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नेपाल में बजट सत्र के पहले दिन विपक्ष ने ओली सरकार से मांगा इस्तीफा

Fri, 08 May 2020 11:04 PM IST
अमित कुमार अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडू
अमर उजाला ब्यूरो, काठमांडू Published by: अमित कुमार Updated Fri, 08 May 2020 11:04 PM IST
सार

  • ओली पर भ्रष्टाचार और अलोकतांत्रिक तरीके से काम करने के गंभीर आरोप
  • गृह मंत्री ने संसद में पेश किए दोनों विवादास्पद विधेयक

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Opposition seeks resignation from Oli government on first day of budget session in Nepal
Nepal PM KP Sharma Oli - फोटो : Social Media

विस्तार

जैसी कि आशंका थी नेपाल में बजट सेशन का पहला दिन बेहद हंगामेदार रहा। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही विपक्ष ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली पर तमाम तरह के आरोप लगाए और इस्तीफे की मांग की। विपक्ष ने प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में सरकार की नाकामी के साथ ही सरकार को  लोकतांत्रिक प्रक्रिया न अपनाने के लिए घेरा। विपक्ष ने कहा कि ओली को कुर्सी पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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इससे पहले संसद में पहुंचने वाले सभी सदस्यों की मेडिकल जांच की गई और पूरे परिसर को सैनिटाइज किया गया। सदस्यों ने बोलने से पहले अपने फेस मास्क हटा दिए थे, ऐसे में हर सदस्य के बोलने के बाद माइक और पोडियम को बार बार सैनिटाइज किया जाता रहा।
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स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा ने सदस्यों का स्वागत किया और बताया कि राष्ट्रपति ने रविवार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाया है। प्रधानमंत्री ओली की तरफ से गृह मंत्री राम बहादुर थापा ने उन दोनों विवादास्पद संशोधन विधेयक भी पेश किए जिन्हें पिछले दिनों ओली ने मनमानी से पास करवाकर राष्ट्रपति से मंजूरी भी दिलवा दी थी और जबरदस्त दबाव के बाद जिन्हें वापस लेना पड़ा था। ये संशोधन विधेयक हैं – संवैधानिक समिति (पहला संशोधन) बिल और राजनीतिक पार्टी (दूसरा संशोधन) बिल।
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इसी बीच मुख्य विपक्षी दल के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने हाल के विवादों को लेकर सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ओली सरकार ने नैतिक और राजनीतिक तौर पर सत्ता में बने रहने का अधिकार खो दिया है। सरकार तमाम तरह के भ्रष्टाचार के मामलों के साथ–साथ असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक तरीके से काम कर रही है, इसलिए ओली को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने नेपाल में कोरोना के तेजी से बढ़े मामले और सरकार की इस मोर्चे पर भी नाकामी का जिक्र किया। पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई ने भी ओली सरकार पर ऐसे ही आरोप लगाए।
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