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प्रतिबंध सूची से नाम हटाने के लिए चीन के भरोसे पाकिस्तान, यूएनएससी को आतंक पर दी सफाई
Fri, 01 May 2020 05:33 PM IST
Rohit Ojha
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Rohit Ojha
Updated Fri, 01 May 2020 05:33 PM IST
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान
- फोटो : Social Media
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पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने दुनिया के शीर्ष सुरक्षा पैनल द्वारा स्वीकृत छह आतंकवादियों को सूची से हटाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से संपर्क किया है। यूएनएससी में अपने खराब ट्रैक रिकॉर्ड को बेहतर करने के लिए पाकिस्तान अब चीन के भरोसे है।
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अपनी जमीन पर आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान ने हाल ही में लगभग 4000 लोगों के नाम आतंकवादी निगरानी सूची से हटाने का फैसला किया है। पाकिस्तान ने यूएन की ओर से घोषित आतंकियों के नाम यूएनएससी में खुद को साफ दिखाने के लिए हटाए हैं।
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प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली यूएनएससी की टीम पांच दिन के लिए पाकिस्तान के दौर पर थी। पाक सरकार ने उन्हें बताया कि वह संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिए गए नामों में से कई आतंकियों की पहचान करने में असमर्थ है, क्योंकि उनकी जानकारी अधूरी है। अपनी घरेलू आतंकी निगरानी सूची से 3,800 नामों को हटाने के बारे में पूछे जाने पर पाकिस्तान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध सूची में जन्म तिथि, राष्ट्रीयता, राष्ट्रीय आईडी नंबर, पासपोर्ट संख्या या एक विशिष्ट पता नहीं है।
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दरअसल यूएनएससी ने पाकिस्तान में 130 आतंकियों की सूची जारी की थी। हालांकि, पाकिस्तान ने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद सहित उनमें से केवल 19 लोगों की उपस्थिति को स्वीकार किया है।
वह पहले ही यूएनएससी को छह आतंकवादियों को इस सूची से बाहर निकालने के लिए कह चुका है। जिनमें 2013 के संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार मतीउर रहमान का भी नाम शामिल है। जिसे आतंकवादी समूह लश्कर-ए-झांगवी का मुख्य संचालक कमांडर बताया गया है।
दिल्ली और न्यूयॉर्क के राजनयिकों ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि यूएनएससी में अपने ट्रैक रिकॉर्ड को सुधारने के लिए पाकिस्तान की कड़ी मेहनत इस विश्वास पर जमी है कि चीन अपने अनुरोधों को वापस लेगा।
मालूम हो कि बीजिंग ने जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी समूह के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए एक भारतीय नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय प्रयास को रोक दिया था। चीन को आखिरकार पिछले साल ये रोक हटानी पड़ी थी, जब जैश के आतंक के चलते पुलवामा में 40 भारतीय सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए थे।