पाकिस्तान: शीर्ष अदालत ने CJP की शक्तियों पर नए कानून को बरकरार रखा, नवाज शरीफ के लिए बढ़ीं मुश्किलें
Pakistan: शीर्ष अदालत ने बुधवार को उस कानून को बरकरार रखा है, जिसका मकसद सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) की शक्ति को कम करना था। सीजेपी काजी फैज ईसा की अध्यक्षता वाली 15 सदस्यीय पूर्ण पीठ ने 10-5 के बहुमत से कई दिनों तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुनाया।
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पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बड़ा झटका दिया है। दरअसल, पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने बुधवार को उस कानून को बरकरार रखा है, जिसका मकसद सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) की शक्ति को कम करना था। सीजेपी काजी फैज ईसा की अध्यक्षता वाली 15 सदस्यीय पूर्ण पीठ ने 10-5 के बहुमत से कई दिनों तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुनाया।
तत्कालीन सीजेपी उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय पीठ ने इस साल अप्रैल में निवर्तमान संसद द्वारा पारित कानून के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी और इसे 'शीर्ष न्यायपालिका की आजादी' के खिलाफ बताया था। 'उच्चतम न्यायालय अभ्यास और प्रक्रिया विधेयक 2023' कानून का सबसे उल्लेखनीय प्रावधान मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान लेने के अधिकार को हटाना है।
कानून के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय पीठ पीठों के गठन और संज्ञान लेने या न लेने के बारे में फैसला करेगी। यह पहले मुख्य न्यायाधीश का एकमात्र विशेषाधिकार था। कानून के मुताबिक शीर्ष अदालत के समक्ष हर कारण, मामले या अपील की सुनवाई और निपटान मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से बनी एक समिति द्वारा गठित पीठ द्वारा की जाएगी। इसमें कहा गया है कि समिति के फैसले बहुमत से लिए जाएंगे। कानून में संज्ञान मामलों में फैसले के तीस दिनों के भीतर अपील दायर करने का अधिकार भी शामिल था।
इसमें यह भी कहा गया है कि संवैधानिक व्याख्या से जुड़े किसी भी मामले में पांच से कम न्यायाधीशों की पीठ नहीं होगी। हालांकि, पीठ ने मामूली बहुमत के साथ घोषणा की कि नया कानून पिछले फैसलों पर लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि यह विधेयक तीन बार प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री सैयद यूसुफ रजा गिलानी और कई अन्य सांसदों को अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ अपील करने की अनुमति नहीं देगा।