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पाकिस्तान: इमरान सरकार की नजर आम लोगों के जमा सोने पर, आर्थिक संकट से उबरने की पहल

Mon, 21 Feb 2022 06:28 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 21 Feb 2022 06:28 PM IST
सार

इस योजना का सुझाव सबसे पहले विदेश में रहने वाले एक पाकिस्तानी ने इमरान खान को दिया था। तब प्रधानमंत्री ने उस सुझाव को ईईसी के पास भेज दिया। बताया जाता है कि ईईसी की बैठक में वित्त मंत्री शौकत तरीन ने इस योजना की पैरोकारी की। उन्होंने कहा कि इस योजना के लागू होने पर बेकार रखे हुए सोने को उत्पादक निवेश में बदला जा सकेगा...

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Pakistan government plans to borrow gold from their citizens for foreign exchange crisis
सऊदी प्रिंस से बतौर उपहार मिली सोने की एके-47 को निहारते इमरान खान - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

गहरे आर्थिक संकट में फंसी पाकिस्तान सरकार की निगाह आम लोगों के पास मौजूद सोने पर है। इमरान खान सरकार लोगों से सोने के बिस्किट और छड़ों को उधार पर लेने की एक योजना पर विचार कर रही है। उसका मकसद तेजी से खाली हो रहे विदेश मुद्रा भंडार को संभालना है। पिछले तीन महीनों में पाकिस्तान ने पांच अरब डॉलर के विदेशी कर्ज लिए हैं। लेकिन उनसे हालात सुधर नहीं सके हैं।

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अब लोगों के पास मौजूद स्वर्ण को जुटाने की योजना तैयार की गई है। इस पर आर्थिक कार्यकारी परिषद (ईईसी) में विचार हुआ है। ईईसी एक ऐसी संस्था है, जिसमें आर्थिक मामलों से संबंधित सभी मंत्री और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर शामिल हैं। इस योजना के बारे में सरकार ने अभी कोई एलान नहीं किया है। लेकिन ईईसी में हुई चर्चा के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से छापी है।

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उचित ब्याज के साथ जारी करेंगे प्रमाणपत्र

इस प्रस्ताव के मताबिक कॉमर्शियल बैंक लोगों का सोना लेकर उन्हें उस बारे में प्रमाणपत्र जारी करेंगे। सोने के मालिक को उचित दर से ब्याज दिया जाएगा। कॉमर्शियल बैंक इस तरह से जुटाए गए सोने को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के पास जमा करा देंगे। एसबीपी जमा हुए सोने का मौद्रिकरण (मोनेटाइज) कर विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने की कोशिश करेगा। सूत्रों ने कहा है कि ये तरीका अपनाने से पाकिस्तान और अधिक विदेशी कर्ज लेने से बच सकेगा।

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एसबीपी की दिसंबर में जारी रिपोर्ट के मुताबिक उसके पास 3.8 बिलियन डॉलर मूल्य का सोना पहले से है। लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार को संभालने के लिहाज से यह काफी नहीं है। बीते 17 फरवरी को विदेशी मुद्रा भंडार में 17 बिलियन डॉलर ही बचे थे। स्टेट बैंक के आंकड़ों के मुताबिक बीते तीन महीनों के अंदर पाकिस्तान ने सऊदी अरब से तीन बिलियन डॉलर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से एक बिलियन डॉलर का कर्ज लिया। सऊदी कर्ज बहुत महंगी दर पर मिला है। इसके लिए पाकिस्तान ने अपने एक सड़क मार्ग को उसके पास गिरवी रखा है।

जौहरी भी आ सकते हैं टैक्स के दायरे में

विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यात की दर कम और आयात की ज्यादा रहने के कारण अब तक लिए गए कर्ज से विदेशी मुद्रा भंडार का संकट दूर नहीं हुआ है। इसलिए अब लोगों का सोना लेने की योजना बनाई गई है। बताया जाता है कि इस योजना का सुझाव सबसे पहले विदेश में रहने वाले एक पाकिस्तानी ने इमरान खान को दिया था। तब प्रधानमंत्री ने उस सुझाव को ईईसी के पास भेज दिया। बताया जाता है कि ईईसी की बैठक में वित्त मंत्री शौकत तरीन ने इस योजना की पैरोकारी की। उन्होंने कहा कि इस योजना के लागू होने पर बेकार रखे हुए सोने को उत्पादक निवेश में बदला जा सकेगा। ईईसी की बैठक में लोगों को बैंकों के पास सोना रख कर कर्ज देने की योजना पर भी विचार हुआ।



पाकिस्तान सरकार अपने राजकोषीय संकट को दूर करने के लिए अधिक से अधिक जौहरियों को टैक्स के दायरे में लाने के उपायों पर भी विचार कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि पाकिस्तान में लगभग 36 हजार जौहरी हैं, जबकि उनमें से सिर्फ 50 ने बिक्री कर देने के मकसद से अपने को रजिस्टर्ड कराया हुआ है।

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