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NASA: अब बुध ग्रह पर भी जीवन संभव, नमक के ग्लेशियर के मिले प्रमाण, नासा का दावा- यह पृथ्वी से अलग

Mon, 27 Nov 2023 07:28 AM IST
यशोधन शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: यशोधन शर्मा Updated Mon, 27 Nov 2023 07:28 AM IST
सार

वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रहों के विकास की हमारी समझ और पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं के नए आयाम खोलने का काम किया है। अध्ययन के प्रमुख लेखक एलोक्सिस रोड्रिगेज ने कहा कि एक शोध में प्लूटो में नाइट्रोजन के ग्लेशियरों की उपस्थिति पाई गई थी।

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Now life is possible on Mercury too, evidence of salty glacier found, NASA claims it is different from Earth
Mercury planet - फोटो : istock

विस्तार

सूर्य के सबसे करीब कहे जाने वाले बुध ग्रह पर जीवन हो सकता है। नासा के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। हालांकि, अब तक माना जा रहा था कि सूर्य के करीब होने के कारण इसका क्षेत्र झुलसा देने वाला भरा होगा।

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ऐसे में यहां जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन प्लैनेटरी साइंस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बुध की सतह पर नमक के ग्लेशियर के प्रमाण मिले हैं। ऐसे में यहां जीवन की उम्मीद जगी है। जैसे कि पृथ्वी पर भी गंभीर हालातों में भी सूक्ष्म जीवन देखने को मिलता है। गौरतलब है कि यह पानी के नहीं नमक के ग्लेशियर है।
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मर्करीस हिडन पास्ट 
रिवीलिंग अ वोलेटाइल-डॉमिनेटेड लेयर थ्रू ग्लेशियर लाइक फीचर्स एंड चेओटिक टेरेंस नामक अध्ययन प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। सूर्य के बहुत ही पास होने के कारण बुध ग्रह पर दिन का अधिकतम तापमान 430 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। वहीं, रात का तापमान-180 डिग्री तक नीचे गिर जाता है। इसकी वजह है कि यहां किसी भी तरह का वायुमडंल नहीं है जिससे यहां सतह पर पड़ने वाली रोशनी से बनी ऊष्मा को रोक सके।
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पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं के खुले आयाम
वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रहों के विकास की हमारी समझ और पृथ्वी के बाहर जीवन की संभावनाओं के नए आयाम खोलने का काम किया है। अध्ययन के प्रमुख लेखक एलोक्सिस रोड्रिगेज ने कहा कि एक शोध में प्लूटो में नाइट्रोजन के ग्लेशियरों की उपस्थिति पाई गई थी। इससे पता चलता है कि सौरमंडल में बहुत ही गर्म और बहुत ही ठंडे माहौल में भी ग्लेशियर बन सकते हैं। इससे सौरमंडल में बहुत सारे स्थानों पर जीवन की उम्मीद भी बनती है।


एक अरब वर्षों से समेटे हैं पदार्थ
बुध के ग्लेशियर पृथ्वी के ग्लेशियर से अलग हैं। यह गहरी समृद्ध परतों में निकले हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका मॉडल इसी बात की मजबूती से पुष्टि करता है कि इसमें नमक के प्रवाह ने इन ग्लेशियरों को पैदा किया होगा। इसके बाद ये जम कर एक अरब वर्षों से ही उड़ने वाला पदार्थ अपने अंदर समेटे रहे होंगे।

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