Pakistan: पाकिस्तान की ऐसी बदहाली कि पीएम ने दो टूक कहा- ‘हम भीख मांग कर जिंदा हैं’!
Pakistan: शरीफ ने अपने भाषण में कहा, पाकिस्तान के भीख मांगने का सिलसिला चलता रहा है, जिसे हमेशा के लिए अब रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा- ‘हमें जिंदा रहना है, लेकिन उस तरह जीवित रहना है, जैसे राष्ट्र जिंदा रहते हैं, भीख मांगते हुए नहीं...
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दो-टूक बयानी की है। उन्होंने स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की आज की हालत भिखारी जैसी है। उन्होंने यह भी माना है कि आज की हालत के रहते पाकिस्तान अपने कश्मीर एजेंडे को पूरा करने में सक्षम नहीं है। विश्लेषकों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान को ऋण देने के मामले में जैसा सख्त नजरिया अपना रखा है, उससे प्रधानमंत्री शरीफ और उनकी सरकार का आत्म-विश्वास डोल गया है। इससे यह भी सवाल भी उठा है कि क्या पाकिस्तान की एक संप्रभु राष्ट्र की हैसियत बनी हुई है?
शहबाज शरीफ ने रविवार को जानकारी दी कि आईएमएफ पाकिस्तान की हर किताब (वित्तीय दस्तावेज) और सब्सिडी की जांच कर रहा है। आईएमएफ की एक टीम इन दिनों पाकिस्तान में है। वह यहां सात बिलियन डॉलर का नया कर्ज जारी करने के लिए हुए करार के सिलसिले में समीक्षा बैठक के लिए आई है। पिछले हफ्ते शुरू हुई यह चर्चा इस हफ्ते भी जारी रहेगी। इस बीच पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार खाली हो रहा है, जिससे उसके डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) होने की आशंका गहराती जा रही है। देश में बने मायूसी के माहौल के बीच पाकिस्तान के राजनीतिक दलों ने रविवार को 'कश्मीर दिवस' पर कश्मीर मसला उछालने की फिर कोशिश की। प्रधानमंत्री शरीफ भी इस मौके पर कश्मीर के पाकिस्तानी कब्जे वाले हिस्से की विधानसभा को संबोधित करने गए। लेकिन वहां दिए उनके भाषण पर देश की आर्थिक मुसीबत छायी रही। उन्होंने कहा कि आईएमएफ टीम के साथ बातचीत अब आर या पार की स्थिति में पहुंच गई है।
इस बीच पाकिस्तान सरकार देश में लिक्वीफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कीमत में 30 फीसदी इजाफा कर चुकी है। बिजली शुल्क को पहले ही बढ़ाया जा चुका है। वित्त मंत्री इशहाक डार ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पिछले हफ्ते आईएमएफ की टीम से बातचीत में पाकिस्तानी अधिकारियों को ‘बहुत मुश्किल पलों’ का सामना करना पड़ा। शरीफ ने अपने भाषण में कहा कि आईएमएफ की टीम विभिन्न मंत्रालयों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। इस दौरान ‘हर बात’ और ‘हर सब्सिडी’ की समीक्षा की जा रही है। इस सिलसिले में उन्होंने खास कर पेट्रोलियम, वित्त, वाणिज्य और बिजली मंत्रालयों का जिक्र किया, जिनके दस्तावेजों की पड़ताल आईएमएफ टीम कर रही है। इसी दौरान उन्होंने ‘भीख मांगने’ का जिक्र किया। कहा- पाकिस्तान के भीख मांगने का सिलसिला चलता रहा है, जिसे हमेशा के लिए अब रोकने की जरूरत है। उन्होंने कहा- ‘हमें जिंदा रहना है, लेकिन उस तरह जीवित रहना है, जैसे राष्ट्र जिंदा रहते हैं, भीख मांगते हुए नहीं। यह सिलसिला 75 साल से चल रहा है। अब हमें इसे रोकना होगा।’
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए शरीफ ने स्वीकार किया कि मौजूदा बदहाली के बीच पाकिस्तान अपने कश्मीर एजेंडे को आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा- “एक आर्थिक ताकत बनने के बाद ही हम कश्मीरियों की मदद कर पाएंगे।” पर्यवेक्षकों के मुताबिक शरीफ की यह साफगोई असल में पाकिस्तान की कमजोर हो चुकी हालत और देश में फैले निराशा के आलम की झलक है।