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Pakistan: शहबाज शरीफ सरकार के लिए बड़ी मुश्किल, राष्ट्रपति ने फिर दागा गोला

Sat, 09 Jul 2022 04:59 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 09 Jul 2022 04:59 PM IST
सार

अल्वी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भेजे एक पत्र में पत्रकारों और अन्य मीडियाकर्मियों को परेशान करने की घटनाओं पर चिंता जताई है। ये पत्र उन्होंने गुरुवार को भेजा। उसी शाम राष्ट्रपति के ट्विटर अकाउंट से उसे सार्वजनिक कर दिया गया...

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Pakistan President Arif Alvi wrote a letter to PM Shahbaz Sharif, expressed concern over incidents of harassment to journalists and other media persons
पाक राष्ट्रपति आरिफ अल्वी और प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी की ‘एक्टिविस्ट’ भूमिका से देश के सत्ताधारी हलकों में असहजता का आलम है। अल्वी शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट सरकार पर तीर चलाने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। अब उन्होंने पत्रकारों को परेशान करने की हालिया घटनाओं को लेकर सरकार पर गोला दागा है।

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अल्वी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भेजे एक पत्र में पत्रकारों और अन्य मीडियाकर्मियों को परेशान करने की घटनाओं पर चिंता जताई है। ये पत्र उन्होंने गुरुवार को भेजा। उसी शाम राष्ट्रपति के ट्विटर अकाउंट से उसे सार्वजनिक कर दिया गया। इसमें अल्वी ने कहा है- ‘स्वतंत्र राय जताने और आलोचना करने के लिए पत्रकारों पर अवांछित दबाव डाले जा रहे हैं। उन्हें डराने के लिए गिरफ्तार करने, पीटने, और परेशान करने की घटनाएं हो रही हैं। उन पर राजद्रोह का मुकदमा करने जैसी घटनाएं भी हुई हैं।’

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विपक्ष ने की राष्ट्रपति की तारीफ

विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने ये पत्र जारी होते ही इस पर बयान दिया। पार्टी के नेता फव्वाद चौधरी ने इस बयान में ‘सही मकसद के पक्ष में खड़े होने और सबसे अहम मुद्दों की तरफ ध्यान खींचने’ के लिए राष्ट्रपति की तारीफ की। राष्ट्रपति बनने से पहले आरिफ अल्वी का संबंध पीटीआई से ही था। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के शासनकाल में राष्ट्रपति चुना गया था। अल्वी ने अपने बयानों से इसके पहले भी पीडीएम सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। इसके अलावा वे कुछ विधायी प्रक्रियाओं पर अपनी मुहर लगाने से इनकार कर चुके हैं।

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पाकिस्तान में संसदीय प्रणाली की सरकार है। इसमें राष्ट्रपति की भूमिका संवैधानिक प्रमुख की होती है। उनसे अपेक्षा रहती है कि वे राजनीतिक विवादों से दूर रहें। इसीलिए अल्वी की बढ़ती सक्रियता से देश की संवैधानिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ने का अंदेश जताया जा रहा है। अल्वी ने अपने पत्र में इस तरफ ध्यान खींचा कि 2022 के विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 157वें नंबर पर आया। उन्होंने इस तरफ भी ध्यान खींचा है कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पत्रकारों के बढ़ते उत्पीड़न और उनके खिलाफ होने वाली हिंसा को प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान के निम्न दर्जे का कारण बताया है।

न्यायपालिका की अवहेलना कर रही सरकार

पाकिस्तान में हाल ही में अजीज मेमन और नाज़िम जखियो नाम के दो पत्रकारों की हत्या कर दी गई। मुतिउल्लाह जान नाम के एक पत्रकार का दिन दहाड़े इस्लामाबाद से अपहरण कर लिया गया। उधर असद अली तूर और अबसार आलम नाम के पत्रकारों पर अनजान लोगों ने हमले किए, जिनमें वे दोनों घायल हो गए। राष्ट्रपति अल्वी ने अपने पत्र में इन घटनाओं का उल्लेख किया है। उन्होंने इसका भी जिक्र किया है कि हाल के महीनों में कई पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं।



अल्वी ने आरोप लगाया है कि पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करके न्यायपालिका की अवहेलना की जा रही है। ऐसी घटनाएं हुई हैं, जब किसी पत्रकार को एक मामले में कोर्ट से राहत मिली, तो उस पर दूसरा मामला दर्ज कर दिया गया। पर्यवेक्षकों की राय है कि राष्ट्रपति इस पत्र से सरकार के लिए असमंजस खड़ी हुई है। वह खुल कर राष्ट्रपति की आलोचना नहीं कर सकती, जबकि राष्ट्रपति ने वह कहा है, जिससे विपक्षी पीटीआई के आरोपों को बल मिला है।

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