फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan: 'Iftar Langar' has been running the outskirts of Lahore, know the whole story

Pakistan: लाहौर के बाहरी इलाके में दो दशकों से चल रहा 'इफ्तार लंगर', जानिए पूरा किस्सा

Mon, 22 Apr 2024 01:59 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Mon, 22 Apr 2024 01:59 PM IST
सार

सरदार जितेंद्र सिंह जो कि लाहौर में इफ्तार लंगर चलाते हैं। वे कहते हैं कि अक्सर लोग सिखों द्वारा की गई मुसलमानों की मदद पर आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

विज्ञापन

विस्तार

पाकिस्तान के लाहौर के एक सिख परिवार पिछले दो सालों से इफ्तार लंगर नाम की अनूठी परंपरा चला रहा है। इसमें रमजान में गरीब मुसलमानों को भोजन दिया जाता है। लाहौर सिटी सेंटर से आधे घंटे की दूरी पर स्थित बुर्की इलाके में मुसलमानों के लिए सिख परिवार ने इफ्तार लंगर की व्यवस्था की है।
विज्ञापन


सरदार जितेंद्र सिंह जो कि लाहौर में इफ्तार लंगर चलाते हैं। वे कहते हैं कि अक्सर लोग सिखों द्वारा की गई मुसलमानों की मदद पर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। बाबा गुरुनानक देव की सीख है। जिसमें उन्होंने अपनी आमदनी का 10 वां हिस्सा दान करने के लिए कहा था। गरीब मुसलमानों को रमजान के दौरान इफ्तार कराया जाता है। साथ ही ईद पर गरीब बच्चों को वे ईदी भी बांटते हैं।
विज्ञापन


कौन हैं जितेंद्र सिंह
38 वर्षीय जितेंद्र सिंह पेशे से फार्मासिस्ट हैं। वे बताते हैं कि उनकी पेशावर में फार्मेसी की दुकान थी। लेकिन पिछले साल लाहौर आने से पहले वे हकीम हुआ करते थे। लेकिन यहां आकर उन्होंने फिर से फार्मेसी की दुकान भी खोली और अभ्यास करना शुरू किया है। वे बताते हैं कि खैबर पख्तूनख्वा के मलकंद के बोनेर जिले में उनका जन्म हुआ था।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो दशक से चला रहे परंपरा
सरदार जितेंद्र सिंह जो कि मूलत: खैबर पख्तूनख्वा के निवासी हैं। वे बताते हैं कि लंगर की तर्ज पर मुसलमानों के लिए उन्होंने यह परंपरा शुरू की है। वे कहते हैं कि बाका गुरुनानक देव के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है, जिसमें सभी को समान रूप से भोजन परोसा जाता है। बाबा गुरुनानक देव के अनुसार हर सिख को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान करना चाहिए, इसलिए वे इस प्रकार की मदद करते रहते हैं।

छोड़ दिया था पैतृक गांव
पेशावर में आतंकवादी घटनाओं के बढ़ने के कारण सिख परिवार असुरक्षित महसूस कर रहे थे। पिछले कई हमलों में सिखों की जान भी चली गई थी। जितेंद्र बताते हैं कि इसके बाद उन्होंने अपना पुराना शहर छोड़ा था। 


इसके अलावा भी करते रहते हैं जरूरतमंदों की मदद
जितेंद्र सिंह बताते हैं कि उनके समाज के कई लोगों के योगदान से वे अक्सर मदद करते रहते हैं। मासिक सहायता राशि के अलावा व्हील चेयर, सिलाई मशीनें और मुफ्त राशन भी वे बांटते हैं। सिलाई मशीनों से विधवाओं को रोजगार में मदद मिल जाती है। ईद के दिन वे बच्चों को ईदी भी देने जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed