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राजनीतिक दबाव में है नेपाल का सुप्रीम कोर्ट?: बालेंद्र सरकार पर उठे सवाल; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने लगाए आरोप
Sat, 25 Jul 2026 07:01 AM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Sat, 25 Jul 2026 07:01 AM IST
सार
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने नेपाल सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक हस्तक्षेप, जजों पर इस्तीफे का दबाव और वरिष्ठता की परंपरा तोड़कर मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने के आरोप लगाए हैं। संगठनों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने और जजों पर दबाव रोकने की मांग की है।
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प्रधानमंत्री बालेन शाह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने नेपाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट की नियुक्तियों और उसकी संरचना में राजनीतिक हस्तक्षेप से बाज आने के लिए आगाह करते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (आईसीजे) ने शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि नेपाल सरकार की ओर से हाल ही में उठाए गए कदम देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालते हैं।
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क्या जजों पर इस्तीफे और महाभियोग का दबाव बनाया जा रहा है?
बयान में कहा गया कि मौजूदा जजों के जबरन इस्तीफे या महाभियोग के जरिए सुप्रीम कोर्ट की संरचना को बदलने के लिए राजनीतिक दबाव डाले जाने की खबरें सामने आई हैं। मई 2026 में नेपाल के संविधान और कानून के सिद्धांतों के तहत आवश्यक संसदीय कानून के बजाय एक कार्यकारी अध्यादेश के माध्यम से संवैधानिक परिषद अधिनियम में संशोधन करने को इन संगठनों ने अनुचित करार दिया। मानवाधिकार समूहों ने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार से जजों पर दबाव बनाना बंद करने और न्यायिक स्वतंत्रता से खिलवाड़ न करने की चेतावनी दी।
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क्या मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में वरिष्ठता की परंपरा तोड़ी गई?
मानवाधिकार समूहों का मानना है कि तीन वरिष्ठ जजों की मौजूदगी के बावजूद मनोज कुमार शर्मा को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जो नेपाल की वर्षों पुरानी वरिष्ठता की परंपरा का उल्लंघन है।
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किन न्यायाधीशों पर दबाव डालने का दावा किया गया?
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, वरिष्ठ न्यायाधीश सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि इस्तीफा देने से इनकार करने पर उन्हें महाभियोग की धमकी दी जा रही है।