फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   One kilogram is no longer one kilogram

एक किलोग्राम अब एक किलोग्राम नहीं रहा

Sat, 17 Nov 2018 10:11 AM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Sat, 17 Nov 2018 10:11 AM IST
विज्ञापन
One kilogram is no longer one kilogram
- फोटो : BBC

वर्तमान में इसे प्लेटिनम से बनी एक सिल के वजन से परिभाषित किया जाता है जिसे 'ली ग्रैंड के' कहा जाता है। ऐसी एक सिल पश्चिमी पेरिस में इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (बीआईपीएम) के पास साल 1889 से बंद है। फ़्रांस के वर्साइल्स में 'वेट एंड मेजर्स' पर एक बड़ा सम्मलेन आयोजित किया गया था जिसमें कई वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया था। इसमें किलोग्राम की परिभाषा बदलने के लिए वोट किया गया जिसके बाद इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी गई। ज़्यादातर वैज्ञानिकों का पक्ष था कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा के आधार पर परिभाषित किया जाए। हालांकि, यूके में नेशनल फिजिकल लैबोरेट्री की वैज्ञानिक पेर्डी विलियम्स ने इसके बारे में मिलीजुली राय ज़ाहिर की। 

विज्ञापन


वो कहती हैं, "मैं लंबे वक्त से इस प्रोजेक्ट के साथ नहीं जुड़ी हूं और मैं किलोग्राम का माप पसंद करती हूं। लेकिन ये अपने आप में महत्वपूर्ण पल है और मैं एक अच्छा कदम है। ये नया तरीका बेहतर तरीके से काम करेगा।" जो बदलाव हुआ है वो लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित नहीं करेगा। लेकिन, उद्योग और विज्ञान में इसका व्यावहारिक प्रयोग होने की उम्मीद है क्योंकि यहाँ सटीक माप होने की आवश्यकता होती है। अंतरराष्ट्रीय मात्रक प्रणाली में किलो सात बेसिक यूनिट्स में से एक है। उनमें से चार हैं- किलो, एंपियर (विद्युत प्रवाह), केल्विन (ताप) और मोल (पार्टिकल नंबर)। किलोग्राम अंतिम एसआई बेस यूनिट है जो अभी तक एक फिजिकल ऑब्जेक्ट द्वारा परिभाषित है। 'ली ग्रैंड के' लंदन में निर्मित 90 प्रतिशत प्लेटिनम और दस प्रतिशत इरिडियम से बना 4 सेंटीमीटर का एक सिलेंडर है, जो पश्चिमी पेरिस के सीमांत सेवरे में इंटरनेश्नल ब्यूरो ऑफ वेट्स एंड मेजर्स (बीआईपीएम) के वॉल्ट में साल 1889 से बंद है।
विज्ञापन


क्योंकि फिजीकल ऑब्जेक्ट आसानी से परमाणु को खो सकते हैं या हवा से अणुओं को अवशोषित कर सकते हैं, इसी कारण इसकी मात्रा माइक्रोग्राम में दसियों बार बदली गई थी। इसका मतलब है कि किलोग्राम और स्तर मापने के लिए दुनिया भर में प्रोटोटाइप का उपयोग किया जाता है, जो कि एकदम सही अशुद्धि बताता है। सामान्य जीवन में इस तरह के मामूली बदलाव दिखाई भी नहीं देते, लेकिन एकदम सटीक वैज्ञानिक गणनाओं के लिए ये एक बड़ी समस्या रही है। भविष्य में किलोग्राम को किब्बल या वाट बैलेंस का उपयोग करके मापा जाएगा। एक ऐसा उपकरण जो यांत्रिक और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा का उपयोग करके सटीक गणना करता है। ऐसा होने के बाद किलोग्राम की परिभाषा न बदली जा सकेगी और न ही इसे कोई नुकसान पहुँचाया जा सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये न केवल फ्रांस में बल्कि दुनिया में कहीं भी वैज्ञानिकों को एक किलो का सटीक माप उपलब्ध करवाएगा। यूके के राष्ट्रीय मानक प्रयोगशाला के शोध निदेशक और ब्रिटेन में पैमाइश मानकों के उत्तरदायी थिओडोर जैनसेन कहते हैं, "वैज्ञानिक पैमाइश में एसआई को पुन: परिभाषित करना एक यादगार क्षण है।" "एक बार लागू होने के बाद सभी एसआई यूनिट फंडामेंटल कंस्टेंट की प्रकृति पर आधारित होंगी, जिसके मायने हमेशा के लिए तय हो जाएंगे और ये और भी अधिक सटीक पैमाइश कर पाएगा।" नए किलोग्राम के मई 2019 तक आने की उम्मीद है। 


यह इलेक्ट्रॉन पंप के माध्यम से किया जाएगा जो एक बार में प्रवाहित विद्युत से औसत करेंट उत्पन्न करता है और विद्युत की गणना करता है। केल्विन (तापमान यूनिट) को पारिभाषित करने के लिए ध्वनि के लिए इस्तेमाल होने वाले थर्मामीटर का उपयोग किया जायेगा, जो एक निश्चित तापमान पर गैस से भरे क्षेत्र में ध्वनि की गति का माप लेता है। पदार्थ की मात्रा को मापने के लिए मोल, यूनिट का इस्तेमाल कर फिर से परिभाषित किया जायेगा जो शुद्ध सिलिकॉन-28 में सही परमाणुओं की मात्रा निर्धारित करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed