Nepal: अब खुल कर सामने आया देउबा सरकार और राष्ट्रपति भंडारी के बीच टकराव
Nepal: नेपाल के संविधान के प्रावधानों के मुताबिक राष्ट्रपति सिर्फ एक बार किसी बिल को पुनर्विचार के लिए लौटा सकती हैं। अगर संसद ने दोबारा उसे उसी रूप में पास कर दिया, तो राष्ट्रपति के पास उस पर दस्तखत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है...
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नेपाल में नागरिकता संशोधन बिल पर राष्ट्रपति और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। नेपाल की संसद ने ये बिल पारित किया था, जिस पर दस्तखत करने से राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने इनकार कर दिया। उन्होंने बिल पर कई आपत्तियां दर्ज कराते हुए उसे पुनर्विचार के लिए संसद के पास भेज दिया था।
बीते हफ्ते नेपाली संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति की आपत्तियों को सिरे से ठुकराते हुए बिल को उसके मूल रूप में ही दोबारा पारित कर दिया। उसके बाद उसे ऊपरी सदन में पेश किया गया, जहां उसे पूरी समीक्षा के लिए संसदीय समिति को भेजने का फैसला हुआ। लेकिन संसदीय समिति में सत्ताधारी गठबंधन के बहुमत को देखते हुए आम अनुमान यही है कि बिल के मूल रूप पर ही ऊपरी सदन में भी मुहर लगा दी जाएगी।
अब खबर आई है कि राष्ट्रपति भंडारी ने राजनीतिक दलों के इस रुख पर चिंता जताई है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से इस बारे में विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति की इस पहल को असाधारण माना जा रहा है। नेपाल के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति का पद संवैधानिक प्रमुख का है। इसके प्रावधानों के मुताबिक राष्ट्रपति सिर्फ एक बार किसी बिल को पुनर्विचार के लिए लौटा सकती हैं। अगर संसद ने दोबारा उसे उसी रूप में पास कर दिया, तो राष्ट्रपति के पास उस पर दस्तखत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
ताजा खबर के मुताबिक राष्ट्रपति भंडारी ने सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दो प्रमुख पार्टियों- नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेताओं को राष्ट्रपति भवन बुलाया और नागरिकता संशोधन बिल पर उनके रुख को लेकर चिंता जताई। राष्ट्रपति के बुलाने पर जो नेता उनसे मिलने गए, उनमें नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा भी हैं। नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा भी प्रधानमंत्री देउबा के साथ गए थे। बाद में थापा ने बताया- ‘राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि जो आपत्तियां उन्होंने जताईं, राजनीतिक दल उन पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि बिल लौटा कर राजनीतिक वितंडा खड़ा करने का उनका कोई इरादा नहीं था।’
राष्ट्रपति के सूचना एवं संचार सलाहकार टीका ढकाल ने बताया कि नेपाली कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने उनकी सिफारिशों की अनदेखी करने के राजनीतिक दलों के रुख पर निराशा जताई। नेपाली कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात के बाद भंडारी ने मुख्य विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के नेताओं से इस मुद्दे पर चर्चा की। यूएमएल ने संसद में नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया था। यूएमएल नेता सुभाष नेमबाग के मुताबिक राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकता से संबंधित मुद्दे बीते 70 वर्षों से उठाए जाते रहे हैं। उन्हें एकमुश्त ढंग से हल किया जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक नागरिकता संशोधन कानून अगले आम चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। आम राय है कि सत्ताधारी गठबंधन ने खास कर मधेस प्रांत में इससे मिलने वाले फायदे को ध्यान में रख कर संशोधन बिल पारित करने में जल्दबाजी दिखाई। लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में अब उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है। विपक्ष को अब यह आरोप लगाने का भी मौका मिला है कि सत्ताधारी गठबंधन ने राष्ट्रपति की चिंताओं को बिना सोचे-विचारे नजरअंदाज कर दिया।
भारतीय थलसेना प्रमुख चार सितंबर को नेपाल पहुंचेंगे
भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे चार सितंबर को नेपाल पहुंचेंगे। वे पांच दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान जनरल पांडे प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से मुलाकात करेंगे। देउबा रक्षा मंत्री भी हैं। जनरल पांडे काठमांडू में सेना मंडप में शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देंगे। वह आठ सितंबर को काठमांडू से वापस आएंगे।