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Hindi News ›   World ›   Pakistan: Pakistan Army Chief General Qamar Javed Bajwa sought help from Wendy Sharman

Pakistan: आखिर क्या बताती है कि पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा की ये पहल?

Sat, 30 Jul 2022 06:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 30 Jul 2022 06:04 PM IST
सार

Pakistan: देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान को कर्ज की नई किस्तें देने को तैयार नहीं है। इसके बीच जनरल बाजवा ने यह संदेश भेजने की कोशिश की है कि राजनीतिक अनिश्चय के बीच आर्थिक नीतियों में स्थिरता की गारंटी पाकिस्तान की सेना करेगी...

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Pakistan: Pakistan Army Chief General Qamar Javed Bajwa sought help from Wendy Sharman
Pakistan: पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल बाजवा। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

कर्ज के बढ़ते बोझ और डिफॉल्टर (कर्ज चुकाने में अक्षम) होने के बढ़ते खतरे के बीच पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने कमान अपने हाथ में ली है। उन्होंने सीधे अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शरमान से मदद मांगी है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक यह एक असाधारण पहल है।

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समझा जाता है कि देश में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान को कर्ज की नई किस्तें देने को तैयार नहीं है। इसके बीच जनरल बाजवा ने यह संदेश भेजने की कोशिश की है कि राजनीतिक अनिश्चय के बीच आर्थिक नीतियों में स्थिरता की गारंटी पाकिस्तान की सेना करेगी। जानकारों के मुताबिक इससे इस धारणा की पुष्टि हुई है कि पाकिस्तान में सत्ता की असल बागडोर सेना के हाथ में रहती है।

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जनरल बाजवा शरमन से फोन पर हुई बातचीत के दौरान गुजारिश की कि अमेरिकी सरकार आईएमएफ से 1.2 बिलियन डॉलर का कर्ज जारी करने को कहे। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम ने इस खबर पर अपनी टिप्पणी में कहा है- ‘हालांकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अनुभवी प्रशासक हैं, लेकिन इस्लामाबाद के बाहर उनकी ज्यादा साख या राजनीतिक वजन नहीं है। वे लगातार अपने प्रतिद्वंद्वी इमरान खान के दबाव में हैं। इसलिए राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय है कि देश में असली सत्ता 61 वर्षीय जनरल बाजवा के हाथ में ही है।’

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इस बीच शरीफ सरकार ने देश की संसद में बताया है कि पाकिस्तान पर विदेशी कर्ज बढ़ कर 126 बिलियन डॉलर हो गया है। इनमें 85.64 बिलियन डॉलर का कर्ज पाकिस्तान सरकार पर है। सरकार की तरफ से बताया गया कि 2022 से 2059 के बीच पाकिस्तान को सिर्फ ब्याज और मूल धन के रूप में 95.4 बिलियन डॉलर की रकम चुकानी होगी।

 

 

आईएमफ बीते 13 जुलाई को पाकिस्तान को छह बिलियन डॉलर का कर्ज देने पर सहमत हो गया था। लेकिन तभी यह बताया गया था कि कर्ज की ये रकम तभी जारी होगी, जब आईएमएफ का कार्यकारी बोर्ड उस पर अपनी मुहर लगा देगा। फिलहाल आईएमएफ में अवकाश का समय है। इसलिए कार्यकारी बोर्ड की बैठक अगस्त के आखिर में ही जाकर हो पाएगी। इस बीच ये खबर भी आई कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरकार गठन के सिलसिले में पैदा हुई नई राजनीतिक अस्थिरता से आईएमएफ चिंतित है। अस्थिरता बढ़ने की स्थिति में वह कर्ज की रकम जारी करने में हिचक सकता है।  
 

 

आईएमएफ में अमेरिका सबसे बड़ा शेयरधारक है। इसलिए उसकी बात वहां सबसे ज्यादा वजन रखती है। विश्लेषकों के मुताबिक इसीलिए जनरल बाजवा ने अमेरिका के सामने गुहार लगाई है। इस महीने अमेरिका और पाकिस्तान के वरिष्ठ असैनिक अधिकारियों के बीच कई बैठकें हुईं। लेकिन उस दौरान आईएमएफ से कर्ज दिलवाने का कोई वादा अमेरिका ने नहीं किया। विश्लेषकों के मुताबिक इसी कारण अब जनरल बाजवा ने पहल की है। समझा जाता है कि उनकी बात को अमेरिका असैनिक अधिकारियों से ज्यादा महत्त्व देगा।


अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने वेबसाइट निक्कईएशिया से कहा- ‘ये पहल बताती है कि पाकिस्तान की सेना अर्थव्यवस्था की हालत से चिंतित है। इससे यह भी जाहिर होता है कि वैश्विक कर्ता-धर्ता यही मानते हैं कि पाकिस्तान में असल सत्ता सेनाध्यक्ष के हाथ में ही है।’

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