Russia-Ukraine War: यूक्रेन युद्ध का एक साल, दूर-दूर तक नजर नहीं आता कोई समाधान
Russia-Ukraine War: पिछले वर्ष 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन में अपनी ‘विशेष सैनिक कार्रवाई’ शुरू की थी। हाल में उसने अपना पुराना रुख दोहराया है कि वह यूक्रेन के साथ समझौता करने को तैयार है। लेकिन यह साफ है कि रूस यह समझौता अपनी शर्तों पर करना चाहता है...
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इस हफ्ते यूक्रेन युद्ध शुरू हुए एक साल पूरा हो जाएगा। इस मौके पर ज्यादातर रक्षा विशेषज्ञ अभी युद्ध के और लंबा खिंचने की संभावना जता रहे हैं। उनके मुताबिक दोनों में से किसी पक्ष के रुख में नरमी के संकेत नहीं हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेन्स्की ने फिर दोहराया है कि वे ऐसा कोई समझौता नहीं करेंगे, जिससे उनके देश की एक इंच जमीन भी रूस को मिल जाए। जबकि रूस यूक्रेन के दोनेत्स्क और लुहांस्क इलाकों को अपने मिला चुका है।
पिछले वर्ष 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन में अपनी ‘विशेष सैनिक कार्रवाई’ शुरू की थी। हाल में उसने अपना पुराना रुख दोहराया है कि वह यूक्रेन के साथ समझौता करने को तैयार है। लेकिन यह साफ है कि रूस यह समझौता अपनी शर्तों पर करना चाहता है। इस बीच रूस ने यूक्रेन पर अपने हमले जारी रखे हैं। ऐसे संकेत हैं कि रूस इन हमलों में तेजी लाने की तैयारी में है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक यूक्रेन के बाखमुट शहर के आसपास रूस ने शिकंजा कस लिया है। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि जल्द ही इस शहर पर रूस का कब्जा हो जाएगा।
रक्षा विशेषज्ञ स्टीफन ब्रायन ने वॉर एंड स्ट्रेटेजी नामक अपने ब्लॉग पर लिखा है कि रूसी बाखमुट की लड़ाई को उतना ही अहम मान रहे हैं, जैसा दूसरे विश्व युद्ध के समय उन्होंने स्टालिनग्राद की लड़ाई को समझा था। उस युद्ध में तत्कालीन सोवियत संघ की जीत के साथ ही नाजी जर्मनी की निर्णायक हार का रास्ता तैयार हो गया था।
कुछ विश्लेषकों ने राय जताई है कि युद्ध क्या मोड़ लेगा, यह तय करने के सूत्र अमेरिका के हाथ मे हैं। अब तक बाइडन प्रशासन ने ऐसे किसी समझौते के प्रस्ताव को वीटो कर दिया है, जिसे रूस अपनी जीत के रूप में पेश कर सके। पिछले एक साल में युद्ध खत्म कराने के लिए तुर्किये और इस्राइल ने ठोस प्रयास किए। इसके अलावा फ्रांस और जर्मनी ने भी समझौते से रास्ता निकालने की वकालत की। लेकिन अमेरिका ने उन सब प्रयासों को ठुकरा दिया।
पश्चिमी मीडिया में छपी टिप्पणियों से साफ है कि अमेरिका और उसके साथी देश सिर्फ वैसे ही किसी समाधान ही पर सहमत होंगे, जिसके तहत रूस कब्जा की हुई यूक्रेन की जमीन उसे वापस करने पर राजी होगा। उधर रूसी विश्लेषकों की दलील है कि 2015 में हुए मिन्क्स-2 समझौते के तहत यही सहमति बनी थी कि दोनेत्स्क और लुहांस्क यूक्रेन में रहेंगे, लेकिन यूक्रेन उन इलाकों को स्वायत्तता देगा। रूस का आरोप है कि यूक्रेन ने इस समझौते का पालन नहीं किया, इसलिए मौजूदा लड़ाई की नौबत आई।
कुछ समय पहले जर्मनी की पूर्व चांसलर अंगेला मैर्केल ने यह सनसनीखेज बयान दिया था कि मिन्स्क समझौता लागू करने के लिए नहीं, बल्कि समय काटने के लिए किया गया था। इस्राइल के पूर्व प्रधानमंत्री नाफतेली बेनेट ने हाल में कहा था कि उनकी मध्यस्था के कारण यूक्रेन संकट का हल काफी करीब आ गया था, लेकिन पश्चिमी देशों ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी।
रूसी विश्लेषक इन बातों को इस बात की मिसाल बताते हैं कि अमेरिका और पश्चिमी देश कोई समाधान नहीं चाहते। बल्कि यूक्रेन को प्रॉक्सी बना कर वे रूस को नष्ट करना चाहते हैं। इसलिए रूस को फिलहाल युद्ध रुकने की उम्मीद नहीं है। उधर जेलेन्स्की ने भी लगातार यही बातें कही हैं। इसलिए पहली बरसी पर यह आम अनुमान है कि ये युद्ध असीमित समय तक जारी रह सकता है।