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पाकिस्तान का सियासी संकट: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति के आदेश की समीक्षा करेंगे, जानें पूरा मामला

Sun, 03 Apr 2022 09:22 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 03 Apr 2022 09:22 PM IST
सार

पीठ ने अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान को डिप्टी स्पीकर के फैसले पर सोमवार को पक्ष रखने के लिए कहा है। सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी गई है। 

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Pakistan chief justice says all orders and actions initiated by PM, president subject to court order
इमरान पर आए संकट के कारण। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

नेशनल असेंबली भंग करने के राष्ट्रपति के फैसले, इमरान सरकार की सिफारिश और सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज करने के डिप्टी स्पीकर के फैसले की कानूनी वैधता सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय विशेष पीठ जांचेगी। इस पीठ की अध्यक्षता पाकिस्तान के चीफ जस्टिस उमर अता बंडियाल कर रहे हैं जबकि जस्टिस इजाजुल अहसान और जस्टिस मोहम्मद अली मजहर दो अन्य सदस्य हैं। 

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जस्टिस बंडियाल ने रविवार को हुए घटनाक्रम का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई करने का फैसला किया। चीफ जस्टिस ने डिप्टी स्पीकर के फैसले को खारिज करने के पीपीपी के अनुरोध को नहीं माना लेकिन कहा कि शीर्ष अदालत इस मामले में राजनीतिक दलों को नोटिस जारी कर डिप्टी स्पीकर के फैसले की समीक्षा करेगा। 
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इसके साथ ही कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, रक्षा सचिव, गृह सचिव, सभी राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया। उन्होंने सभी संस्थानों को निर्देश दिया कि अभी किसी तरह के गैर कानूनी कदम न उठाएं और वर्तमान स्थिति का फायदा उठाने का प्रयास न करें। पीठ ने अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान को डिप्टी स्पीकर के फैसले पर सोमवार को पक्ष रखने के लिए कहा है। सुनवाई सोमवार तक स्थगित कर दी गई है। 
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राष्ट्रपति को प्रतिवादी बनाया
चीफ जस्टिस ने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण मसला है इसलिए इसमें राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को भी प्रतिवादी बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा स्वत: संज्ञान सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष तथा सभी महत्वपूर्ण राजनीतिक दलों को प्रतिवादी बनाया गया है।

देश के गद्दार हैं इमरान खान : मरियम 
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में इमरान खान के झटके से भौंचक विपक्षी नेताओं ने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने की पूरी प्रक्रिया को संविधान के खिलाफ बताया और सदन से बाहर जाने से इनकार कर दिया। सदन में विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने कहा, हम डिप्टी स्पीकर के फैसले और नेशनल असेंबली भंग करने की प्रधानमंत्री की सलाह को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की नेता मरियम नवाज औरंगजेब ने कहा, इमरान खान गद्दार हैं। उन्होंने असांविधानिक कदम उठाया है और हम नेशनल असंबेली में विरोध कर रहे हैं। जबतक यह फैसला पलट नहीं जाता, कहीं नहीं जाने वाले।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा, इमरान खान ने जो किया वह कानून के खिलाफ है। हम अपने वकीलों से सलाह कर रहे हैं। इमरान खान पूरी तरह एक्सपोज हो गए हैं। ये फैसला जबतक पलट नहीं दिया जाता तबतक हम नेशनल असेंबली में मौजूद रहेंगे। हार को सामने देखकर वह भाग खड़े हुए हैं। बिलावल ने बाद में ट्वीट किया, हमारे वकील सुप्रीम कोर्ट के रास्ते में हैं। हम सभी संस्थाओं से आग्रह कर रहे हैं कि पाकिस्तान के संविधान की रक्षा के खड़े हों।

अविश्वास प्रस्ताव के पहले ‘प्रतिष्ठान’ ने दिए थे तीन विकल्प : इमरान
पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री इमरान खान ने रविवार को दावा किया कि असेंबली भंग करने की सिफारिश कर उन्होंने पाकिस्तान की तहरीक -ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की सरकार को गिराने की विदेशी साजिश को नाकाम कर दिया। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इमरान ने दावा किया उन्हें ‘प्रतिष्ठान’ (सेना) द्वारा अविश्वास प्रस्ताव से पहले तीन विकल्प दिए गए थे- इस्तीफा, जल्दी चुनाव कराना या अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना। द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य प्रतिष्ठान ने हालांकि खान के इस दावे का खंडन किया है और कहा कि यह सरकार थी, जिसने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करने के लिए एक बैठक के लिए शीर्ष अधिकारियों को फोन किया था। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और गुप्तचर एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के महानिदेशक ने बुधवार को सरकार के अनुरोध पर इमरान से मुलाकात की थी।

वकीलों ने भी फैसले को असांविधानिक बताया
पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट बार के अध्यक्ष अहसान भून ने कहा कि प्रधानमंत्री और डिप्टी स्पीकर के फैसले गैर कानूनी हैं और दोनों पर संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत गद्दारी का मामला चलाया जाना चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की जिसके कुछ देर बाद ही शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की आपात सुनवाई का फैसला लिया।

डिप्टी स्पीकर का फैसला है असल कानूनी कड़ी
देश के वरिष्ठ वकील सलमान अकरम राजा ने कहा कि डिप्टी स्पीकर द्वारा अपनाई गई पूरी प्रक्रिया और प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को दी गई सलाह पूरी तरह असांविधानिक है। उन्होंने कहा, मामले में सुप्रीम कोर्ट को फैसला लेना है। मूल मुद्दा डिप्टी स्पीकर की रूलिंग से जुड़ा है। यदि शीर्ष अदालत कहती है कि डिप्टी स्पीकर की रूलिंग कानून सम्मत है तब प्रधानमंत्री की सलाह भी कानून सम्मत मानी जाएगी। लेकिन यदि रूलिंग को कानून विरोधी माना गया तो इमरान की सिफारिश भी गैर कानूनी होगी क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहा प्रधानमंत्री सदन को भंग करने की सिफारिश नहीं कर सकता। 


विदेशी साजिश का कोण
कानून मंत्री फवाद चौधरी रविवार को सदन में बताया कि पाकिस्तान के एक राजदूत को 7 मार्च को दूसरे देश के अधिकारियों ने बातचीत में कहा था कि पाकिस्तान की सरकार अविश्वास प्रस्ताव के जरिये बदली जानी चाहिए। इसके एक दिन बाद ही पाकिस्तान के संयुक्त विपक्ष ने 8 मार्च को इमरान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की। यह पूरी तरह विदेशी साजिश है। 

मंत्रिमंडल भी भंग
देश के नाम इमरान के संबोधन के कुछ देर बाद ही सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय मंत्रिमंडल भी भंग कर दिया गया है लेकिन इमरान खान अपने पद पर बने रहेंगे। वहीं, सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री फारुख हबीब ने नेशनल असेंबली भंग किए जाने और नए चुनाव कराए जाने की घोषणा साझा की। पाकिस्तान के इतिहास में अबतक कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। 

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