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PoJK: बंदूक की नोक पर भी नहीं रुका प्रदर्शन, पांचवें दिन भी सड़कों पर सैलाब; लोग बोले- सरकार राक्षस बन चुकी है

Thu, 02 Oct 2025 04:23 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फराबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फराबाद Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 02 Oct 2025 04:23 PM IST
सार

पाकिस्तान कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी हैं। हजारों लोग रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ रहे हैं। विरोध जेकेजेएएसी के 38 सूत्रीय मांग पत्र को लेकर है जिसमें आर्थिक राहत और राजनीतिक सुधार शामिल हैं। अब तक आधा दर्जन से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।

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Pakistan-occupied Jammu Kashmir PoJK Protests entered fifth day crowds marching from Rawalakot to Muzaffarabad
पीओजेके में प्रदर्शन - फोटो : ANI

विस्तार

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में विरोध प्रदर्शन लगातार पांचवें दिन गुरुवार को भी जारी रहा। रावलकोट से हजारों की संख्या में लोग राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर कूच कर रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए हैं जिनमें विरोध की लहर साफ दिखाई दे रही है।
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नेलम वैली पब्लिक एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज़ मीर ने वायरल वीडियो में पाकिस्तानी हुकूमत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "यह सरकार राक्षस बन चुकी है, जो अपने ही लोगों का खून पी रही है। मीडिया को बंद कर रही है, बल प्रयोग कर रही है और हमारे हक की आवाज दबा रही है। उनके बयान उस समय सामने आए जब मुजफ्फराबाद में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की।
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जनाक्रोश और हिंसा
इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। पिछले तीन दिनों में हुई हिंसा में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन अब यह कई जिलों में फैल चुके हैं। दुकानों, बाजारों और यातायात सेवाओं के ठप होने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है।
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जे के 38 सूत्रीय चार्टर ऑफ डिमांड पेश किया था, जिसे न मानने पर यह विरोध शुरू हुआ। इसमें 12 आरक्षित सीटों को खत्म करने का मुद्दा, बिजली दरों में कटौती, सब्सिडी वाला आटा, सरकारी अफसरों की सुविधाएं खत्म करना, मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है और यही गुस्से का कारण बना।

ये भी पढ़ें- 'लोकतंत्र पर हमला भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा', कोलंबिया से मोदी सरकार पर राहुल गांधी का निशाना

प्रशासन की सख्ती
जैसे-जैसे आंदोलन तेज हुआ, सरकार ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट बंद कर दिया। इसके बावजूद कई जिलों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिड़ंत की खबरें आईं। कई जगहों पर लोग अवरोधकों को तोड़कर मुजफ्फराबाद में दाखिल हुए। मीरपुर के दुदयाल इलाके में प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की कि जब तक प्रशासन उनकी मांगें नहीं मानता, एक मृतक प्रदर्शनकारी का शव दफनाया नहीं जाएगा। दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने पुलों को खाली कराया ताकि काफिले राजधानी तक न पहुंच सकें।

लगातार बढ़ते विरोध और हिंसा ने पीओजेके में जनजीवन को पंगु कर दिया है। जगह-जगह कारोबार बंद है, परिवहन ठप है और माहौल बेहद तनावपूर्ण है। जनता का गुस्सा इस बात पर है कि सरकार उनकी आवाज दबा रही है और हालात को संभालने की बजाय बल प्रयोग कर रही है।नेलम वैली पब्लिक एक्शन कमेटी के नेता शौकत नवाज मीर ने वायरल वीडियो में पाकिस्तानी हुकूमत पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "यह सरकार राक्षस बन चुकी है, जो अपने ही लोगों का खून पी रही है। मीडिया को बंद कर रही है, बल प्रयोग कर रही है और हमारे हक की आवाज दबा रही है।" उनके बयान उस समय सामने आए जब मुजफ्फराबाद में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की।

जनाक्रोश और हिंसा
इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। पिछले तीन दिनों में हुई हिंसा में आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन अब यह कई जिलों में फैल चुके हैं। दुकानों, बाजारों और यातायात सेवाओं के ठप होने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है।

ये भी पढ़ें- 'कट्टरपंथ को बढ़ावा दे रहा पाकिस्तान', यूरोपीय सांसदों ने की जीएसपी प्लस दर्जा खत्म करने की मांग

बता दें, सरकार के सामने जेके 38 सूत्रीय चार्टर ऑफ डिमांड पेश किया था, जिसे न मानने पर यह विरोध शुरू हुआ। इसमें 12 आरक्षित सीटों को खत्म करने का मुद्दा, बिजली दरों में कटौती, सब्सिडी वाला आटा, सरकारी अफसरों की सुविधाएं खत्म करना, मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है और यही गुस्से का कारण बना।


प्रशासन की सख्ती
जैसे-जैसे आंदोलन तेज हुआ, सरकार ने पूरे क्षेत्र में इंटरनेट बंद कर दिया। इसके बावजूद कई जिलों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिड़ंत की खबरें आईं। कई जगहों पर लोग अवरोधकों को तोड़कर मुजफ्फराबाद में दाखिल हुए। मीरपुर के दुदयाल इलाके में प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की कि जब तक प्रशासन उनकी मांगें नहीं मानता, एक मृतक प्रदर्शनकारी का शव दफनाया नहीं जाएगा। दूसरी ओर सुरक्षा बलों ने पुलों को खाली कराया ताकि काफिले राजधानी तक न पहुंच सकें।

लगातार बढ़ते विरोध और हिंसा ने पीओजेके में जनजीवन को पंगु कर दिया है। जगह-जगह कारोबार बंद है, परिवहन ठप है और माहौल बेहद तनावपूर्ण है। जनता का गुस्सा इस बात पर है कि सरकार उनकी आवाज दबा रही है और हालात को संभालने की बजाय बल प्रयोग कर रही है।

पीओजेके में बिगड़ती कानून-व्यवस्था
पाकिस्तान-शासित जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी हिंसक प्रदर्शन और बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गहरी चिंता व्यक्त की और उच्च-स्तरीय जांच का आदेश दिया। शरीफ के निर्देश पर एक उच्च-स्तरीय संघीय प्रतिनिधिमंडल मुजफ्फराबाद रवाना हुआ, ताकि प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत कर तनाव को कम किया जा सके। यह कदम जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी (जेकेजेएएसी) के तीन दिन के हड़ताल और असंतोष के बाद आया, जिसके तहत प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर सरकारी वार्ता विफल रही। प्रधानमंत्री शरीफ ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ प्रदर्शनकारियों से संयम और शांति बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।



 
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