Pakistan: इमरान की पार्टी को ठिकाने लगाने के बाद अब पीडीएम का दावा- चुनाव हम जीतेंगे
पाकिस्तान के गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने सोमवार को कहा कि पीटीआई के नेता भविष्य में तीन दलों में बंट जाएंगे। इससे उनका वोट भी बंट जाएगा और इस तरह ये पार्टी सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के लिए खतरा नहीं रह जाएगी...
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पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी को तोड़ने में पाकिस्तान की सेना और सरकार को मिली सफलता के बाद अब सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के नेता अगले आम चुनाव में अपनी जीत का एलान करने लगे हैं। अब वे यह भी कहते सुने जा रहे हैं कि चुनाव अपने समय पर यानी इस वर्ष अक्तूबर में होंगे।
9 मई को इमरान खान की हुई गिरफ्तारी के बाद देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। आरोप है कि उसका बहाना बना कर सेना ने खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेताओं का दमन शुरू किया और उससे बचने के लिए नेताओं के सामने पार्टी छोड़ने का विकल्प रखा। तब से हर स्तर पर बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता पीटीआई छोड़ चुके हैं।
पाकिस्तान के गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने सोमवार को कहा कि पीटीआई के नेता भविष्य में तीन दलों में बंट जाएंगे। इससे उनका वोट भी बंट जाएगा और इस तरह ये पार्टी सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के लिए खतरा नहीं रह जाएगी। सनाउल्लाह ने कहा कि पीटीआई का एक गुट पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी में शामिल हो जाएगा, एक गुट जहांगीर तरीन गुट में रहेगा, जबकि बाकी नेता इमरान खान के नेतृत्व वाली पीटीआई में बने रहेंगे।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि नौ मई के बाद चले घटनाक्रम के कारण इमरान खान अलग-थलग पड़ गए हैं। जिन नेताओं ने पार्टी नहीं छोड़ी है, उनमें से ज्यादातर जेल में हैं। पिछले हफ्ते पीटीआई नेता चौधरी परवेज इलाही ने कहा था कि वे इस मुश्किल घड़ी में इमरान खान का साथ नहीं छोड़ेंगे। यह बयान देने के तुरंत बाद उन्हें पुलिस के आतंकवाद-विरोधी दस्ते ने गिरफ्तार कर लिया। जबकि पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को मई में हुई गिरफ्तारी के बाद से जेल में रखा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पीटीआई का यह हाल क्यों हुआ, इसे लेकर किसी के मन में संदेह नहीं है। सेनाध्यक्ष जनरल परवेज मुनीर की देखरेख में ये सारी कार्रवाई हुई है। इन विश्लेषकों के मुताबिक मुनीर की योजना इमरान खान को गिरफ्तार कर उन पर सैनिक अदालत में मुकदमा चलाने की है। लेकिन उसके पहले उन्होंने पीटीआई को तोड़ कर पूर्व प्रधानमंत्री को बिल्कुल अलग-थलग कर देने की रणनीति पर काम किया है।
लंदन स्थित साओस यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के एसोसिएट प्रोफेसर अनिवाश पालीवाल ने द गार्जियन से कहा- ‘पीटीआई पर ये नाटकीय कार्रवाई सेना ने एक स्पष्ट रणनीति से की है। मकसद इमरान खान के लिए समर्थन का हर ढांचा खत्म करने का रहा है। जब यह ढांचा खत्म हो जाएगा, तब खान पर हाथ डाला जाएगा।’ पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान ऐसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री नहीं हैं, जिन पर सेना ने कहर ढाया है। इसके पहले 1977 में पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो पर मार्शल लॉ के तहत मुकदमा चलाने के बाद उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था।
पीटीआई के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि जो लोग भी पीटीआई से जुड़े या उसके समर्थक रहे हैं, वे सेना की कार्रवाई का निशाना बने हैं। पीटीआई के समर्थक माने जाने वाले पत्रकार इमरान रियाज खान पिछले 11 मई से लापता हैं। इमरान खान के एक पूर्व सलाहकार के भाई मुराद अकबर को एक हफ्ते पहले उनके घर से उठा लिया गया। उसके बाद से उनकी कोई खबर नहीं मिली है।