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ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन रेस में सबसे आगे, 30 हजार लोगों पर होगा इसका सबसे बड़ा ट्रायल
Mon, 29 Jun 2020 04:16 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 29 Jun 2020 04:16 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
छह महाद्वीपों के लोग कोरोना की सफल वैक्सीन तैयार करने की होड़ में लगे हुए हैं। लेकिन गर्मी में ही तय हो जाएगा कि कौन सी वैक्सीन कारगर होती है। ब्रिटेन और चीन के शोधकर्ता इस मामले में सबसे आगे हैं, वहीं ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात में भी वैक्सीन की क्षमता परखी जा रही है।
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इसी महीने ब्रिटेन 30 हजार लोगों पर इसका ट्रायल करने जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जिस वैक्सीन पर काम कर रही है, वह कोरोना वायरस के तोड़ की रेस में सबसे आगे है। इसके लगभग एक महीने बाद अमेरिका जुलाई में 30 हजार लोगों पर सबसे बड़ा ट्रायल करने की तैयारी में है।
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विश्व बैंक की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा, ऑक्सफोर्ड की शोध गति को देखते हुए मुझे लगता है कि वह आगे निकल जाएगी। इसकी वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के आखिरी चरण में है। यह वैक्सीन 10 हजार से अधिक लोगों को दी जाएगी। इसका ट्रायल ब्रिटेन, साउथ अफ्रीका और ब्राजील में भी हो रहा है। मॉडेर्ना की वैक्सीन भी जुलाई में ही तीसरे चरण के परीक्षण में पहुंचने वाली है। यह वैक्सीन आनुवांशिक रूप से बदली गई वायरस से बनी है जिस कारण इंसानों पर इसका दुष्प्रभाव नहीं होगा।
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वैक्सीन अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉ. एंथनी फॉसी ने कहा कि अमेरिकियों और ब्राजील या दक्षिण अफ्रीका जैसे अन्य देशों के कार्यकर्ताओं के बीच इस मुद्दे पर मतभेद भी हो सकता है। हम पहले भी गच्चा खा चुके हैं लेकिन अब भी आशावादी हैं। दुनिया के कई हिस्सों में मिल रहीं सफलताएं महत्वपूर्ण हैं। यह कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है कि कौन पहले सफल होगा।
यह चुनौती है कि आप कितनी सुरक्षित, प्रभावी और मान्य वैक्सीन बना सकते हैं। वैक्सीन विशेषज्ञ कहते हैं कि यह वक्त लोगों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का है। कई वैज्ञानिकों को नहीं लगता कि कोराना की वैक्सीन उतनी सफल होगी, जितनी कि चेचक की हुई। यूनिवर्सिटी ऑफ पेनिसिल्वेनिया के डॉ. ड्रयू विसमैन ने कहा, यदि कोई वैक्सीन 50 फीसदी ही प्रभावी होती है तो यह मेरे लिए बड़ी बात है।