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नेपाल: संसद की कार्यवाही में बाधा डालने पर यूएमएल अड़ी, संसदीय संस्कृति पर उठे सवाल
Sun, 06 Mar 2022 06:39 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 06 Mar 2022 06:39 PM IST
सार
विवाद की जड़ में यूएमएल का अपने 14 सांसदों को पार्टी से निकालने का फैसला है। पिछले साल अगस्त में पार्टी ने ये फैसला किया था। तब उसने मांग की थी कि स्पीकर उसके इस निर्णय का संज्ञान लें। जबकि निकाले गए सदस्यों ने अलग पार्टी बना ली।
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नेपाल संसद
- फोटो : Social Media
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विस्तार
नेपाल के प्रमुख विपक्षी दल ने संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की बैठकों में व्यवधान डालना जारी रखा है। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) ने आगे भी संसद ना चलने देने का एलान किया है। उसके इस राह पर चलते रविवार को छह महीने पूरे हो गए। यूएमएल को मुख्य शिकायत प्रतिनिधि सभा के स्पीकर अग्नि सपकोटा से है। उनको इस पद से हटाने की अपनी मांग पर जोर डालने के लिए ही यूएमएल इस रास्ते पर चल रही है।
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विवाद की जड़ में यूएमएल का अपने 14 सांसदों को पार्टी से निकालने का फैसला है। पिछले साल अगस्त में पार्टी ने ये फैसला किया था। तब उसने मांग की थी कि स्पीकर उसके इस निर्णय का संज्ञान लें। जबकि निकाले गए सदस्यों ने अलग पार्टी बना ली। स्पीकर का कहना है कि नए दल के गठन के बाद वे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली यूएमएल से निष्कासित सदस्यों को नोटिस जारी नहीं कर सकते। इस वजह से गतिरोध बना हुआ है।
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पर्यवेक्षकों के मुताबिक, यूएमएल के इस विरोध की वजह से नेपाली संसद की कार्यवाही आम तौर पर ठप रही है। बीते छह महीनों में सिर्फ राष्ट्रीय बजट, बजट से जुड़े चार बिल, और अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन की आर्थिक मदद स्वीकार करने से संबंधित प्रस्ताव ही पारित हो पाए हैं। यूएमएल ने शनिवार को एलान किया कि वह संसद की कार्यवाही में रुकावट डालना जारी रखेगी। इससे आगे भी संसद के चल पाने की संभावना काफी घट गई है।
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विश्लेषकों ने संसद की कार्यवाही में ऐसी रुकावट को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताया है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि मौजूदा प्रतिनिधि सभा अपने पांच साल के कार्यकाल में छह महीनों तक लगभग कोई सामान्य काम नहीं कर पाई है। इस वजह से अब नेपाल की संसदीय संस्कृति पर सवाल उठने लगे हैं। प्रतिनिधि सभा के पूर्व स्पीकर दमन नाथ धुनंगना ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा, ‘यह यूएमएल की अराजकता है। इससे न सिर्फ जन प्रतिनिधित्व की सर्वोच्च संस्था पर आंच आई है, बल्कि उससे जनादेश का भी मखौल उड़ा है।’ धुनंगना ने सुझाव दिया है कि ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए अब एक स्वतंत्र निर्णायक (ओम्बुड्समैन) की नियुक्ति की जानी चाहिए।
कुछ अन्य विशेषज्ञों ने भी कहा है कि संसद की कार्यवाही में ऐसी रुकावटों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन यूएमएल के नेताओं का कहना है कि संसद में अपना असंतोष जताना उनका अधिकार है। यह अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के तहत आता है। पार्टी के चीफ ह्विप विशाल भट्टराई ने कहा कि हमारे साथ अन्याय हुआ है। ना तो संसद और ना ही सुप्रीम कोर्ट ने हमारी चिंताओं का हल निकाला है। ऐसे में दबाव बनाने के लिए संसदीय कार्यवाही में रुकावट डालना हमारी मजबूरी है।
यूएमएल ने जिन 14 सांसदों को पार्टी से निकाला था, उनमें माधव कुमार नेपाल भी थे। बाद में नेपाल ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) नाम से अलग पार्टी बना ली, जो अब नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है।