अफगानिस्तान पर ओआईसी की बैठक: अपनी प्रोफाइल बढ़ाने की कोशिश में है पाक?
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया है कि आईओसी की अगली बैठक से अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट को हल करने की दिशा में एक अहम पहल होगी। उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर ओआईसी की बैठक बुलाने पाकिस्तान की पहल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन हासिल है...
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पाकिस्तान ने अब अफगानिस्तान के हालात को लेकर दुनिया में अपनी प्रोफाइल बढ़ाने का दांव चला है। इसके लिए उसने मुस्लिम देशों के संगठन- ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (ओआईसी) की एक खास बैठक बुलाई है।
जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान का दांव कामयाब होगा या नहीं, यह कई पहलुओं से तय होगा। इसकी वजह यह है कि आज भी दुनिया में पाकिस्तान की छवि मोटे तौर पर आतंकवाद को पनाह देने वाले देश की बनी हुई है। इस बात की पुष्टि अमेरिका की आतंकवाद पर ताजा रिपोर्ट से भी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, और हक्कानी नेटवर्क जैसे भारत और अफगानिस्तान पर हमले करने वाले आतंकवादी गुट अभी भी पाकिस्तान धरती से अपनी गतिविधियां चला रहे हैं।
19 दिसंबर को होगी बैठक
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने दावा किया है कि आईओसी की अगली बैठक से अफगानिस्तान में जारी मानवीय संकट को हल करने की दिशा में एक अहम पहल होगी। उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर ओआईसी की बैठक बुलाने पाकिस्तान की पहल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन हासिल है। ये बैठक रविवार यानी 19 दिसंबर को होगी। कुरैशी ने इस बैठक के बारे में जानकारी देने के लिए शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने दावा किया कि इस बैठक से तालिबान और विश्व समुदाय के बीच मौजूद खाई को पाटने में मदद मिलेगी।
पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक में तालिबान ने भाग लेने की पुष्टि की कर दी है। उसका दल अफगानिस्तान के अंतरिम विदेश मंत्री के नेतृत्व में आएगा। तालिबान के अलावा अमेरिका, रूस, और चीन के प्रतिनिधि भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे। इन खबरों के मुताबिक पाकिस्तान ने इस बैठक में भाग लेने के लिए ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, और जापान के प्रतिनिधियों को भी बुलाया है। लेकिन गुरुवार तक इन देशों ने अपने नुमाइंदे भेजने की पुष्टि नहीं की थी।
पाकिस्तान का मकसद है कुछ और
कुरैशी के मुताबिक पाकिस्तान की इच्छा यह है कि इस बैठक में तालिबान अफगानिस्तान में मानव अधिकारों की स्थिति के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिताएं सीधे उनके प्रतिनिधियों से सुनें। इसीलिए उसने ओआईसी के मंच पर प्रमुख देशों के नुमाइंदों को भी आमंत्रित किया है। मगर पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस बैठक के आयोजन के जरिए खुद पाकिस्तान दुनिया को यह बताना चाहता है कि वह अफगानिस्तान में किसी खास गुट का समर्थन नहीं कर रहा है। बल्कि उसका मकसद वहां के लोगों के जीवन स्तर को सुधारना है। ऐसा संदेश देकर वह अपने बारे में दुनिया में बनी नकारात्मक राय को बदलना चाहता है।
प्रेस कांफ्रेंस में पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह सफाई देने की जरूरत महसूस की कि ओआईसी की खास बैठक के आयोजन के पीछे पाकिस्तान का मकसद बाकी दुनिया से तालिबान शासन को मान्यता दिलवाना नहीं है। वह सिर्फ इस बात पर जोर देना चाहता है कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट गहरा रहा है। इसका सामना करने के लिए वह बाहरी मदद पर निर्भर है। जबकि पश्चिमी देशों ने अफगानिस्तान के 9.5 अरब डॉलर की रकम फ्रीज कर रखी है। बैठक में ये बात पश्चिमी प्रतिनिधियों को समझाने की कोशिश की जाएगी कि ये रकम अफगानिस्तान को देना इस समय कितना जरूरी हो गया है।