि टीटीपी अफगान तालिबान से अलग है। उन्होंने कहा कि तालिबान का समर्थन करना पाकिस्तान में मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार है। सनाउल्लाह ने कहा कि प्रतिबंधित टीटीपी के आतंकवादियों को पड़ोसी देश में सुरक्षित ठिकाना मिल गया है। अफगान तालिबान द्वारा पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ समझौता किए जाने के बावजूद आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि हुई है, जबकि तालिबान ने आश्वासन दिया था कि वे अपनी जमीन को किसी अन्य देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देंगे।