Hambantota Port: श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह से 600 समुद्री मील दूर है चीनी पोत, प्रवेश की मंजूरी का इंतजार
12 जुलाई को श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने हंबनटोटा बंदरगाह पर जहाज के डॉकिंग के लिए मंजूरी दी थी। जबकि 8 अगस्त को इसे स्थगित करने का अनुरोध किया था।
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श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह हंबनटोटा में लंगर डालने वाला एक उच्च तकनीक वाला चीनी जहाज योजना के अनुसार अब तक यहां नहीं पहुंचा है, देश के बंदरगाह प्राधिकरण ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। चीनी बैलिस्टिक मिसाइल और उपग्रह ट्रैकिंग जहाज 'युआन वांग 5' को गुरुवार को पहुंचना था और 17 अगस्त तक बंदरगाह पर रहना था। श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी (एसएलपीए) के हार्बर मास्टर ने कहा कि जहाज योजना के मुताबिक बंदरगाह पर नहीं पहुंचा। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि जहाज को हंबनटोटा के पूर्व में 600 समुद्री मील दूर अपने स्थान से प्रवेश करने की मंजूरी का इंतजार है।
श्रीलंका ने 12 जुलाई की दी थी मंजूरी
12 जुलाई को श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने हंबनटोटा बंदरगाह पर जहाज के डॉकिंग के लिए मंजूरी दी थी। 8 अगस्त को मंत्रालय ने कोलंबो में चीनी दूतावास को लिखे एक पत्र में जहाज के नियोजित डॉकिंग को स्थगित करने का अनुरोध किया था। हालांकि, इसने इस तरह के अनुरोध का कारण नहीं बताया। 'युआन वांग 5' उस समय तक हिंद महासागर में प्रवेश कर चुका था। श्रीलंका ने स्थगन का अनुरोध तब किया जब भारत सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। एसएलपीए ने कहा कि हालांकि एक चीनी कंपनी के पास हंबनटोटा बंदरगाह का प्रभार है, लेकिन नेविगेशन और परिचालन संबंधी मामले वह खुद नियंत्रित कर रहा है।
श्रीलंका के विपक्षी राजनीतिक दलों ने चीनी जहाज के डॉकिंग के मुद्दे को गलत तरीके से संभालने के लिए सरकार को दोषी ठहराया है। सत्तारूढ़ श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना पार्टी के पांच-पक्षीय समूह ने एक संयुक्त बयान में आग्रह किया कि जहाज को हंबनटोटा जाने की अनुमति दी जाए। हंबनटोटा के दक्षिणी गहरे समुद्री बंदरगाह को इसके स्थान के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। बंदरगाह को बड़े पैमाने पर चीनी कर्ज लेकर विकसित किया गया था। भारत ने कहा है कि वह अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्रभावित करने वाले किसी भी मामले की सावधानीपूर्वक निगरानी करता है।
भारतीय प्रतिष्ठानों की जासूसी करने का प्रयास
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने नई दिल्ली में चीनी पोत की प्रस्तावित यात्रा की रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर कहा था कि हमें इस पोत द्वारा अगस्त में हंबनटोटा की प्रस्तावित यात्रा की रिपोर्ट की जानकारी है। उन्होंने पिछले महीने कहा था कि सरकार भारत की सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्रभावित करने वाले किसी भी मामले की सावधानीपूर्वक निगरानी करती है और उनकी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करती है। भारत इसके बारे में चिंतित है कि जहाज के ट्रैकिंग सिस्टम श्रीलंकाई बंदरगाह के रास्ते में भारतीय प्रतिष्ठानों की जासूसी करने का प्रयास कर रहे हैं।
सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने भारत की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ देशों के लिए श्रीलंका पर दबाव बनाने के लिए तथाकथित सुरक्षा चिंताओं का हवाला देना पूरी तरह से अनुचित है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि चूंकि श्रीलंका आर्थिक और राजनीतिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, श्रीलंका के सामान्य आदान-प्रदान और अन्य देशों के साथ सहयोग में हस्तक्षेप करना उसकी कमजोरी का फायदा उठाना है, जो नैतिक रूप से गैर-जिम्मेदार है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी मानदंडों के खिलाफ है।