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Hindi News ›   World ›   On the 20th anniversary of 9/11 attacks know the whole timeline of events from US invasion of Afghanistan to Osama Bin Laden killing and Al-Qaeda getting back

9/11 हमला: अफगानिस्तान में अल-कायदा को खत्म करने के दावे से लेकर तालिबान को सत्ता सौंपने तक, जानें 20 साल का घटनाक्रम

Sat, 11 Sep 2021 12:19 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 11 Sep 2021 12:19 PM IST
सार

अमेरिका में 20 साल पहले इसी दिन अल-कायदा के आतंकियों ने चार विमानों को हाईजेक कर जबरदस्त तबाही मचाई थी। उनके हमलों में करीब तीन हजार मासूमों की मौत हुई थी। अमेरिका ने इस ऑपरेशन के बाद कई ऑपरेशन चलाए, जिनका असर इतने सालों में हुए घटनाक्रमों से चलता है।

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On the 20th anniversary of 9/11 attacks know the whole timeline of events from US invasion of Afghanistan to Osama Bin Laden killing and Al-Qaeda getting back
अमेरिका में 9 सितंबर 2001 को हुए थे हमले, इसके बाद अफगानिस्तान में 20 साल आतंकियों के खात्मे की कोशिशों के बाद अमेरिकी सेना ने खत्म किया ऑपरेशन। - फोटो : PTI/Social Media

विस्तार

अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमलों से पूरी दुनिया दहल उठी थी। चार अलग-अलग विमानों को हाईजैक करने के बाद अल-कायदा के आतंकियों ने इन्हें वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और अलग-अलग जगहों को तबाह करने में इस्तेमाल किया। 9/11 हमलों में मरने वाले लोगों की तादाद करीब 3 हजार के करीब रही थी। मृतकों के लिहाज से यह आज भी दुनिया की सबसे बड़ी आतंकी घटना थी। इस घटना के बाद अमेरिका ने आतंकवाद को खत्म करने के लिए कई कदम उठाए, लेकिन उन कदमों का क्या और कितना असर हुआ, इसका अंदाजा हमें 9/11 के बाद हुए घटनाक्रमों से चलता है। 
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क्या हुआ था 9/11 हमलों के दिन, आतंकियों ने कैसे दिया था अंजाम?

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अल-कायदा आतंकियों ने चार प्लेन हाईजैक कर अमेरिका पर किया था हमला। - फोटो : Social Media
अल-कायदा के आतंकियों ने 11 सितंबर 2001 की सुबह चार विमानों को हाईजैक कर लिया था। इन सभी का मकसद विमानों को अलग-अलग ऐतिहासिक स्थलों पर क्रैश कराने का था। सबसे पहला क्रैश अमेरिकन एयरलाइन फ्लाइट 11 का हुआ था, जो कि न्यूयॉर्क शहर में सुबह 8.46 बजे वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टावर से टकराई थी। इसके 17 मिनट बाद ही यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 175 बिल्डिंग के दक्षिणी टावर से टकराई। 
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हाई अलर्ट जारी होने के बावजूद सुबह करीब 9.37 बजे अमेरिकन एयरलाइंस फ्लाइट 77 वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन से टकराई। चौथे हाईजैक हुए विमान यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 93 का लक्ष्य व्हाइट हाउस या यूएस कैपिटल बिल्डिंग को निशाना बनाने का था, लेकिन यात्रियों से भिड़ंत की वजह से आतंकियों के हाथ से विमान का नियंत्रण छूट गया और यह पेन्सिलवेनिया के शैंक्सविल में मैदानी इलाके में गिर गया। 

9/11 को हुई इन चार घटनाओं में 2977 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 19 हाईजैकर भी शामिल रहे। जो लोग मारे गए उनमें चार विमानों में सवार 246 लोग, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और उसके आसपास के इलाके में 2606 लोग और पेंटागन में मौजूद 125 लोग शामिल थे। मारे गए ज्यादातर लोग आम नागरिक थे, लेकिन राहत और बचाव कार्य के दौरान 344 बचावकर्मी, 71 पुलिसकर्मी और 55 सैन्यकर्मी भी मारे गए थे। 
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हमलों के बाद क्या घटनाक्रम हुए?

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अमेरिका पर जब 9/11 हमले हुए तो जॉर्ज बुश फ्लोरिडा में थे, उन्हें एक अधिकारी ने वहीं हमलों की जानकारी दी थी। - फोटो : Social Media
बताया जाता है कि जिस वक्त अमेरिका में 9/11 के हमले हुए थे, उस वक्त राष्ट्रपति जॉर्ज बुश फ्लोरिडा में थे, लेकिन शाम 7 बजे तक व्हाइट हाउस को सुरक्षित कर दिया गया और रात 9 बजे उन्होंने राष्ट्रपति भवन के ओवल ऑफिस से राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। बताया जाता है कि 9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने दुनियाभर से आतंकवाद को खत्म करने का बीड़ा उठा लिया। इसी सिलसिले में उसने लेबनान से लेकर इराक तक से आतंकी हमलों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। 

इस हमले का कनेक्शन आतंकी संगठन अल-कायदा से मिलने के बाद अमेरिका को जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक, हमलों की साजिश अफगानिस्तान में रची गई और अल-कायदा के आतंकियों और गुट के सरगना ओसामा बिन-लादेन को अफगानिस्तान में कुछ साल पहले ही गठित हुई तालिबान सरकार का समर्थन हासिल था। 

7 अक्टूबर 2001: अफगानिस्तान में ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम की शुरुआत

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अमेरिका ने अल-कायदा को खत्म करने के मकसद से अफगानिस्तान पर धावा बोला। - फोटो : Social Media
इसके बाद अमेरिका ने तालिबान को अल-कायदा के संरक्षण का जिम्मेदार बताते हुए ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम (Operation Enduring Freedom) के तहत अफगानिस्तान पर धावा बोल दिया। अमेरिका का पहला मकसद तो अल-कायदा की जड़े खत्म करना था, लेकिन इस कोशिश में उसका टकराव तालिबान से भी हुआ। अमेरिका के इस ऑपरेशन में ब्रिटेन के साथ नाटो से जुड़े देशों ने भी उसकी मदद की। 

25 नवंबर 2002: होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का गठन

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के गठन से जुड़े कानून पर हस्ताक्षर किए। इस विभाग को सिर्फ आतंकी हमलों, सीमा सुरक्षा और आव्रजन से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले यह सभी मामले अमेरिकी की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी- एफबीआई और खुफिया एजेंसी- सीआईए के हाथों में थे। लेकिन इतनी बड़ी नाकामी के बाद अमेरिकी सरकार ने अपनी सुरक्षा के लिए पूरे नए विभाग का ही गठन कर दिया। 

27 नवंबर 2002-22 जुलाई 2004: आयोग की जांच शुरू होने के दो साल बाद मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी

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खालिद शेख मोहम्मद को 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड करार दिया गया। - फोटो : Social Media
अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय आयोग का गठन किया। इस आयोग का मकसद 9 सितंबर 2001 को हुए घटनाक्रमों की जांच करना और इसे अंजाम देने वाले लोगों को पकड़ना रखा गया। आयोग की रिपोर्ट प्रकाशित हुई। इसमें खालिद शेख मोहम्मद को 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड करार दिया गया। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने उसे पकड़ने के बाद अपनी सबसे खतरनाक जेल ग्वानतनामो बे डिटेंशन कैंप भेजा गया। उसे मौत की सजा दिलाने से जुड़े आरोप तय किए गए। इसी साल यानी 2021 में खालिद और 9/11 हमलों के चार अन्य आरोपियों का ट्रायल शुरू होना था, लेकिन कोरोना महामारी के चलते अब तक सुनवाई आगे नहीं बढ़ी है।

2 मई 2011: ओसामा बिन-लादेन को मारकर अमेरिका का आतंकवाद पर जीत का दावा

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पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा बिन-लादेन के मारे जाने के बाद ओबामा ने किया आतंकवाद पर जीत का दावा। - फोटो : Social Media
9/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ता और अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन-लादेन की लोकेशन पता लगने के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में अपनी नेवी सील्स टीम को गुपचुप मिशन पर भेजा। इस टीम ने ओसामा बिन-लादेन को मारने के बाद उसका शव कब्जे में लेकर किसी अज्ञात जगह दफन कर दिया। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे दुनियाभर के आतंकी संगठनों के लिए चेतावनी करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए कहीं भी पहुंच सकता है।

28 दिसंबर 2014: नाटो का युद्ध मिशन खत्म करने का एलान

नाटो ने अफगानिस्तान में अपना युद्ध मिशन आधिकारिक तौर पर खत्म किया और देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी अफगान सरकार को हस्तांतरित कर दी। अमेरिका ने भी अल-कायदा के हाशिए पर धकेले जाने की बात कही। इसके बाद नाटो ने अफगान सरकार को स्थापित करने और तालिबान के खिलाफ उसकी मदद के लिए ऑपरेशन रिसॉल्यूट सपोर्ट लॉन्च किया। इस मिशन का मकसद पश्चिमी सेनाओं के खिलाफ हथियार उठा रहे तालिबानी आतंकियों को खत्म करना और अफगानिस्तान को आगे उभरने वाले खतरों से सुरक्षित करना था। 

29 फरवरी 2020: अमेरिकी सेना का अफगानिस्तान मिशन खत्म करने के लिए तालिबान से समझौता

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पिछले साल फरवरी में कतर के दोहा में हुआ अमेरिका और तालिबान का समझौता। - फोटो : Social Media
अमेरिका और तालिबान ने कतर के दोहा में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने 2018 में ही तालिबान से गुपचुप तरीके से बातचीत की कोशिशें शुरू कर दी थीं। दोहा में समझौते के तहत अमेरिकी सेनाओं को 14 महीने के अंदर अफगानिस्तान से लौटना था। बदले में तालिबान ने वादा किया कि वह अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकी संगठनों को पनपने में नहीं होने देगा। इसके बाद अगले 18 महीनों में अमेरिका ने धीरे-धीरे अपने सैनिक अफगानिस्तान से निकाल लिए। 

15 अगस्त 2021: अमेरिका के जाने के बाद तालिबान राज

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तालिबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा किया। - फोटो : PTI
तालिबान ने अमेरिकी सेना के जाने के बाद अफगानिस्तान के कई प्रांतों पर कब्जा कर लिया और आखिरकार 15 अगस्त को काबुल पर धावा बोलकर जीत का एलान कर दिया। अफगान नागरिकों के बीच देश से भाग निकलने की कोशिशों और आतंकी संगठन आईएस के हमले के इनपुट के बीच अमेरिका को एक बार फिर छह हजार सैनिकों को काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए भेजना पड़ा। 

30 अगस्त 2021: अमेरिका की अफगानिस्तान से विदाई, अल-कायदा ने फिर उठाया सिर

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अमेरिका ने 30 अगस्त 2021 तक अपनी सेना और नागरिकों को निकालने का काम पूरा किया। - फोटो : Social Media
अमेरिका ने अपना इवैक्यूएशन (निकासी कार्यक्रम) पूरा किया। इस दिन अमेरिका का आखिरी सैन्य विमान अफगानिस्तान से निकल गया। 20 सालों तक यहां चले सैन्य ऑपरेशन का मकसद अल-कायदा को खत्म करना था, पर अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से निकलने के बाद इस संगठन के फिर सिर उठाने की खबरें सामने आईं। 

तालिबान के कब्जे से आजाद एकमात्र प्रांत पंजशीर में तालिबान के साथ हमलों में अल-कायदा का नाम भी जुड़ा। अल-कायदा ने सरकार गठन को लेकर भी तालिबान के लिए बधाई संदेश दिया। वहीं, तालिबानी नेता ने अमेरिका में हुए 9/11 हमलों के पीछे अल-कायदा का हाथ होने पर शक जाहिर किया। 
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