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संकट में सरकार: इमरान खान की पार्टी के 50 मंत्रियों का पता नहीं, संघीय और प्रांतीय मंत्री भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए
Sat, 26 Mar 2022 10:35 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sat, 26 Mar 2022 10:35 PM IST
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इमरान खान(फाइल)
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
पाकिस्तान में अपनी सरकार बचाने के लिए इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने भले ही शुक्रवार को संसद के पटल पर अविश्वास प्रस्ताव रखने से पहले ही कार्यवाही स्थगित कर दी हो लेकिन इससे संकट नहीं टला है। इमरान चाहते थे कि 28 मार्च तक उनकी पार्टी को बागी सांसदों से बात करने की मोहलत मिल जाए लेकिन इससे पहले ही सत्ताधारी दल के करी 50 मंत्री सियासी मोर्चे से ‘लापता’ हो गए हैं।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि विपक्ष ने इमरान के खिलाफ संकट बढ़ाना जारी रखा है। इसी कदम के तहत शुक्रवार दोपहर बाद से सत्तापक्ष के कम से कम 50 से ज्यादा संघीय और प्रांतीय मंत्रियों को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। सूत्रों ने बताया कि इन मंत्रियों में से 25 संघीय और प्रांतीय सलाहकार तथा विशेष सहायक हैं। इनमें चार राज्य मंत्री स्तर के हैं, चार सलाहकार स्तर के और 19 विशेष सहायक स्तर के हैं।
माना जा रहा है कि ये ‘लापता’ मंत्री सोमवार को अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद इमरान को धोखा दे सकते हैं। पीटीआई के कई मंत्रियों व नेताओं ने भी मसले पर चुप्पी साधकर अटकलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, सूचना मंत्री फवाद चौधरी, ऊर्जामंत्री हम्माद अजहर, रक्षामंत्री परवेज खट्टक व गृहमंत्री शेख राशिद पीएम खान के बचाव में अब भी मुखर हैं।
सियासी दल की निष्ठा के लिए सांसद बाध्य नहीं : बंदियाल
पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने कहा है कि संविधान किसी भी सांसद को किसी सियासी दल के प्रति निष्ठा के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। पाक अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद के एक तर्क का जिक्र करते हुए बंदियाल ने राष्ट्रपति के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 63-ए के तहत दलबदल की तुलना बेईमानी से करने की अपील पर यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, पार्टी के प्रति निष्ठा बदलने वाले सांसद अपने मतदाताओं को धोखा नहीं दे रहे इसलिए इस संबंध में उन्हें आजीवन अयोग्य घोषित करना या अविश्वास प्रस्ताव के दौरान उनके मतों की गिनती न करना उचित नहीं है।
बजट के बाद इमरान को चुनाव की सलाह दी : राशिद
इमरान का बचाव करने वाले नेता और गृहमंत्री शेख राशिद ने शनिवार को कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को वित्तीय वर्ष 2022023 के लिए संघीय बजट पेश करने के बाद चुनाव कराने की सलाह दी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि विपक्ष द्वारा लाए जाने वाले अविश्वास प्रस्ताव के चलते उनकी लोकप्रियता बढ़ गई थी। उन्होंने जोर दिया कि जल्द चुनाव का विचार उनकी अपनी राय थी, इसे पार्टी का रुख नहीं समझना चाहिए। राशिद ने कहा, मैं एक अच्छा बजट पेश करने के बाद जल्द चुनाव की मांग कर रहा हूं क्योंकि इस अक्षम विपक्ष ने हमें फिर से जीतने की इजाजत दी है।
अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान 3 या 4 अप्रैल को
गृहमंत्री शेख राशिद ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान 3 या 4 अप्रैल को हो सकता है। इस बीच, विपक्षी दल जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल का एक कारवां भी विपक्ष की 28 मार्च की रैली में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद रवाना हो गया है। शेख राशिद ने कहा, यह सब कुछ व्यर्थ है, क्योंकि इमरान आज भी देश के सबसे कद्दावर नेता हैं।
सहयोगियों को मनाने का दौर
सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के खिलाफ 28 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव को देखते हुए इमरान खान उन सहयोगियों को वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं जिनका समर्थन उनकी सरकार को बचा सकता है। उन्होंने पीटीआई के प्रमुख सहयोगी दल मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात भी की। उधर, शाह महमूद कुरैशी, असद उमर और परवेज खट्टक ने इस्लामाबाद में एक्यूएम-पी के मंत्रियों से मुलाकात की। खान की कोशिश सहयोगी दलों को मनाने की है ताकि वे मतदान में उनकी पार्टी का साथ दें।
जेल की सजा पूरी करने के बाद तीन पाकिस्तानी वापस भेजे
इस बीच भारतीय जेल में अपनी सजा पूरी करने के बाद तीन पाकिस्तानी नागरिकों को अटारी-वाघा बॉर्डर से उनके देश भेज दिया गया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि समीरा अब्दुल रहमान, मुर्तजा असगर अली और अहमद राजा नाम के कैदियों को 26 मार्च को पाकिस्तान भेजा गया। समीरा के साथ उसकी चार साल की बेटी सना फातिमा भी थी। मंत्रालय ने साथ ही कहा कि पाकिस्तान की जेलों में सभी भारतीय कैदियों और मछुआरों की जल्द रिहाई व स्वदेश वापसी को भारत सर्वोच्च महत्व देता है। वर्ष 2022 में सरकार के लगातार प्रयासों से 20 भारतीय मछुआरों और एक नागरिक को पाकिस्तान की हिरासत से वापस लाने में कामयाबी मिली है।
बांग्लादेशी परिषद ने 1971 नरसंहार के लिए पाक विरोधी प्रदर्शन किया
फ्रांस के बांग्लादेश हिंदू बौद्ध व ईसाई एकता परिषद (बीएचबीसीयूसी) ने प्रदर्शन करके अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 1971 में पाक द्वारा बांग्लादेशियों की व्यवस्थित हत्या को नरसंहार घोषित करने का आह्वान किया। इस विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तानी सेना के नरसंहार को दर्शाते हुए एक पोस्टर प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। पोस्टरों में बड़े पैमाने पर पाक सेना की हिंसा और यातना को दिखाया गया जो तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में 1971 के दौरान देश की आजादी के आंदोलन की याद दिलाता है। इस मौके पर पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की गई।