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Pakistan Energy Crisis: सियासी उठा-पटक के बीच गहराया ऊर्जा संकट, सड़कों पर उतरे लोग

Thu, 24 Nov 2022 04:59 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 24 Nov 2022 04:59 PM IST
सार

Pakistan Energy Crisis: गैस सप्लाई में कमी के विरोध में बलूचिस्तान में लोग सड़कों पर निकल आए हैं। बीते रविवार को क्वेटा- कराची हाईवे को मास्तुंग के पास प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया। इसके पहले बीते हफ्ते भी क्वेटा में कई जगहों पर इसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे...

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Pakistan Energy Crisis: People start protest in Balochistan against the reduction in gas supply
Pakistan Gas Supply- Balochistan - फोटो : Agency

विस्तार

जिस समय पाकिस्तान में सियासी हलकों और मीडिया का ध्यान नए सेनाध्यक्ष की नियुक्ति और इमरान खान के लॉन्ग मार्च के रावलपिंडी पहुंचने से जुड़ी खबरों पर टिका हुआ है, बढ़ती ठंड के बीच देश गहरे ऊर्जा संकट में डूबता जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट के कारण जरूरत के मुताबिक प्राकृतिक गैस का आयात नहीं हो पा रही है।

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गैस सप्लाई में कमी के विरोध में बलूचिस्तान में लोग सड़कों पर निकल आए हैं। बीते रविवार को क्वेटा- कराची हाईवे को मास्तुंग के पास प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया। इसके पहले बीते हफ्ते भी क्वेटा में कई जगहों पर इसी मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए थे। बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों से जन असंतोष की खबरें लगातार मिल रही हैं।

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विश्लेषकों के मुताबिक हालांकि इस समय कई अन्य देश भी ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की स्थिति अधिक गंभीर है। इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक पर्सपेक्टिव्स में रिसर्च एसोसिएट तैमूर फहद खान के मुताबिक गैस संकट पाकिस्तान के आवाम और अर्थव्यवस्था पर एक और बम धमाके की तरह महसूस हुआ है। उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘गैस की कमी से पाकिस्तान में ऊर्जा असुरक्षा बढ़ेगी, जिससे देश में और अधिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। देश पहले से ही आर्थिक अफरातफरी और राजनीतिक अस्थिरता का शिकार है।’

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गैस संकट के संकेत काफी समय से मिल रहे थे। इस महीने के आरंभ में अतिरिक्त पेट्रोलियम सचिव मोहम्मद महमूद ने एक संसदीय समिति के सामने कहा था कि घरेलू उपभोक्ताओं को हर रोज तीन घंटे सुबह में, दो घंटे दोपहर में और तीन घंटे रात में गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन देश के कई इलाकों में ऐसा नहीं हुआ है।

पाकिस्तान के ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी के मताबिक देश में गैस का सालाना घरेलू उपभोग 1.4 खरब क्यूबिक फीट है। इसमें हर साल पांच फीसदी की बढ़ोतरी हो रही है। जबकि देश के अंदर उत्पादन 732 क्यूबिक फीट का ही है। बाकी जरूरत को आयात के जरिए पूरा किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद बने वैश्विक हालात में पाकिस्तान के लिए महंगे एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का आयात बहुत मुश्किल हो गया है। तैमूर फहद खान ने कहा- ‘सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख गैस सप्लायर अब यूरोप को अधिक गैस दे रहे हैं। इस कारण पाकिस्तान जैसे देश को कमी का सामना करना पड़ रहा है।’

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के सलाहकार अरशद एच अब्बासी के मुताबिक पाकिस्तान की एक बड़ी समस्या यहां लीकेज के कारण होने वाली गैस की बर्बादी है। पाकिस्तान में लीकेज का अनुपात 18 फीसदी है, जबकि कनाडा, जर्मनी, न्यूजीलैंड जैसे देशों में यह महज 2.5 फीसदी है। अब्बासी ने कहा कि लीकेज के कारण पाकिस्तान को हर साल चार बिलियन डॉलर का नुकसान सहना पड़ता है।

अब्बासी और अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान के सामने एक ही रास्ता है कि वह देश के अंदर गैस के भंडार की खोज में ध्यान लगाए। लेकिन देश लगातार राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। इसके बीच ऐसी दूरगामी योजना बनाने में राजनीतिक नेतृत्व बिल्कुल नाकाबिल साबित हुआ है।

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