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2008 में अमेरिका ने ही भारत के खिलाफ पाकिस्तान को दिए थे एफ-16 विमान, ये थीं डील की शर्तें

Wed, 06 Mar 2019 04:24 PM IST
Shilpa Thakur Shilpa Thakur
Updated Wed, 06 Mar 2019 04:24 PM IST
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Pakistan can use F-16 aircraft against India says US report
एफ 16 और पाकिस्तान

पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 27 फरवीर को एफ-16 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल किया था। इससे वाशिंगटन पर भी सवाल खड़े होने लगे। 2008 में अमेरिका ने ही पाकिस्तान को एफ 16 विमान दिए थे। ऐसा भारत के साथ शक्ति संतुलन साधने के लिए किया गया था। आज हालात ऐसे हैं कि अमेरिका ही पाकिस्तान का विरोधी हो गया है और काफी हद तक भारत के पक्ष में दिख रहा है। पाकिस्तान के बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के आतंकी शिविर पर सेना के एयर स्ट्राइक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप ने इशारों में ही कह दिया था कि भारत की तरफ से कुछ बड़ा होने वाला है। 


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पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 27 फरवीर को एफ-16 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल किया था। इससे वाशिंगटन पर भी सवाल खड़े होने लगे। 2008 में अमेरिका ने ही पाकिस्तान को एफ 16 विमान दिए थे। ऐसा भारत के साथ शक्ति संतुलन साधने के लिए किया गया था। आज हालात ऐसे हैं कि अमेरिका ही पाकिस्तान का विरोधी हो गया है और काफी हद तक भारत के पक्ष में दिख रहा है। पाकिस्तान के बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के आतंकी शिविर पर सेना के एयर स्ट्राइक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप ने इशारों में ही कह दिया था कि भारत की तरफ से कुछ बड़ा होने वाला है। 

हालांकि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ किए एफ-16 सौदे को न्यायसंगत ठहराते हुए इसके साथ दो शर्तें जोड़ दी थीं। पहली शर्त थी कि वह इस लड़ाकू विमान का इस्तेमाल आत्मरक्षा के लिए करेगा। और दूसरी शर्त थी कि वह इसका इस्तेमाल आतंक के खिलाफ करेगा। इसमें आत्मरक्षा से मतलब है कि अगर कभी भारत के साथ पाकिस्तान का कोई टकराव होता है तो वो आत्मरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल कर सकता है। 

पाकिस्तान में अमेरिका के तत्कालीन राजदूत एनी पैटरसन ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमान और अन्य साजो सामान को खरीदने के खातिर और आतंकवाद के विरुद्ध इसके इस्तेमाल को लेकर अमेरिका की ओर से वित्तीय सहायता की पेशकश करते हुए यही दलीलें रखी थीं।

इस सौदे के पैकेज में 500 एआईएम-120-सी5 अडवांस मिडियम रेंज की एयर टू एयर मिसाइल भी शामिल थी। ये वही मिसाइल हैं जिनके टुकड़े भारतीय वायु सेना ने जम्मू कश्मीर के राजौरी से बरामद किए थे और सबूत के तौर पर इन्हें दिखाया था।

24 अप्रैल, 2008 के सौदे को न्यायसंगत ठहराते हुए पैटरसन ने वाशिंगटन को लिखे पत्र में कहा था, "एफ-16 प्रोग्राम में बढ़ोतरी से भविष्य में पाकिस्तान का अगर भारत के साथ कोई टकराव होता है तो वो परमाणु के बजाय अन्य तरीके से इसका जवाब अपनी आत्मरक्षा के लिए दे सकता है।" इस 20 पन्ने की विज्ञपति का खुलासा विकिलीक्स वेबसाइट ने किया है। 

यह भी पढ़ें- एफ-16 पर बुरी तरह फंसा पाकिस्तान, अमेरिका की कार्रवाई से क्या हो सकता है नुकसान?

 

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : SELF
अमेरिका के साथ चल रही भारत की बातचीत की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि भारत पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस बारे में पूछ चुका है कि क्या पाकिस्तान ने भारत के विरुद्ध एफ-16 और एमरॉम मिसाइल का इस्तेमाल करते हुए सौदे की शर्तों का उल्लंघन किया है या नहीं?

उस वक्त अमेरिका में जॉर्ज बुश की सरकार थी। उन्होंने पाकिस्तान को एफ-16 देते समय भारत को आश्वासन दिया था कि वह पाकिस्तान द्वारा एफ-16 के इस्तेमाल को लेकर कड़ी निगरानी रखेंगे। इस दायरे में किसी तीसरे देश में अभ्यास या अभियान के दौरान इनकी तैनाती को भी ध्यान में रखने की बात की गई थी। 

2008 में वाशिंगटन ने कांग्रेस के सामने फंड की मंजूरी के लिए प्रस्ताव रखा था। 16 सितंबर, 2008 में विदेश मंत्रालय की हाउस कमिटि के सामने बयान में नौसेना अध्यक्ष जेफरी विएरिंगा, जो तत्कालीन यूएस डिफेंस रिक्यॉरिटी कोऑपरेशन एजेंसी के डायरेक्टर थे, ने कहा था कि पाकिस्तान कार्यक्रम को तीन लेटर्स ऑफ एक्सेप्टेंस (एलओए) द्वारा संरचित किया जाएगा।

पहला खत है 18 नए एफ-16 लड़ाकू विमानों का, दूसरा खत है, विशेष मिसाइल जैसे एमरॉम और तीसरा खत है पाकिस्तान के 46 एफ-16 के पुराने बेड़े को अपग्रेड करने को लेकर। "दूसरे एलओए में एमरॉम मिसाइल के अलावा, 750 मार्क 84 2,000 एलबी बम और 700 बीएलयू-109 पीनेटर बम भी शामिल थे।" ये हथियार पाकिस्तान को जून 2010 तक उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई थी। 

पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री दोबारा शुरू करने के समय अमेरिका के तत्कालीन असिस्टेंट सेक्रटरी ऑफ स्टेट जॉन हिलेन ने कहा था कि पाकिस्तान से बाहर एफ-16 ले जाने, अन्य देशों के साथ अभ्यास करने और अभियानों में शामिल करने के लिए पाकिस्तान को अमेरिका से स्वीकृति लेनी होगी। वहीं भारत भी कई बार पाकिस्तान को एफ-16 बेचे जाने को लेकर विरोध जता चुका है। 

27 फरवरी को जब पाकिस्तान ने भारत पर एफ-16 से हमला किया तो ये मुद्दा दोबारा उठने लगा। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायु सेना ने बम गिराए थे, जिसके अगले दिन पाकिस्तान ने भारतीय वायुक्षेत्र में प्रवेश कर एफ-16 विमानों से बम गिराए। जिसके बाद भारत ने भी जवाबी कार्रवाई कर पाकिस्तान का एफ-16 लड़ाकू विमान गिरा दिया था।

इससे पहले 2016 में भारत ओबामा प्रशासन द्वारा पाकिस्तान को आठ और एफ-16 लड़ाकू विमान बेचने की कोशिश को रोक चुका है। जिसके लिए भारत ने अमेरिकी संसद में लॉबींग की थी।

अभिनंदन ने किया कमाल 

अभिनंदन वर्तमान भारतीय वायुसेना के पहले ऐसे कॉम्बैट (लड़ाकू) पायलट हैं जिन्होंने एफ-16 विमान को मार गिराया है।मिग 21 विमान एक उन्नत संस्करण है लेकिन एफ-16 के सामने उसका कोई मुकाबला नहीं है। एफ-16 को एयर सुपीरियरिटी फाइटर के तौर पर डिजायन किया गया है। दशकों से वायुसेना सरकार को लड़ाकू स्क्वॉड्रन की कमजोर होती ताकत के बारे में बता रही है। उसने 100 लड़ाकू विमान की तुरंत जरूरत बताई है। जिसका अभी अधिग्रहण होना बाकी है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के पास मौजूद सुखोई-30एमकेआई दो दशक पुराने हैं और उन्हें अपग्रेड किए जाने की जरुरत है। बावजूद इसके भारतीय वायु सेना के जांबाज पायलटों ने हर मौके पर जबरदस्त जज्बा दिखाते हुए देश की शीश नहीं झुकने दिया है। 
 
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