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नेपाल: शीर्ष नेताओं ने प्रचंड से कहा- एक और विश्वास मत हासिल करने की जरूरत, PM आवास पर कई दलों की बैठक

Sat, 06 May 2023 10:48 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 06 May 2023 10:48 PM IST
सार

हाल ही में संपन्न उपचुनावों में तीन में से दो सीटें जीतने वाली आरएसपी ने प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ सत्ता साझेदारी समझौते पर पहुंचने में विफल रहने के बाद शुक्रवार को सरकार से समर्थन वापस ले लिया।  

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Nepals top leaders urge PM Prachanda to seek another vote of confidence
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' - फोटो : cmprachanda.com

विस्तार

सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एक पार्टी द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड को प्रतिनिधि सभा में एक और विश्वास मत हासिल करने की जरूरत है। नेपाल के शीर्ष नेताओं ने शनिवार को प्रचंड से यह बात कही। 

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नेकपा-माओवादी केंद्र के मुख्य सचेतक हितराज पांडेय ने बताया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने बालूवतार में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री प्रचंड, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा, नेकपा-एकीकृत समाजवादी के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल और जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र यादव सहित पांच दलों के गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया।
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पांडे ने पीटीआई-भाषा को बताया कि रवि लमिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद भी प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार के पास 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (एचओआर) में आसानी से बहुमत है। उन्होंने कहा कि इसलिए प्रधानमंत्री को प्रतिनिधि सभा में फिर से विश्वास मत हासिल करने की जरूरत है।
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हाल ही में संपन्न उपचुनावों में तीन में से दो सीटें जीतने वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ सत्ता साझेदारी समझौते पर पहुंचने में विफल रहने के बाद शुक्रवार को सरकार से समर्थन वापस ले लिया। आरएसपी ने आरोप लगाया कि प्रचंड सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने में विफल रही है। नेपाल की संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी आरएसपी के निचले सदन में 22 सांसद हैं।


पिछले साल दिसंबर में गठित प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार में भाग लेने वाली आरएसपी ने भले ही फरवरी में सरकार छोड़ दी थी, लेकिन उसने 'स्थिरता के लिए' अपना समर्थन वापस नहीं लिया। दिसंबर में प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए प्रचंड ने पहली बार जनवरी में और फिर इस साल मार्च में विश्वास मत हासिल किया था।

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