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Pakistan: अल अजीजिया भ्रष्टाचार मामले में फिर से सुनवाई, नवाज शरीफ की याचिका पर कोर्ट ने कही यह बात
Thu, 07 Dec 2023 05:07 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 07 Dec 2023 05:07 PM IST
सार
अल-अजीजिया स्टील मिल भ्रष्टाचार मामले की फिर से इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई शुरू कर दी है। सजा काट रहे नवाज शरीफ द्वारा दायर याचिका पर इस्लामामबाद हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है। यहां पढ़ें...
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इस्लामाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
अल अजीजिया स्टील मिल भ्रष्टाचार मामले में सजा के खिलाफ पीएमएल-एन के प्रमुख नवाज शरीफ ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। गुरुवार को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर फिर से सुनवाई शुरु की गई है। बता दें नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने दिसंबर 2018 में सात साल की जेल की सजा सुनाई थी और उन पर भारी जुर्माना लगाया था।
इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन की एक खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। बता दें इसी पीठ ने 29 नवंबर को एवेनफील्ड मामले में नवाज शरीफ को बरी किया था।
अल अजीजिया स्टील मिल भ्रष्टाचार मामले में नवाज शरीफ जेल की सजा काट रहे थे, अक्तूबर 2019 में इलाज के नाम पर लंदन गए, जिसके बाद वे वहां से वापस नहीं लौंटे थे। जिसके बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें मामले में अपराधी घोषित कर दिया था। हालांकि पिछले माह ही तकरीबन चार साल बाद फिर से वह देश लौट आएं हैं।
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राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो के मुताबिक, मिल की स्थापना उनके शासन काल के दौरान जमा किए गए भ्रष्टाचार के पैसे का उपयोग करने के लिए की गई थी। हालांकि नवाज शरीफ द्वारा इन आरोपों को खारिज किया गया है। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कतर के शाही परिवार ने मिल में निवेश किया था जबकि शरीफ के पिता मुहम्मद शरीफ ने अपने हिस्से के रूप में पांच मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए थे। हालांकि बचाव पक्ष मिल की स्थापना में इस्तेमाल किए गए पैसों का सबूत देने में विफल रहे थे। शरीफ को एवेनफील्ड भ्रष्टाचार मामले में पहले ही बरी कर दिया गया है, जिसमें उन्हें जुलाई 2018 में दोषी ठहराया गया था और दस साल जेल की सजा सुनाई गई थी।
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इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन की एक खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। बता दें इसी पीठ ने 29 नवंबर को एवेनफील्ड मामले में नवाज शरीफ को बरी किया था।
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अल अजीजिया स्टील मिल भ्रष्टाचार मामले में नवाज शरीफ जेल की सजा काट रहे थे, अक्तूबर 2019 में इलाज के नाम पर लंदन गए, जिसके बाद वे वहां से वापस नहीं लौंटे थे। जिसके बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें मामले में अपराधी घोषित कर दिया था। हालांकि पिछले माह ही तकरीबन चार साल बाद फिर से वह देश लौट आएं हैं।
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राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो के मुताबिक, मिल की स्थापना उनके शासन काल के दौरान जमा किए गए भ्रष्टाचार के पैसे का उपयोग करने के लिए की गई थी। हालांकि नवाज शरीफ द्वारा इन आरोपों को खारिज किया गया है। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कतर के शाही परिवार ने मिल में निवेश किया था जबकि शरीफ के पिता मुहम्मद शरीफ ने अपने हिस्से के रूप में पांच मिलियन अमेरिकी डॉलर दिए थे। हालांकि बचाव पक्ष मिल की स्थापना में इस्तेमाल किए गए पैसों का सबूत देने में विफल रहे थे। शरीफ को एवेनफील्ड भ्रष्टाचार मामले में पहले ही बरी कर दिया गया है, जिसमें उन्हें जुलाई 2018 में दोषी ठहराया गया था और दस साल जेल की सजा सुनाई गई थी।