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उत्तर कोरिया की नई मिसाइल, अमेरिका का नया सिर दर्द
Mon, 12 Oct 2020 10:31 PM IST
देव कश्यप
डिजिटल ब्यूरो, प्योंगयांग
डिजिटल ब्यूरो, प्योंगयांग
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 12 Oct 2020 10:31 PM IST
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North Korea new ballistic missile
- फोटो : Twitter@nukestrat
उत्तर कोरिया ने शनिवार को इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का जो परीक्षण किया था, उससे पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आशंकाएं गहरा गई हैं। सोमवार को जापान सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि ‘हमें मालूम है कि अब परंपरागत हथियारों से उत्तर कोरिया का मुकाबला करना मुश्किल होगा।’ प्रवक्ता ने कहा कि जापान अब अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान देगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत में ठहराव आ जाने के बाद उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने देश की युद्ध क्षमता को मजबूत करने का इरादा जताया था।जानकार मानते हैं कि भले ही कुछ देर से, लेकिन किम ने अब उसी दिशा में कदम उठाया है। जानकारों के मुताबिक आर्थिक मुश्किलों के कारण किम अपनी महत्त्वाकांक्षा तेजी से पूरी नहीं कर पाए हैं, लेकिन उन्होंने उस दिशा में बढ़ने की कोशिशें नहीं छोड़ी हैं।
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शनिवार को उत्तर कोरिया की सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी का 75वां स्थापना दिवस था। इसी मौके पर आईसीबीएम का परीक्षण किया गया। ऐसा माना जा रहा है कि अपनी युद्ध क्षमता बढ़ाकर किम जोंग अमेरिका के साथ अगली संभावित वार्ता में अपनी स्थिति मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिका को संदेश दिया है कि उत्तर कोरिया अपनी नई मिसाइलों और परमाणु हथियारों के साथ उसका या उसके सहयोगी देशों का मुकाबला करने के लिए तैयार है।
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शनिवार रात को किम ने एक सैनिक परेड का निरीक्षण किया। इसमें नई आईसीबीएम को दिखाया गया। मिसाइल को 22 चक्कों वाले वाहन पर रखा गया था। उससे साफ है कि अब तक उत्तर कोरिया के पास जो मिसाइलें थीं, उनकी तुलना में नई मिसाइल काफी ज्यादा बड़ी है। दावा तो यह किया गया है कि यह द्रव ईंधन से प्रक्षेपित होने वाली दुनिया की सबसे बड़ी मिसाइल है। अंदाजा लगाया गया है कि यह एक साथ कई हथियारों को ले जाने में सक्षम है।
ऑस्ट्रेलिया के एक विशेषज्ञ ने जापान के एक अखबार से कहा कि साफ तौर पर उत्तर कोरिया अमेरिका की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदने की तैयारी में है। रक्षा जानकारों के मुताबिक हर नई मिसाइल से बचने के लिए रक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर जो खर्च आता है, वह मिसाइल को हथियारों से लैस करने के खर्च से कहीं अधिक बैठता है। इसलिए अगर उत्तर कोरिया की नई मिसाइल सचमुच उतनी क्षमतावान है, जितना कि दावा किया गया है, तो उसे रोकने के लिए अमेरिका को 12 से 16 इंटरसेप्टर लगाने होंगे, जिन पर एक अरब डॉलर तक का खर्च आ सकता है। साफ तौर पर उत्तर कोरिया की नई क्षमता अमेरिका और उसके जापान जैसे सहयोगी देशों के लिए एक चिंताजनक खबर है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इन दिनों तनाव बढ़ रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दखल से पहले से अमेरिका, उसके सहयोगी देश और आसियान के सदस्य कई देश तनाव में हैं। ऐसे में उत्तर कोरिया का नया दांव एक नया सिर दर्द पैदा करेगा। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया के चीन से गहरे ताल्लुकात हैं और माना जाता है कि उसकी सैनिक क्षमता विकसित करने में चीन ने पूरी मदद की है।