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Pakistan: पाकिस्तान के CJI काजी फैज ईसा बोले, न्यायिक मामलों में कार्यपालिका का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

Fri, 29 Mar 2024 02:23 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 29 Mar 2024 02:23 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार शाम कहा कि कार्यपालिका की ओर से न्यायपालिका में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता है।

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Pakistan CJI Qazi Faiz Isa said executive interference in judicial matters will not tolerated
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा ने बृहस्पतिवार को कहा कि न्यायाधीशों के मामलों और न्यायिक कामकाज में कार्यपालिका का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान की सरकार ने हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के कामकाज में खुफिया एजेंसियों के हस्तक्षेप मामले में आरोपों की जांच की घोषणा की है। ये आरोप इस्लामाबाद हाईकोर्ट के छह न्यायाधीशों ने एक पत्र लिखकर लगाए हैं। इसे लेकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मुख्य न्यायाधीश ईसा के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक भी हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार शाम कहा कि कार्यपालिका की ओर से न्यायपालिका में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में न्यायपालिका की स्वतंत्रता से समझौता नहीं किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता एक मूलभूत स्तंभ है जो कानून के शासन और मजबूत लोकतंत्र को कायम रखती है।

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इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश को बर्खास्त करने के आदेश को अवैध घोषित कर दिया था। दरअसल, न्यायाधीश को देश की शक्तिशाली खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के खिलाफ भाषण देने के लिए पद से हटा दिया गया था।
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साल 2018 में बर्खास्त किया
रावलपिंडी बार एसोशिएसन में इस्लामाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश शौकत अजीज सिद्दीकी ने आईएसआई पर अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करने और पसंद की पीठें बनाने का आरोप लगाया था। इसी को लेकर उन्हें 11 अक्तूबर, 2018 में सर्वोच्च न्यायिक परिषद द्वारा बर्खास्त कर दिया गया था। 
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कई साल बीतने के बाद सुनवाई
पूर्व न्यायाधीश ने पद से हटाए जाने के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। कई साल बीत जाने के बाद इस मामले पर सुनवाई शुरू की गई। मुख्य न्यायाधीश काजी फैज ईसा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय पैनल और इसमें न्यायमूर्ति अमीनुद्दीन खान, न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखल, न्यायमूर्ति हसन अजहर रिजवी और न्यायमूर्ति इरफान शादत शामिल थे। 


23 जनवरी को रखा था फैसला सुरक्षित
पीठ ने 23 जनवरी को सुनवाई पूरी कर ली थी और आदेश को सुरक्षित रख लिया था, जो आज जारी किया गया। पीठ ने कहा कि सिद्दीकी को हटाया जाना गलत है। उन्हें इस्लामाबाद हाईकोर्ट का सेवानिवृत्त न्यायाधीश माना जाएगा और वह एक पूर्व न्यायाधीश की तरह सभी लाभों के हकदार होंगे।

 
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