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भारत पर दबाव बनाने की चीन की नई चाल, पीओके में रेल प्रोजेक्ट को पाक ने दी मंजूरी

Mon, 10 Aug 2020 09:16 AM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 10 Aug 2020 09:16 AM IST
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Pakistan approved the budget for rail line in Pakistan occupied Kashmir Imran Khan China Pakistan
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर भारत पर दबाव बनाने के लिए कई तरह के हथकंड़े अपना रहा है। इसी सिलसिले में पाकिस्तान की एक और नई चाल सामने आई है। इमरान खान सरकार ने पाक अधिकृत कश्मीर में एक रेल लाइन बिछाने के लिए करीब 21 हजार करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है।

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बताया जा रहा है कि ये रेल लाइन चीन की महात्वाकांक्षी योजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का हिस्सा है। हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं की गई है ये रेल लाइन पीओके में कहां से कहां तक बनाई जाएगी, यानि कि इसकी लंबाई कितनी होगी। 
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चीन के एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दिन पहले ही चीन ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद से शिजियांग प्रांत के काश्गर तक बनने वाली सड़क के एक हिस्से को आम जनता के लिए खोल दिया था। पाकिस्तान में 188 किलोमीटर की सड़क बनी हुई है, जिसका एक छोर थाकोट और दूसरा छोर हवेलियन में बसा हुआ है। 
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जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की इस रेल लाइन योजना का मकसद भारत पर दबाव बनाने का काम करेगा। कुछ दिन पहले इमरान खान सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने को लेकर विरोध जताया था और अपने देश का नया नक्शा पेश किया था।

नए नक्शे में पाकिस्तान ने लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के सियाचिन समेत गुजरात के जूनागढ़ और सर क्रीक पर अपना दावा किया था, जिसे भारत ने खारिज कर दिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे में चीन के अरबों पैसे लग चुके हैं और अब चीन सुरक्षा खतरे और लागत बढ़ने पर चिंतित है।

पाकिस्तान में कोरोना वायरस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसकी वजह गलियारे का काम धीमे गति से हो रहा है और दूसरी तरफ बलूचिस्तान से उग्रवादी के हमले और भी तेज हो गए हैं।


बलूच लिबरेशन आर्मी के उग्रवादियों ने अगस्त 2018 में ग्वादर से बस के जरिए डालबाडिन जा रहे चीनी इंजीनियरों पर हमला किया था, जिसमें तीन लोग मारे गए थे और पांच लोग घायल हो गए थे। इसके अलावा नवंबर 2018 में कराची के चीनी वाणिज्यिक दूतावास पर भी इस ग्रुप ने हमला किया था।

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