संकट में ताइवान: चीन की बिना सैनिक अभियान के परास्त करने की चाल पर नहीं है किसी का ध्यान!
जरशानेक की किताब ‘मीडिया वॉरफेयरः ताइवान्स बैटल फॉर द कॉग्निटिव डोमेन’ में दावा किया है कि चीन ने ताइवान और मुख्य सहयोगी देश अमेरिका के खिलाफ पूरी दुनिया में प्रचार अभियान छेड़ रखा है। इस किताब में कहा गया है कि चीन की रणनीति में मीडिया युद्ध भी उतना ही अहम है, जितनी चीनी सेना की तैयारियां...
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ताइवान के लोगों का मनोबल तोड़ने के लिए चीन ‘मीडिया युद्ध’ का सहारा ले रहा है। ये बात एक नई किताब में कही गई है। किताब के लेखक केरी के. जरशानेक के मुताबिक जब ये सवाल आता है कि क्या चीन ताइवान पर हमला करेगा, तो ज्यादातर लोगों का ध्यान चीन की सैनिक तैयारियों की तरफ जाता है। लेकिन यह उसकी तैयारियों का आधा हिस्सा ही है। बाकी आधा हिस्सा ‘मीडिया युद्ध’ का है।
जरशानेक की किताब ‘मीडिया वॉरफेयरः ताइवान्स बैटल फॉर द कॉग्निटिव डोमेन’ के नाम से आई है। इसमें दावा किया गया है कि चीन ने जो ‘मीडिया युद्ध’ छेड़ रखा है, उसका मकसद बिना सैनिक अभियान के ही ताइवान को परास्त कर देना है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम के मुताबिक जरशानेक 2020 में एक शोध पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने उन रणनीतियों का सुझाव दिया था, जिन्हें ‘बिना जंग लड़े विजयी होने’ की चीन की योजना को नाकाम करने के लिए अपनाया जा सकता है। जरशानेक ताइवान की नेशनल चेंगची यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
जनमत युद्ध का नाम
जरशानेक ने अपनी ताजा किताब में दावा किया है कि चीन ने ताइवान और मुख्य सहयोगी देश अमेरिका के खिलाफ पूरी दुनिया में प्रचार अभियान छेड़ रखा है। इस किताब में कहा गया है कि चीन की रणनीति में मीडिया युद्ध भी उतना ही अहम है, जितनी चीनी सेना की तैयारियां। चीन इन दोनों मोर्चों का इस्तेमाल एक दूसरे के अभियान में ताकत देने के लिए करता है। मीडिया युद्ध को कुछ जानकार जनमत युद्ध भी कहते हैं।
इसके तहत चीन सूचना देने और लोगों की सोच की प्रभावित करने के सभी माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा है। इसका मकसद विरोधी खेमे को कमजोर करना, उसमें विभाजन पैदा करना, उसे भ्रमित करना, उसे अपने साथ मिलाने की कोशिश करना, और उसका मनोबल तोड़ना होता है।
इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल
जरशानेक के मुताबिक चीन इस मकसद के लिए उपलब्ध पुराने और नए दोनों प्रकार के माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा है। पुराने माध्यमों में टेलीविजन, रेडियो और अखबार शामिल हैं। इसके अलावा उसने अपने पक्ष में गुजरे देशकों में कई किताबें भी लिखवाई हैं। अब वह इंटरनेट और सोशल मीडिया का भी व्यापक रूप से इस्तेमाल कर रहा है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर चीनी युद्धा अब काफी आक्रामक हो चुके हैँ।
किताब में कहा गया है कि मीडिया युद्ध की रणनीति के तहत चीन की कंपनियों ने ताइवान में प्रसारण (टीवी, रेडियो) और प्रकाशन (अखबार, पत्रिकाएं) कंपनियों को खरीदा है। ताइवान के जो माध्यम नहीं बिके हैं, उनमें विज्ञापन देने के लिए चीनी संस्थाएं लाखों डॉलर खर्च कर रही हैं। ताइवान में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी चीन के प्रभावशाली लोग सक्रिय हैं। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य ताइवान के लोगों को यह समझाना है कि वे असल में चीन के ही बाशिंदे हैं।
किताब में कहा गया है कि इस मुहिम में चीन को कुछ कामयाबी भी मिली है। आज चीन की एक प्रमुख पार्टी- कुओमिनतांग में ऐसे कई नेता हैं, जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन करते हैं। ऐसे एक नता हान कुओ-यू 2018 में ताइवान के दूसरे सबसे बड़े शहर काओहसिउंग के मेयर चुने गए। इस जीत की तब काफी चर्चा हुई, क्योंकि इसके पहले तक इस शहर को चीन से ताइवान को आजाद कराने की समर्थक डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी का गढ़ समझा जाता था। ये नतीजा आने के बाद ताइवान की आजादी समर्थक राष्ट्रपति त्साई इंग वेन ने कहा था कि दुष्प्रचार के कारण वहां उनकी पार्टी की हार हुई है।