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चिकित्सा का नोबेल: अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड जूलियस और आर्डेम पैटापूटियन को मिला साझा सम्मान
Mon, 04 Oct 2021 03:25 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 04 Oct 2021 03:25 PM IST
सार
इन दोनों रिसर्चरों को शरीर में तापमान, दबाव और दर्द महसूस कराने वाले रिसेप्टरों की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है।
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चिकित्सा क्षेत्र में नोबेल विजेता।
- फोटो : Social Media
विस्तार
नोबेल पुरस्कार 2021 का एलान शुरू हो चुका है। सोमवार को चिकित्सा के नोबेल के लिए दो साझा विजेताओं- डेविड जूलियस और आर्डेन पैटामूटियम के नाम घोषित किए गए। इन दोनों रिसर्चरों को शरीर में तापमान, दबाव और दर्द देने वाले रिसेप्टरों की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया है।
नोबेल पुरस्कार के दोनों ही विजेता अमेरिकी हैं। डेविड जूलियन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में प्रोफेसर हैं। उधर पैटापूटियन अर्मेनियाई मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और ला जोला के स्क्रिप्स इंस्टीट्यूट में वैज्ञानिक हैं।
गौरतलब है कि तापमान, दर्द और दबाव तीनों ही हमारे छूकर महसूस करने वाली इंद्रियों का हिस्सा हैं। लेकिन इनके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी पर जूलियन और पैटापूटियन की रिसर्च आधारित है। दुनियाभर के वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि दर्द महसूस कराने वाले रिसेप्टर्स की पहचान के बाद इन्हें कई तरह की बीमारियों और सदमे के दौरान मिलने वाले दर्द को रोका जा सकता है।
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इतना ही नहीं कई फार्मास्यूटिकल लैब्स इस वक्त ऐसे मॉलिक्यूल्स की पहचान कर रही हैं, जो इन रिसेप्टर्स को प्रभावित कर के दर्द के उपचार में काम आ सके। खासकर आर्थराइटिस या किसी लंबी बीमारी में मिलने वाले दर्द के उपचार में।
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नोबेल पुरस्कार के दोनों ही विजेता अमेरिकी हैं। डेविड जूलियन यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में प्रोफेसर हैं। उधर पैटापूटियन अर्मेनियाई मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और ला जोला के स्क्रिप्स इंस्टीट्यूट में वैज्ञानिक हैं।
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गौरतलब है कि तापमान, दर्द और दबाव तीनों ही हमारे छूकर महसूस करने वाली इंद्रियों का हिस्सा हैं। लेकिन इनके बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी पर जूलियन और पैटापूटियन की रिसर्च आधारित है। दुनियाभर के वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि दर्द महसूस कराने वाले रिसेप्टर्स की पहचान के बाद इन्हें कई तरह की बीमारियों और सदमे के दौरान मिलने वाले दर्द को रोका जा सकता है।
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इतना ही नहीं कई फार्मास्यूटिकल लैब्स इस वक्त ऐसे मॉलिक्यूल्स की पहचान कर रही हैं, जो इन रिसेप्टर्स को प्रभावित कर के दर्द के उपचार में काम आ सके। खासकर आर्थराइटिस या किसी लंबी बीमारी में मिलने वाले दर्द के उपचार में।