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Nepal: बालेंद्र सरकार को सुप्रीम झटका, भारतीय उत्पादों पर नहीं लगेगा सीमा शुल्क; अदालत ने आदेश में क्या कहा?

Sun, 17 May 2026 06:55 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 17 May 2026 06:55 AM IST
सार

काठमांडो में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने बालेंद्र शाह सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने भारत से सीमा पार लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से अधिक के घरेलू सामान पर सीमा शुल्क वसूलने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। वित्त मंत्रालय के इस फैसले से तराई-मधेस क्षेत्र में भारी नाराजगी थी। आइए, विस्तार से मामले को समझते हैं...

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Nepal Supreme Court Balendra Shah government India border customs Indian goods import
नेपाल सरकार के फैसले पर क्या बोला सु्प्रीम कोर्ट? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की नव निर्वाचित सरकार को देश के सर्वोच्च न्यायालय से एक बहुत बड़ा और करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने भारत से नेपाल में लाए जाने वाले आम इस्तेमाल के भारतीय उत्पादों पर सीमा शुल्क लगाने के सरकार के एक विवादास्पद फैसले पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। अदालत के इस अहम आदेश के बाद अब सीमा पार से 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान लाने पर आम जनता को सीमा शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
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दरअसल, हाल ही में नेपाल के वित्त मंत्रालय ने एक नया नियम लागू किया था। इस नियम के तहत यह अनिवार्य कर दिया गया था कि भारत से अगर कोई 100 नेपाली रुपये से ज्यादा का सामान लाता है, तो उसे सीमा शुल्क यानी टैक्स चुकाना ही होगा। जनता इस फैसले से बहुत परेशान थी और इसकी कड़ी आलोचना हो रही थी। अब नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को एक अंतरिम आदेश जारी करके सरकार के इस कठोर फैसले को लागू करने से रोक दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा है?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस हरि प्रसाद फुयाल और जस्टिस टेक प्रसाद ढुंगाना की पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई की। अदालत ने प्रधानमंत्री कार्यालय, मंत्रिपरिषद, वित्त मंत्रालय और अन्य सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक इस मामले में अदालत का कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस विवादित सीमा शुल्क प्रावधान को बिल्कुल भी लागू न किया जाए।

अदालत में यह मामला किसने और क्यों उठाया?
सरकार के इस फैसले के खिलाफ कुछ जागरूक वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोगी सिंह और प्रशांत बिक्रम शाह ने वित्त मंत्रालय के इस फैसले को चुनौती देते हुए एक रिट याचिका दायर की थी। इन याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि 100 नेपाली रुपये से ज्यादा के सामान पर टैक्स लगाने की नीति नेपाल के सीमा शुल्क अधिनियम-2081 के सख्त खिलाफ है। वकीलों ने बताया कि यह फैसला अधिनियम में दी गई छूट के प्रावधानों का सीधा-सीधा उल्लंघन करता है।




तराई-मधेस क्षेत्र में लोगों का गुस्सा क्यों भड़क रहा था?
इस नए नियम के लागू होने के बाद नेपाल-भारत सीमा पर तराई-मधेस क्षेत्र की चौकियों पर बहुत कड़ी जांच शुरू हो गई थी। सीमा शुल्क वसूलने के इस अनिवार्य नियम के कारण सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) ने आम लोगों की सघन तलाशी लेनी शुरू कर दी थी। पहले आम नागरिकों को छोटी-मोटी रोजमर्रा की खरीदारी और घरेलू सामानों पर अनौपचारिक रूप से सीमा शुल्क में छूट मिल जाती थी। लेकिन छूट खत्म होने से लोगों में भारी आक्रोश फैलने लगा था।


सरकार ने यह कदम सीमा शुल्क की चोरी को रोकने के नाम पर उठाया था। लेकिन इसके आड़ में चौकियों पर बड़े पैमाने पर आम लोगों के खिलाफ ही सख्त कार्रवाई की जाने लगी थी। इस एकतरफा और कठोर नीति ने मधेस के सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लोगों का जीवन बहुत ही मुश्किल कर दिया था। आम आदमी छोटी-सी खरीदारी के लिए भी परेशान हो रहा था।

सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश अब तराई-मधेस और सीमावर्ती इलाकों की आम जनता के लिए एक बहुत बड़ी राहत बनकर आया है। लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। फिलहाल, अदालत के इस कड़े रुख के बाद बालेंद्र शाह सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं और सीमा पर एपीएफ की अनावश्यक सख्ती पर भी लगाम लग गई है।
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