फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan economic crisis: ratio of government debt to GDP increased rapidly, being considered a sign of danger for the country

Pakistan: श्रीलंका जैसे हालात बनने का गहराता जा रहा है अंदेशा, राजनीतिक अस्थिरता बड़ी वजह

Wed, 08 Jun 2022 06:29 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 08 Jun 2022 06:29 PM IST
सार

अर्थव्यवस्था, आर्थिक नीतियों, और वित्तीय बाजार संबंधी अनुसंधान करने वाली लंदन स्थित संस्था कॉन्टिनम इकोनॉमिक्स में रिसर्च डायरेक्टर माइक गैलाघर ने कहा है- ‘श्रीलंका की तरह ही पाकिस्तान भी जीडीपी की तुलना में विदेशी कर्ज के ऊंचे स्तर और चालू खाता घाटे के कारण दबाव में है। उनके सामने ये संकट संभवतया सबसे खराब समय पर आया है...

विज्ञापन
Pakistan economic crisis: ratio of government debt to GDP increased rapidly, being considered a sign of danger for the country
पाकिस्तान पेट्रोल पंप - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

पाकिस्तान में सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में सरकारी कर्ज का अनुपात हाल में तेजी से बढ़ा है। इसे देश के लिए खतरे का संकेत समझा जा रहा है। विशेषज्ञों ने कहा है कि अमेरिका ब्याज दर बढ़ने के कारण डॉलर में लिए गए कर्ज का बोझ तमाम देशों पर बढ़ रहा है। इस कारण इन देशों को कर्ज चुकाने के लिए अपने पास मौजूद पूंजी का अतिरिक्त हिस्सा खर्च करना पड़ रहा है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस नए बोझ को सह पाने की स्थिति में नहीं है।

विज्ञापन


अर्थव्यवस्था, आर्थिक नीतियों, और वित्तीय बाजार संबंधी अनुसंधान करने वाली लंदन स्थित संस्था कॉन्टिनम इकोनॉमिक्स में रिसर्च डायरेक्टर माइक गैलाघर ने कहा है- ‘श्रीलंका की तरह ही पाकिस्तान भी जीडीपी की तुलना में विदेशी कर्ज के ऊंचे स्तर और चालू खाता घाटे के कारण दबाव में है। उनके सामने ये संकट संभवतया सबसे खराब समय पर आया है। इस वक्त अमेरिका का सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा रहा है। अब वह ब्याज दर को ढाई से बढ़ा कर तीन फीसदी करने की तैयारी में है।’

विज्ञापन

इमरान मढ़ रहे शहबाज पर दोष

पाकिस्तान में एक और चिंता यह है कि आर्थिक संकट ने उस समय गंभीर रूप ले लिया है, जब देश राजनीतिक अस्थिरता का भी सामना कर रहा है। कुछ विश्लेषकों की राय है कि पाकिस्तान के वर्तमान आर्थिक संकट का काफी दोष पूर्व इमरान खान सरकार पर है, लेकिन अब खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) अब बढ़ती मुसीबतों को सियासी मुद्दा कर वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार को घेर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट में पाकिस्तान संबंधी यूनिट के सह-संस्थापक आसिम एजाज ख्वाजा ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा- ‘वर्तमान आर्थिक स्थिति के लिए मौजूदा सरकार को दोषी ठहरा देना आसान रास्ता है। लेकिन हकीकत यह है कि ये संकट दशकों से अपनाई गई नीतियों और लिए गए फैसलों का नतीजा है। समस्या इसलिए खड़ी हुई है कि देश में दीर्घकालिक योजना कभी नहीं बनाई गई और कभी उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया।’

शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट सरकार इस शुक्रवार को अगले वित्त वर्ष का बजट पेश करेगी। पाकिस्तान के इन्वेस्टमेंट एप वाई-पे फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य इन्वेस्टमेंट और रिसर्च अधिकारी उसमा आबिद के मुताबिक सरकार पर चुनावी बजट बनाने का दबाव है। आबिद ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा किया गया, तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार और घटेगा, जिससे अफरातफरी का माहौल बनेगा। पाकिस्तान में 2023 के अक्तूबर से पहले अगला आम चुनाव होना है।

ब्याज दरों में 150 आधार अंकों की बढ़ोतरी

पाकिस्तान में ब्याज दरें भी बढ़ाई जा रही हैं। मई में स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (सेंट्रल बैंक) ने मुद्रास्फीति पर काबू पाने की कोशिश में ब्याज दरों में 150 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी। अब देश में ब्याज दर 13.75 फीसदी हो गई हैं। ब्याज दर बढ़ने से कर्जदार कंपनियों की मुश्किलें बढ़ीं हैं। लेकिन महंगाई भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिसकी दर पिछले महीने 13.8 फीसदी तक पहुंच गई।



इन हालात को देखते हुए तमाम विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट में है, जिससे निकट भविष्य में इसके निकल पाने की संभावना नजर नहीं आ रही है। क्या इस संकट के कारण देश में श्रीलंका जैसी हालत पैदा होगी, ये सवाल लगातार चर्चा में बना हुआ है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed