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पाकिस्तान के बदनाम परमाणु वैज्ञानिक कादिर ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
Wed, 25 Dec 2019 05:17 AM IST
आसिम खान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: आसिम खान
Updated Wed, 25 Dec 2019 05:17 AM IST
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पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट
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मौलिक अधिकारों को लेकर पाकिस्तान के बदनाम परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर खान ने लाहौर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में उन्होंने अपने मौलिक अधिकारों को अमल में लाने का अनुरोध किया है। कादिर को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का जनक माना जाता है। आरोप है कि उन्होंने परमाणु तकनीकी दूसरे देशों को बेची थी।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कादिर ने देशभर में स्वतंत्र रूप से आने जाने समेत तमाम अन्य मौलिक अधिकारों को लागू करने की गुहार लगाई है। कादिर की ओर से अधिवक्ता जुबैर अफजल राना ने यह याचिका दाखिल की है। 25 सितंबर को लाहौर हाईकोर्ट ने कादिर की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उनकी सुरक्षा को लेकर उठाए गए विशेष सुरक्षा कदमों के मद्देनजर वह (कोर्ट) इसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
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कादिर ने शीर्ष अदालत से यह आग्रह किया है कि आवाजाही की स्वतंत्रता समेत तमाम अन्य मौलिक अधिकारों को महज किसी को पसंद या नापसंद करने और उचित प्रतिबंधों की आड़ लेकर घटाया या उन्हें देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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पाकिस्तान को बनाया परमाणु संपन्न
84 वर्षीय कादिर ने कहा कि वह पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक हैं और शीर्ष में बैठे लोगों के प्रयासों के चलते देश को परमाणु शक्ति बनाने में सफल हुए थे। उन्होंने कहा, ‘जब से मैं पाकिस्तान आया और परमाणु परियोजना पर काम करना शुरू किया तब से मुझे सुरक्षा अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना कहीं भी जाने, देश के भीतर किसी सामाजिक या अकादमिक कार्यक्रम में शामिल होने की इजाजत नहीं दी जाती है। मुझे 2004 से नजरबंद रखा गया है।’