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पाकिस्तान की खबरें: सांसद की गिरफ्तारी से पहले स्पीकर की मंजूरी जरूरी, कोर्ट से जरदारी को राहत
Thu, 20 Oct 2022 10:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 20 Oct 2022 10:08 PM IST
सार
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा नियोजित सरकार विरोधी प्रदर्शन के खिलाफ निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया था।
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शाहबाज शरीफ
- फोटो : Twitter
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विस्तार
पाकिस्तान की संसद ने गुरुवार को नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत किसी भी सांसद की गिरफ्तारी से पहले स्पीकर की मंजूरी को अनिवार्य कर दिया गया है। संसद के निचले सदन नेशनल एसेम्बली ने नियमों एवं कामकाज की नियमावली, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी।
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नए प्रस्ताव में किसी भी सांसद की आपराधिक मामले में गिरफ्तारी से पहले स्पीकर की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। स्पीकर को सूचित करना होगा कि सांसद पर क्या आरोप हैं और उन्हें क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है। नियम 106 में संशोधन के बाद प्रस्ताव रखा गया है कि किसी भी सदस्य को संसद/विधानसभा भवन परिसर से गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
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इस बीच इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ दो दशक से अधिक समय पहले दर्ज भ्रष्टाचार के कुछ मामलों में उन्हें बरी करने के खिलाफ मुल्क की शीर्ष भ्रष्टाचार रोधी संस्था की अपीलों को खारिज कर दिया। राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने 1990 के दशक में जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के ये मामले दर्ज किए थे।
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पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता को बाद में 2014 और 2015 में बरी कर दिया गया। हालांकि, एनएबी ने इस फैसले को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। एनएबी ने कोई सबूत पेश करने में नाकाम होने के बाद बुधवार को एक अर्जी दायर कर कहा कि वह इन मामलों को आगे बढ़ाना नहीं चाहता है क्योंकि उपलब्ध साक्ष्य फोटोकॉपी पर आधारित हैं।
इमरान खान के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा नियोजित सरकार विरोधी प्रदर्शन के खिलाफ निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया था। बहरहाल, कोर्ट ने सरकार को कानून एवं व्यवस्था पर नियंत्रण करने के लिए खुली छूट दी। कोर्ट ने आगाह किया कि अगर किसी भी पक्ष ने अदालत के आदेशों का उल्लंघन किया तो वह हस्तक्षेप करेगा।
हिंदू लड़की को सुरक्षित घर में भेजा
वहीं, पाकिस्तान के हैदराबाद शहर में दो महीने पहले जिस हिंदू लड़की का कथित रूप से दिनदहाड़े अपहरण कर जबरन इस्लाम में धर्मांतरण कराया गया था और एक मुस्लिम व्यक्ति से जिसकी शादी कराई गई थी, उसे एक अदालत ने एक सुरक्षित घर में भेज दिया। कोर्ट ने पहले लड़की को उसके माता-पिता के साथ जाने की अनुमति नहीं दी थी और उसके पति के वकील द्वारा पेश किए गए विवाह प्रमाण पत्र को स्वीकार कर लिया था, लेकिन अदालत के फैसले के बाद लड़की के रोने और अपनी मां से लिपटे होने के वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद न्यायाधीश ने आदेश दिया कि उसे सुरक्षित घर में भेज दिया जाए और वह अपने माता-पिता से मिल सकती है।