कोरोना की दवा की तलाश में सोमवार को एक उम्मीद की किरण दिखाई दी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने वैक्सीन के शुरुआती ट्रायल में पाया कि यह दवा असरदार है। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि ट्रायल में पाया गया कि वैक्सीन ने 18 से 55 वर्ष की आयु के लोगों में दोहरी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। इस तरह के शुरुआती परीक्षणों को आमतौर पर केवल सुरक्षा का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है, लेकिन इस मामले में विशेषज्ञ यह भी देखना चाह रहे थे कि इसकी किस तरह की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होगी।
ब्रिटिश शोधकर्ताओं ने पहली बार अप्रैल में लगभग 1,000 लोगों में वैक्सीन का परीक्षण शुरू किया था, जिनमें से आधे लोगों को वैक्सीन लगाई गई थी। सोमवार को इस वैक्सीन के ट्रायल के परिणामों को लेकर आई रिपोर्ट में कहा गया है कि वैक्सीन ने शुरुआती परीक्षण में लोगों में सुरक्षात्मक प्रतिरोधक प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन बीमारी और उसके प्रसार को कम करने के लिए बनाई गई है। आइए जानते हैं इस वैक्सीन से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य
फार्मा कंपनी ने वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किया विकसित
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- वैक्सीन को एजेडडी1222 ( AZD1222 ) नाम दिया गया है। इसे फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर विकसित कर रही है।
- इस वैक्सीन का पहला मानव परीक्षण (ह्यूमन ट्रायल) यह संकेत करता है कि यह स्वस्थ वॉलंटियर पर प्रयोग के लिए सुरक्षित है।
चिम्पैंजी के वायरस में किए गए जेनेटिक बदलाव
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coronavirus vaccine China
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- इस वैक्सीन को चिम्पैंजी में सामान्य सर्दी जुकाम का कारण बनने वाले वायरस में जेनेटिक बदलाव लाकर तैयार किया गया है।
- इसे वैज्ञानिक भाषा में वायरल वेक्टर कहते हैं। इसमें इस तरह बदलाव लाया गया है कि यह लोगों को संक्रमित न कर सके और कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता पैदा कर सके।
एंटीबॉडी और टी-सेल को करती है मजबूत
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- मनुष्य के इम्यून सिस्टम में रोगजनकों को खोजने और उन्हें खत्म करने के लिए दोहरी व्यवस्था होती है. एंटीबॉडी और टी-सेल। यह वैक्सीन दोनों पक्षों को मजबूत करती है।
- एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने से जो परमाणु उत्पन्न होते हैं वो संक्रमण रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- इस वैक्सीन से शरीर की टी-कोशिकाओं में एक प्रतिक्रिया होती है जो कोरोना वायरस से लड़ने में मदद करती है।
कई देशों में चल रहे ट्रायल
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- दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना इस वैक्सीन का ट्रायल उन्नत चरण में है। ब्रिटेन के लगभग 10,000 लोगों के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में इस वैक्सीन के ट्रायल किए जा रहे हैं।
- अगर वैक्सीन का अंतिम ट्रायल भी सफल रहता है तो ऑक्सफोर्ड ने एस्ट्राजेनेका और ब्रिटिश सरकार के साथ वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए करार किया है। एस्ट्राजेनेका पहले ही दो अरब खुराक बनाने की प्रतिबद्धता जता चुकी है।
- इस वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए वैश्विक भागीदारों में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भी शामिल है। हालांकि इसके लिए नियामक की मंजूरी जरूरी होगी।
- एस्ट्राजेनेका ने दुनियाभर की सरकारों के साथ इस वैक्सीन की उपलब्धता के लिए करार किए हैं। कंपनी ने रहा है कि लाखों लोगों की जान लेने वाली इस महामारी के इलाज के लिए बनी वैक्सीन को लेकर वह मुनाफा कमाने की ओर ध्यान नहीं देंगे।