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भारतीय जेलों और नीरव मोदी के मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित रही प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई
Wed, 09 Sep 2020 11:01 PM IST
गौरव पाण्डेय
पीटीआई, लंदन
पीटीआई, लंदन
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 09 Sep 2020 11:01 PM IST
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नीरव मोदी (फाइल फोटो)
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भारत प्रत्यर्पित किए जाने के खिलाफ यहां कानूनी लड़ाई लड़ रहे नीरव मोदी के मामले की सुनवाई एक बार फिर बुधवार को भारत में जेलों की स्थिति और उसके नाजुक मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित रही। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव (49) वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में प्रत्यर्पण के खिलाफ मुकदमा लड़ रहा है।
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न्यायमूर्ति सैमुअल गूज की अध्यक्षता में पांच दिवसीय सुनवाई का तीसरा दिन बचाव पक्ष के लिए समर्पित था जिसने नीरव मोदी के खिलाफ धोखाधड़ी और धनशोधन के प्रथम दृष्टया मामले के खिलाफ दलीलें दी। नीरव मोदी ने वैंड्सवर्थ जेल से वीडियो लिंक के जरिए अदालत की कार्यवाही देखी। नीरव मोदी पिछले साल मार्च में अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही इसी जेल में बंद है।
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नीरव मोदी सुनवाई के दौरान अधिकांश समय बेजान नजर आ रहा था। इसे देखते हुए एक समय अदालत ने सुनवाई रोक कर जांच करने को कहा कि क्या वीडियो संपर्क टूट गया है। अदालत ने नीरव को समय-समय पर हावभाव दिखाने को कहा ताकि अदालत आश्वस्त हो सके कि वह कार्यवाही से जुड़ा हुआ है।
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वकील क्लेर मोंटगोमरी की अगुवाई में नीरव मोदी की कानूनी टीम ने एक बार फिर मुंबई की आर्थर रोड जेल में बैरक संख्या 12 की स्थितियों की चर्चा की और दावा किया कि वहां एक आतंकवादी को रखा गया था। इसलिए वह पूरी तरह से ढक दिया गया था। इसके साथ ही बैरक में गर्मी के अलावा नमी, धूल, कीड़े जैसी अन्य समस्याएं भी हैं।
बुधवार की सुनवाई के दौरान नीरव मोदी के वकीलों ने यह दावा भी किया कि उनका मुवक्किल 'मीडिया ट्रायल' का विषय रहा है और भारत में उसकी निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकेगी। इस मामले में कोई फैसला साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में आने की उम्मीद नहीं है क्योंकि अंतिम सुनवाई के लिए एक दिसंबर की तारीख अस्थायी रूप से निर्धारित की गई है।