चीन की पैठ: निकरागुआ का रुख बदलना ताइवान से ज्यादा बड़ा झटका है अमेरिका के लिए
विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना से लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की चीन की मुहिम रोशनी पड़ी है। जबकि इस इलाके को अमेरिका अपना प्रभाव क्षेत्र समझता है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में चीन की पैठ तेजी से बनी है...
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ताइवान के मामले में मध्य अमेरिकी देश निकरागुआ के रुख में आए बदलाव को चीन अपनी एक बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है। निकरागुआ ने गुरुवार को एलान किया था कि उसने ताइवान से मान्यता वापस लेकर चीन से कूटनीतिक संबंध बनाने का फैसला किया है। निकरागुआ उन 15 देशों में एक था, जिन्होंने अभी तक ताइवान को वास्तविक चीन के रूप में मान्यता दे रखी थी। निकरागुआ का रुख बदलने के बाद अब ऐसे देशों की संख्या 14 बची है।
निकरागुआ भौगोलिक रूप से अमेरिका के पास है। इसीलिए उसके रुख परिवर्तन को चीन ने अपनी बड़ी सफलता माना है। विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना से लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की चीन की मुहिम रोशनी पड़ी है। जबकि इस इलाके को अमेरिका अपना प्रभाव क्षेत्र समझता है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में चीन की पैठ तेजी से बनी है।
होंडूरास बी जा सकता है अमेरिका के खिलाफ
निकरागुआ के पहले चीन 2017 में पनामा और 2018 में एल सल्वाडोर ने ताइवान से मान्यता वापस लेते हुए चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए थे। 2018 में ही कैरीबियाई देश डोमिनिकल रिपब्लिक ने भी ऐसा ही कदम उठाया। अनुमान है कि इस राह पर चलने वाला अगला देश होंडूरास होगा। वहां की नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जियामेरा कास्त्रो ने पिछले महीने अपने चुनाव अभियान के दौरान ही इस बात संकेत दे दिए थे।
ताइवान स्थित तामकांग यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध के प्रोफेसर ली दा-जुंग ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि उस क्षेत्र में अमेरिका को अब कड़ी होड़ का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण अमेरिका काफी समय से चिंतित है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक बीते दो दशक में चीन ने इस क्षेत्र में अपना असर पर बढ़ाने का काफी ध्यान दिया है। उसकी कोशिश अब रंग ला रही है।
अमेरिकी प्रतिबंधों से नाराजगी
ली दा-जुंग ने कहा- ‘पिछले कुछ वर्षों में चीन ने लैटिन अमेरिका में स्थित ताइवान के चार सहयोगी देश छीन लिए हैं। इससे निश्चित रूप से उस क्षेत्र में उसका प्रभाव बढ़ेगा।’ निकरागुआ ने पाला बदलने का एलान उसी रोज किया, जिस दिन अमेरिका ने निकरागुआ के राष्ट्रपति डैनियल ऑर्तेगा के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नेस्तर मोनकाडा पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। उसके बाद जब निकरागुआ ने चीन से संबंध बनाने का एलान किया, तो उस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि ये फैसला निकरागुआ की जनता की इच्छा को जाहिर नहीं करता है।
उधर चीन के फुजियान मे स्थित मिनेन नॉर्मल यूनिवर्सिटी में ताइवान मामलों के विशेषज्ञ वांग जियानमिन ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंध भी एक कारण हैं, जिनकी वजह से निकरागुआ ने अपना रुख बदला है। अब चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निकुरागुआ का समर्थन कर सकता है। साथ ही वह उसके आर्थिक विकास में मददगार भी बन सकता है।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन और निकरागुआ के बीच पहले ही व्यापार काफी बढ़ चुका है। 2020 में चीन अमेरिका और मैक्सिको के बाद निकरागुआ का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था। अब खबर है कि एक चीनी कंपनी को निकरागुआ में एक बड़ी नहर को बनाने का ठेका मिलने वाला है।