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पाकिस्तान: चीन को पाक द्वीपों की भूमि बेचने की आशंका पर विपक्ष का विरोध
Thu, 15 Oct 2020 01:09 AM IST
Kuldeep Singh
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 15 Oct 2020 01:09 AM IST
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Imran Khan
- फोटो : पीटीआई
सिंध प्रांत की सरकार के अधीन दो द्वीपों को पाकिस्तान सरकार द्वारा अपने नियंत्रण में लेने के बाद से इमरान शासन विपक्ष के निशाने पर आ गया है। राजनीतिज्ञों ने रणनीतिक रूप से अहम इन द्वीपों को सीपीईसी के एक हिस्से के रूप में चीन को सौंपने की योजना बनाने का इमरान प्रशासन पर आरोप लगाया है। विपक्ष ने कहा है कि वह सरकार को यह जमीन चीन को बेचने की कतई अनुमति नहीं देगा।
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इमरान सरकार पर सीपीईसी के तहत बुंदल व भुड्डो द्वीपों की जमीन चीन को बेचने का आरोप
बता दें कि पिछले महीने ही राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने बुंदल और भुड्डो द्वीपों पर पुनर्विचार और शहरी नियोजन की सुविधा के मकसद से पाकिस्तान द्वीप विकास प्राधिकरण (पीआईडीए) अध्यादेश पर दस्तखत किए हैं। दोनों द्वीप सिंध के किनारे दक्षिण में स्थित हैं। इस अध्यादेश से सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।
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सिंध की सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने अध्यादेश को अवैध बताते हुए कहा है कि इन द्वीपों को चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के रूप में चीन को सौंपा जा सकता है। सिंध की आजादी की वकालत करने वाले जफर साहितो ने कहा कि हम चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को पाकिस्तान की जमीन बेचने की अनुमति इमरान सरकार को किसी कीमत पर नहीं देंगे।
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सीपीईसी पर नागरिक विरोध जारी
पाकिस्तान में सेना व सरकार समर्थित सीपीईसी परियोजना को पाक कब्जे वाले कश्मीर और बलूचिस्तान में आम नागरिकों के भारी विरोध का सामना पहले से करना पड़ रहा है। इन इलाकों में बीजिंग पर उनकी जमीन के अतिक्रमण का आरोप लगा है। इन क्षेत्रों में पाकिस्तान सरकार पर लोगों के हितों की अनदेखी करने और शून्य सहिष्णुता दिखाने को लेकर जबरदस्त आंदोलन चल रहे हैं।
विरोधियों पर की सख्त कार्रवाई
इमरान सरकार लगातार इन द्वीपों पर विरोधी विचारधारा रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करती रही है। मई में सरकार ने सीपीईसी का विरोध करने वाले जेई सिंध कौमी महाज-अरिसर पर रोक लगा दी। इस बीच, देश में मछुआरों के सबसे बड़े संघ पाकिस्तान फिशरफोक फोरम (पीएफएफ) ने द्वीपों की सुरक्षा के लिए आंदोलन शुरू किया है। उसने कहा सरकार आठ लाख मछुआरों की जीविका खतरे में डाल रही है।